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Tuesday, 31 January 2012

समर्थकों में निराशा, उम्मीदवार मायूस, punjab election, shutrana, congress, rally,



...शुतराणा में कांग्रेस का प्रचार
कैप्टन अमरिंदर सिंह नहीं पहुंचे पातड़ां रैली में
-विदेश राच्य मंत्री परनीत कौर ने बंधाया ढ़ांढस कहा मैं और महाराजा साहिब निर्मल सिंह के साथ
भूपेश चट्ठा, पातड़ां पटियाला
हर अच्छे बुरे वक्त में कैप्टन अमरिंदर सिंह का साथ निभाने वाले शुतराणा से कांग्रेस के उम्मीदवार निर्मल सिंह की रैली में प्रदेश कांग्रेस के प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के ना पहुंचने से उनके समर्थकों में निराशा छा गई जबकि शुतराणा से उम्मीदवार मायूस हो कर रह गए हैं।
अब तक किस्मत का धनी कहे जाने वाले निर्मल सिंह दो बार शुतराणा से विपरीत परिस्थितियों में विधायक बने। दोनों बार प्रदेश में चल रही हवा के विपरीत राजनीतिक दलों में रहते हुए शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस से चुने गए। इसे भी आप निर्मल सिंह के लिए विडंबना ही कहेंगे कि रैली शुरु होने से पहले धूप खिली रही। रैली खत्म होने के बाद भी धूप खिल गई। दोपहर के समय जब कैप्टन अमरिंदर सिंह के हैलीकाप्टर ने जीरा से उड़ान भरनी थी तब मौसम साफ ना होने के चलते वे पातड़ां नही आ सके।
बिना किसी रेलवे लिंक और मात्र दो कस्बे वाले प्रदेश के अत्यंत ग्रामीण व पिछड़े शुतराणा विधान सभा क्षेत्र में आयोजित होने वाली कैप्टन अमरिंदर सिंह की रैली संभावित रूप से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं, समर्थकों में जान फूंकने के लिए खासी जरूरी मानी जा रही  थी। क्षेत्र में कांग्रेस का कार्यकर्ता अकाली दल अथवा वर्तमान सरकार की कथित धक्केशाही और हाल ही में गठित हुए छात्र संगठन स्टूडेंटस आर्गेनाइजेशन आफ इंडिया से कितना त्रस्त है कि स्टेज से हर तीसरा नेता एसओआई को कोस रहा था।
इन सब परिस्थितियों में पातड़ां की अनाज मंडी में आयोजित होने वाली रैली में कैप्टन अमरिंदर के 'खड़कने वाले खूंडेÓ से जहां आम कार्यकर्ता में जोश भरना था वहीं उम्मीदवार से लेकर उसके हर समर्थक का मनोबल बढऩा तय था। इसका साफ परिणाम उसी समय देखने को मिल गया जब रैली स्थल में कविशरी,मसखरी और सैकंड लाइन लीडरशिप के भाषणों के बीच खबर फैल गई कि महाराजा साहिब नहीं आ रहे। इसके तुरंत बाद ही भीड़ छंटनी शुरु हो गई। इतना ही नहीं निर्मल सिंह शुतराणा कुछ समझ पाते और अपील कर पाते इससे पहले ही परनीत कौर ने मौका संभालते हुए मंच से आकर कहा कि वे और महाराजा साहिब निर्मल सिंह की पीठ पर हैं और सदैव साथ खड़े हैं और किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। आज तकनीकि खराबी के चलते हैलीकाप्टर नहीं आ सका है। सुबह से शाम चार बजे तक का इंतजार करने वाली जनता ने इसके बाद दस मिनट का भी इंतजार नहीं किया।

शुतराणा को शुतराणा सीट पर मुश्किल का सामना, punjab election, shutrana, constituency,


 विधानसभा क्षेत्र- शुतराणा

मतदाता-एक लाख 46 हजार 435
पुरुष-77 हजार 700
महिला-68 हजार 735

मतदान केंद्र-177, अति संवेदनशील-23, संवेदनशील-51

भूपेश चट्ठा, पटियाला
कभी शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले निमर्ल सिंह शुतराणा कांग्रेस से विधायक हैं और लगातार दो बार विधायक रहने के बाद हेटट्रिक करने में शुतराणा को शुतराणा विधान सभा क्षेत्र में इस बार खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले दोनों चुनावों में भावनात्मक बातों के सहारे विधान सभा में पहुंचने वाले शुतराणा के लिए एक मात्र सहारा कैप्टन अमरिंदर सिंह के रूप में था लेकिन ऐन मौके पर पातड़ां रैली में उनके ना पहुंचने के चलते उनके समर्थकों में जोश भरने वाला काम भी नहीं हो पाया है जबकि मंगलवार की अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की रैली अकालियों में जान डाल गई है।
पहली बार निर्मल सिंह को अकाली बहुल क्षेत्र में सिर्फ इसलिए जीत मिली अकाली दल ने एक कार्यकर्ता को टिकट दिया जबकि दूसरी बार उनके पक्ष में इसलिए हवा चली की पार्टी ने उसे टिकट ना देकर धक्का किया है। इस बार दोनों ही हालात नहीं है। वहीं वनिंदर कौर लूंबा का परिवार टक्साली अकाली है। उनके पिता व ससुर दोनों ही क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और विवादों में नहीं रहे।
जबकि शुतराणा के लगातार सत्ता में रहने के चलते माइक्रो स्तर पर एंटी इंकंबैंसी फैक्टर काम कर रहा है। दिलचस्प है कि दोनों ही बार वे जीते पर विपक्ष में बैठे तो क्षेत्र में अपनी ओर से विशेष कुछ भी नहीं करवा सके।
याद रहे कि राच्य व केंद्र में सरकारें बदलती रही पर शुतराणा के हालात नहीं बदले हैं। रेल मार्ग व किसी बड़े शहर से च्यादा दूरी होने के चलते इस क्षेत्र को वास्तविक  रूप से पिछड़ा क्षेत्र कहें तो गलत नहीं होगा। पंजाब हरियाणा सीमा पर बसे इस क्षेत्र में कोई बड़ा शहर भी नहीं आता। जिस घग्गर को सामने रख कर चुनाव लड़े जाते हैं वो तो जहां का तहां रहता है। अलबत्ता दोनों ही प्रमुख दलों के नेता अंतत: भावनात्मक मुद्दों की तलाश में रहते हैं। कौन क्या भला करेगा? इस पर चर्चा कम होती है जबकि किसके साथ कितना धक्का हुआ? इसे सामने जरूर रखा जाता है। हालांकि पिछले चुनाव में सबसे उपर डेरे का मुद्दा ही छाया रहा है।

कांग्रेस:-निर्मल सिंह शुतराणा
ताकत- कैप्टन अमरिंदर सिंह का आशीर्वाद
कमजोरी- भावनाओं पर जीते, मुद्दे की राजनीति नहीं कर पाते
अवसर-सत्ता में आने पर वफादारी को इनाम तय
चुनौती-वोट बैंक को संभालना

 शिअद-भाजपा:-वनिंदर कौर लूंबा
ताकत-मायके व ससुराल की राजनीतिक पृष्ठ भूमि
कमजोरी-नया चेहरा
अवसर-जनप्रतिनिधि के रूप में कैरियर की शुरुआत
चुनौती-खुद को साबित करना

Saturday, 24 December 2011

पिछड़ा शुतराणा और पिछड़ता चला गया, shutrana, punjab election, 2012,



भूपेश चट्ठा, पटियाला
रेल मार्ग व किसी बड़े शहर से च्यादा दूरी होने के चलते शुतराणा विधान सभा क्षेत्र को वास्तविक  रूप से पिछड़ा क्षेत्र कहें तो गलत नहीं होगा। पंजाब हरियाणा सीमा पर बसे इस क्षेत्र में कोई बड़ा शहर भी नहीं आता। जिस घग्गर को सामने रख कर चुनाव लड़े जाते हैं वो तो जहां का तहां रहता है। अलबत्ता दोनों ही प्रमुख दलों के नेता अंतत: भावनात्मक मुद्दों की तलाश में रहते हैं। कौन क्या भला करेगा? इस पर चर्चा कम होती है जबकि किसके साथ कितना धक्का हुआ? इसे सामने जरूर रखा जाता है। हालांकि पिछले चुनाव में सबसे उपर डेरे का मुद्दा ही छाया रहा है।
वहीं इस क्षेत्र में बादशाह पुर बैल्ट के डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ की मार तले हर साल आते हैं लेकिन बाढ़ नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, घग्गर नदी की बाढ़ के अलावा आम दिनों में नदी के प्रदूषित पानी से फसलों को होते रहे नुकसान के बारे में तो कभी विचार चर्चा ही नहीं हुई। हालांकि भूमिगत जल के प्रदूषित होने पर आरओ सिस्टम दिखने लगे है। इसी तरह पटियाला से समाना-पातड़ां-टोहाना होते हुए जाखल हरियाणा तक रेलवे लाइन बनाने का मुद्दा कांग्रेस ने उठाया जरूर पर अभी लगता है कि दिल्ली दूर है। हालांकि यहां की पातड़ां मंडी आटो मोबील क्षेत्र में प्रदेश की सबसे बड़ी मंडी कही जा सकती है लेकिन वह भी निजी क्षेत्र के दम पर सरकार का इसमें कोई योगदान नहीं है।

निसंदेह दूर दराज का क्षेत्र है: घग्गा
शिरोमणि अकाली दल से चुनाव लड़े व कांग्रेस की बेअंत सिंह सरकार में मंत्री रहे हमीर सिंह घग्गा कहते हैं कि दूर दराज का यह क्षेत्र खासा पिछड़ा है और जन प्रतिनिधत्व के साथ जब वे सत्ता में आए थे तब काफी विकास हुआ। लेकिन घग्गर की बाढ़ नियंत्रण दो राच्यों का मामला है और ऐसे ही रेलवे लिंक में कई अन्य मंत्रालय भी उलझे हैं। मुद्दा लगातार उठाया गया है।



सरकार मांग के विपरीत काम करती है: विधायक शुतराणा
कभी शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर चुनाव जीतते रहे निमर्ल सिंह शुतराणा आजकल कांग्रेस से विधायक हैं। क्षेत्र में विकास के नाम पर कहते हैं कि इस सरकार से जो कह दो ठीक उसका उल्टा करती है। केंद्र से बाढ़ नियंत्रण को जो पैसे आते हैं उसका प्रयोग भी नहीं कर पा रही और क्षेत्र हर साल बाढ़ की मार से जूझता है। बड़ी इंडस्ट्री तो दी नहीं जबकि मंडियों को भी नहीं सुधार सके।

क्या नहीं हुआ
-पटियाला से जाखल तक रेलवे लाइन बिछाने की योजना सिरे नहीं चढ़ी
-घग्गर की बाढ़ का हल नहीं
-मंडियों के हालात में विशेष बदलाव नहीं