...दांव पेच
-शिअद उम्मीदवार पुत्र अजीतपाल कोहली मांग रहे विरोधी की लंबी उम्र की दुआ और करवा रहे तुलनात्मक अध्ययन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चुनावों में नेता जनता के सामने आते हैं तो मंच पर कम से कम इतनी दूरी बना कर लाउड स्पीकर से भाषण देते हैं कि लोगों के सवालों से दूरी बनी रहे और नेता जी की आवाज दूर तक चली जाए लेकिन रियासती शहर पटियाला में एक पूर्व रियासत के महाराजा और पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह को दी जा रही चुनौती में शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार सुरजीत सिंह कोहली के मेयर पुत्र अजीतपाल सिंह कोहली ने शहर की नब्ज को भांपते हुए वोटर से ही सवाल करने शुरु कर दिए हैं।
अक्सर धरने पर बैठने, बात बात पर जेल भरो आंदोलन की धमकी और मोर्चे लगाने वाले किसी टक्साली अकाली से बिलकुल उलट अपने भाषण की शुरुआत ही इस जुमले के साथ करते हैं, 'अज इत्थे सवाल पूछण दी बारी मेरी हैÓ बीच बीच में विरोधी को बुर्जुग बता उसकी लंबी उम्र की दुआ करते है और नगर निगम की ओर से करवाए गए कार्यों का सिलसिलेवार ब्योरा देते हैं। यह भी बताते हैं कि पिछली सरकार ने क्या किया? और जिन लोगों को आप जिताते रहते हो उन्होंने क्या किया? राच्य से केंद्र तक की सत्ता तक पहुंचने के बाद ये लोग दिखाई नहीं दिए, जबकि हर छोटे बड़े काम के लिए उनका पुत्र समान 31 साल का मेयर हर समय उपलब्ध रहा है। आडियंस का ध्यान कहीं इधर उधर ना हो और दिलचस्पी बनी रहे इसके लिए फिर पूछा जाता है '...तुसी दसो आंटी जी?Ó
तुलनात्मक अध्ययन की इस क्लास के साथ ही शहर के ब्राहमण-खत्री-बनिया अथवा दूसरे शब्दों में मध्यम वर्गीय वोट बैंक को ध्यान में रख कर आर्य समाज के निकट लगती संजीवनी गली में पूछा जाता है कि क्या किसी को नौकरी मिली है? क्या आज भी तुम्हारा खर्चा उतने में चलता है जितने में पांच साल पहले चलता था? जवाब के बारे में निहाल बाग में रह रहे मेयर साहिब को भी पता है और ढ़ाई फुट चौड़ी गली में अपाहिज बेटे और कमाने वाले की कमी से जूझ रही उस अधेड़ उम्र की विधवा को भी पता है जो एक ही सवाल का जवाब सालों से तलाश रही है कि बच्चे की उम्र अगर उससे लंबी हो गई तो उसके बाद उसके अपाहिज बेटे का क्या होगा?
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