-कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में घोषणा होती रही
-अब अकालियों ने घोषणा को चंडीगढ़-पटियाला-बठिंडा तक बढ़ाया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटियाला-चंडीगढ़ रोड का 60-70 किमी का रास्ता कभी 45 मिनट में तय होता था, लेकिन बढ़ते ट्रैफिक ने यह समय बढ़ाकर दोगुणा कर दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार वर्ष 2002 में आई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री को अपने गृह जिले व गृह नगर से राजधानी तक जाने में परेशानी होने लगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 20 मिनट की दूरी कम करने स्वयं तो हैलीकाप्टर का रास्ता चुन लिया, पर आम लोगों के लिए सड़क को फोर लेन करने की घोषणा कर दी। वादा किया गया कि जल्दी ही सड़क फोर लेन होगी, सड़क के बीच डिवाइडर होगा और दोनों और दो-दो गाडिय़ां आसानी से निकल सकेंगी।
अब इस सड़क पर चंडीगढ़ तक जाने में दो जगह पर 15-15 रूपये के टोल टेक्स के साथ बिल्ट ओन आपरेट के सिद्धांत पर निजी क्षेत्र के हवाले करने का प्रस्ताव केंद्रीय भूतल मंत्रालय के पास भेजा गया है। राष्ट्रीय राज्य मार्ग 64 नंबर होने के चलते संभवत: केंद्रीय मंजूरी के बाद काम कब चालू हो पाएगा? कहा नहीं जा सकता।
18 से 24 फुट चौड़ी सड़क पर दुर्घटनाएं बढ़ती रही और सड़क को किलर रोड का नाम मिल गया। शोर ज्यादा मचा तो सड़क को चौड़ा करने का कार्य शुरू हुआ। साढ़े 17 करोड़ रूपये की लागत से पांच सात फुट सड़क चौड़ी भी हो गई। अब तीन गाडिय़ां निकलने लायक हो गईं। लेकिन अब हालात फिर वहीं आ गए हैं। जब डेढ़ से दो घंटे का सफर हो गया है। और तो और क्षेत्र में नए वाहनों का हो रहा रजिस्ट्रेशन तेजी से बढ़ता जा रहा है।
मालवा बेल्ट से अकाली भाजपा गठबंधन को पिछले विधान सभा चुनाव में कड़ी हार का सामना करना पड़ा तो गठबंधन सरकार ने घोषणा का सिलसिला पटियाला से और डेढ़ सौ किलोमीटर आगे बढ़ते हुए बठिंडा तक कर दिया, वादा किया गया कि चंडीगढ़ से बठिंडा तक एक्सप्रेस हाईवे बनाया जाएगा।
पटियाला शहर से बहादुरगढ़ तक सड़क फोर लेन है, राजपुरा में भी थोड़ा क्षेत्र फोर लेन का है। बनूड़ में भी शहरी आबादी वाला हिस्सा फोर लेन हो चुका है। ऐसे ही स्थिति जीरकपुर से पहले और बाद में चंडीगढ़ तक की है। मामला तो इन फोर लेन वाली सड़कों को आपस में मिलाने भर का रह गया जो पूरा नहीं हो सका।
हमने पीआईडीबी से सड़क चौड़ी करवाई: बाजवा
कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहे प्रताप सिंह बाजवा कहते हैं कि उनके कार्यकाल में पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डवलेपमेंट बोर्ड से इस सड़क को उस वक्त की जरूरत अनुसार चौड़ा करवाया था, फिर चंडीगढ़ से बठिंडा तक का प्रोजेक्ट केंद्रीय मंत्रालय के हवाले कर नैशनल हाई वे अथारिटी से फोर लेन करवाने का प्रावधान कर दिया लेकिन अब समझ में नहीं आता कि आखिर इन लोगों ने वापिस राच्य के पास पीआईडीबी से टोल टेक्स वाला प्रोजेक्ट करवाने का क्यों मन बनाया? अब दोनों ही पूरे नहीं हुए, जबकि सड़क पर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है।
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