विधानसभा क्षेत्र- शुतराणा
मतदाता-एक लाख 46 हजार 435
पुरुष-77 हजार 700
महिला-68 हजार 735
मतदान केंद्र-177, अति संवेदनशील-23, संवेदनशील-51
भूपेश चट्ठा, पटियाला
कभी शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर चुनाव जीतने वाले निमर्ल सिंह शुतराणा कांग्रेस से विधायक हैं और लगातार दो बार विधायक रहने के बाद हेटट्रिक करने में शुतराणा को शुतराणा विधान सभा क्षेत्र में इस बार खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले दोनों चुनावों में भावनात्मक बातों के सहारे विधान सभा में पहुंचने वाले शुतराणा के लिए एक मात्र सहारा कैप्टन अमरिंदर सिंह के रूप में था लेकिन ऐन मौके पर पातड़ां रैली में उनके ना पहुंचने के चलते उनके समर्थकों में जोश भरने वाला काम भी नहीं हो पाया है जबकि मंगलवार की अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की रैली अकालियों में जान डाल गई है।
पहली बार निर्मल सिंह को अकाली बहुल क्षेत्र में सिर्फ इसलिए जीत मिली अकाली दल ने एक कार्यकर्ता को टिकट दिया जबकि दूसरी बार उनके पक्ष में इसलिए हवा चली की पार्टी ने उसे टिकट ना देकर धक्का किया है। इस बार दोनों ही हालात नहीं है। वहीं वनिंदर कौर लूंबा का परिवार टक्साली अकाली है। उनके पिता व ससुर दोनों ही क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और विवादों में नहीं रहे।
जबकि शुतराणा के लगातार सत्ता में रहने के चलते माइक्रो स्तर पर एंटी इंकंबैंसी फैक्टर काम कर रहा है। दिलचस्प है कि दोनों ही बार वे जीते पर विपक्ष में बैठे तो क्षेत्र में अपनी ओर से विशेष कुछ भी नहीं करवा सके।
याद रहे कि राच्य व केंद्र में सरकारें बदलती रही पर शुतराणा के हालात नहीं बदले हैं। रेल मार्ग व किसी बड़े शहर से च्यादा दूरी होने के चलते इस क्षेत्र को वास्तविक रूप से पिछड़ा क्षेत्र कहें तो गलत नहीं होगा। पंजाब हरियाणा सीमा पर बसे इस क्षेत्र में कोई बड़ा शहर भी नहीं आता। जिस घग्गर को सामने रख कर चुनाव लड़े जाते हैं वो तो जहां का तहां रहता है। अलबत्ता दोनों ही प्रमुख दलों के नेता अंतत: भावनात्मक मुद्दों की तलाश में रहते हैं। कौन क्या भला करेगा? इस पर चर्चा कम होती है जबकि किसके साथ कितना धक्का हुआ? इसे सामने जरूर रखा जाता है। हालांकि पिछले चुनाव में सबसे उपर डेरे का मुद्दा ही छाया रहा है।
कांग्रेस:-निर्मल सिंह शुतराणा
ताकत- कैप्टन अमरिंदर सिंह का आशीर्वाद
कमजोरी- भावनाओं पर जीते, मुद्दे की राजनीति नहीं कर पाते
अवसर-सत्ता में आने पर वफादारी को इनाम तय
चुनौती-वोट बैंक को संभालना
शिअद-भाजपा:-वनिंदर कौर लूंबा
ताकत-मायके व ससुराल की राजनीतिक पृष्ठ भूमि
कमजोरी-नया चेहरा
अवसर-जनप्रतिनिधि के रूप में कैरियर की शुरुआत
चुनौती-खुद को साबित करना
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