Saturday, 24 December 2011

पिछड़ा शुतराणा और पिछड़ता चला गया, shutrana, punjab election, 2012,



भूपेश चट्ठा, पटियाला
रेल मार्ग व किसी बड़े शहर से च्यादा दूरी होने के चलते शुतराणा विधान सभा क्षेत्र को वास्तविक  रूप से पिछड़ा क्षेत्र कहें तो गलत नहीं होगा। पंजाब हरियाणा सीमा पर बसे इस क्षेत्र में कोई बड़ा शहर भी नहीं आता। जिस घग्गर को सामने रख कर चुनाव लड़े जाते हैं वो तो जहां का तहां रहता है। अलबत्ता दोनों ही प्रमुख दलों के नेता अंतत: भावनात्मक मुद्दों की तलाश में रहते हैं। कौन क्या भला करेगा? इस पर चर्चा कम होती है जबकि किसके साथ कितना धक्का हुआ? इसे सामने जरूर रखा जाता है। हालांकि पिछले चुनाव में सबसे उपर डेरे का मुद्दा ही छाया रहा है।
वहीं इस क्षेत्र में बादशाह पुर बैल्ट के डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ की मार तले हर साल आते हैं लेकिन बाढ़ नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, घग्गर नदी की बाढ़ के अलावा आम दिनों में नदी के प्रदूषित पानी से फसलों को होते रहे नुकसान के बारे में तो कभी विचार चर्चा ही नहीं हुई। हालांकि भूमिगत जल के प्रदूषित होने पर आरओ सिस्टम दिखने लगे है। इसी तरह पटियाला से समाना-पातड़ां-टोहाना होते हुए जाखल हरियाणा तक रेलवे लाइन बनाने का मुद्दा कांग्रेस ने उठाया जरूर पर अभी लगता है कि दिल्ली दूर है। हालांकि यहां की पातड़ां मंडी आटो मोबील क्षेत्र में प्रदेश की सबसे बड़ी मंडी कही जा सकती है लेकिन वह भी निजी क्षेत्र के दम पर सरकार का इसमें कोई योगदान नहीं है।

निसंदेह दूर दराज का क्षेत्र है: घग्गा
शिरोमणि अकाली दल से चुनाव लड़े व कांग्रेस की बेअंत सिंह सरकार में मंत्री रहे हमीर सिंह घग्गा कहते हैं कि दूर दराज का यह क्षेत्र खासा पिछड़ा है और जन प्रतिनिधत्व के साथ जब वे सत्ता में आए थे तब काफी विकास हुआ। लेकिन घग्गर की बाढ़ नियंत्रण दो राच्यों का मामला है और ऐसे ही रेलवे लिंक में कई अन्य मंत्रालय भी उलझे हैं। मुद्दा लगातार उठाया गया है।



सरकार मांग के विपरीत काम करती है: विधायक शुतराणा
कभी शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर चुनाव जीतते रहे निमर्ल सिंह शुतराणा आजकल कांग्रेस से विधायक हैं। क्षेत्र में विकास के नाम पर कहते हैं कि इस सरकार से जो कह दो ठीक उसका उल्टा करती है। केंद्र से बाढ़ नियंत्रण को जो पैसे आते हैं उसका प्रयोग भी नहीं कर पा रही और क्षेत्र हर साल बाढ़ की मार से जूझता है। बड़ी इंडस्ट्री तो दी नहीं जबकि मंडियों को भी नहीं सुधार सके।

क्या नहीं हुआ
-पटियाला से जाखल तक रेलवे लाइन बिछाने की योजना सिरे नहीं चढ़ी
-घग्गर की बाढ़ का हल नहीं
-मंडियों के हालात में विशेष बदलाव नहीं
 

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