विधानसभा क्षेत्र- पटियाला ग्रामीण
मतदाता-एक लाख 77 हजार 283
पुरुष-92 हजार 826
महिला-84 हजार 457
मतदान केंद्र-182, अति संवेदनशील-13, संवेदनशील-50
भूपेश चट्ठा, पटियाला
परीसीमन के बाद से आस्तित्व में आया पटियाला ग्रामीण क्षेत्र पुराने समाना और नाभा विधान सभा क्षेत्रों के गांवों और पटियाला शहर के करीब 20 वार्डों से मिलकर बना है। पहली नजर में शहरी क्षेत्र कांग्रेस बहुल और ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस व शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन में बराबरी का सा अहसास दिलाने वाले इस क्षेत्र में निर्दलीय सतबीर सिंह खटड़ा के आने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
इस क्षेत्र में 2007 चुनाव प्रचार की शुरुआत किसी आम चुनाव की तरह 'विकास के मुद्देÓ से ही हुई थी लेकिन चुनाव के शिखर तक पहुंचने तक 'डेरा सच्चा सौदा के प्रेमियों से समर्थन व विरोधÓ के बीच ही अंत हुआ। हालांकि इस बार डेरा फैक्टर यहां से नदारद है।
अकाली-भाजपा की उम्मीदवार पंथ रत्न स्व. जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा की पुत्री कुलदीप कौर टोहड़ा शहरी क्षेत्र में भारी मशक्कत का सामना कर रही हैं तो कांग्रेस के ब्रहम महिंदरा को अपने शहर के पुराने समर्थकों का पूरा नेटवर्क तैयार मिला है, उनके लिए नाभा क्षेत्र से आए करीब 32 गांवों में ही पहचान ले जाने की जरूरत है।
दिलचस्प है कि अकाली सरकार के कार्यकाल में जहां क्षेत्र की बाहरी कालोनियों में पहली बार सीवरेज डाला गया तो कांग्रेसी इस बात को भी टूटी सड़कों के रूप में प्रचारित करने में सफल हो रहे हैं, जबकि अकाली दल सिर्फ और सिर्फ टक्साली वोटों के सहारे है।
माइक्रो स्तर पर विधायक ब्रहम महिंदरा को एंटी इंकंबेंसी का सामना करना पड़ रहा है। पांच साल ना दिखाई देने के आरोप भी उन पर लग रहे हैं। हालांकि मिलते ही वे ये दुख दूर भी कर रहे हैं। वहीं प्रदेश सरकार के चलते कुलदीप कौर टोहड़ा स्वयं ही कटघरे में खड़ी हो रही हैं।
मुकाबले को खटड़ा के नेटवर्क ने दिलचस्प बना रखा है। गांवों में यूथ कल्बों के सहारे टीम खड़ी करने वाले खटड़ा किसके कितने वोट तोड़ते हैं? इस पर परिणाम तय होंगे।
क्षेत्र के लोग दुकानदारों की ओर से अपनी हद से बाहर जा कर किए गए नाजायज कब्जों से परेशान हैं। आम राय है कि त्रिपड़ी मैन बाजार की सड़क दुरुस्त होने के बावजूद हालात नहीं बदले हैं। त्रिपड़ी में आधे अधूरे मन से अस्पताल चालू हुआ जबकि सिवरेज सिस्टम दुरुस्त करने लाया गया प्रोजेक्ट भी अभी पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ा है।
हालांकि क्षेत्र में डीएमडब्ल्यू के पास फलाई ओवर की मांग नहीं हुई पूरी, दुख निवारण साहिब के पास एलिवेटिड रोड बना ट्रैफिक समस्या का हल करने पर अभी चर्चा ही हो रही है। छोटी नदी को दुरुस्त किया जाना और बंधा रोड पर से अवैध कब्जे हटा कर डबल रोड उपलब्ध करवाई जानी शेष है।
कांग्रेस:-ब्रहम महिंदरा
ताकत-बहावलपुर बिरादरी का समर्थन व पुराना नेटवर्क
कमजोरी-टक्साली सिख वोटरों में हिंदू की छवि
अवसर-सत्ता में आने पर बड़ी जिम्मेदारी तय
चुनौती-वोट बैंक को संभालना
शिअद-भाजपा:-कुलदीप कौर टोहड़ा
ताकत-टक्साली अकाली वोट बैंक
कमजोरी-शहरी वोटों पर कम पकड़
अवसर-जीतने और सत्ता में आने पर मंत्री पद
चुनौती-खुद को साबित करना
निर्दलीय:-सतबीर सिंह खटड़ा
ताकत-द पटियाला वेलफेयर सोसायटी का नेटवर्क
कमजोरी-पार्टी का साथ नहीं
अवसर-राजनीतिक शक्ति पाना
चुनौती-चुनावी लोकतंत्र का पहला अनुभव
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