Tuesday, 31 January 2012

ईवीएम के शांत होते ही अटकलों का दौर शुरू, punjab election, after polling


 रियासत की सियासत 
- हारी हुई सीट को 'फंसी हुईÓ तो बुरी तरह से हारी सीट पर 'मार्जन कवर कियाÓ बताया 
- अगले 35 दिन यही दौर चलने की पूरी संभावना, एक गली के नुक्कड़ पर सरकार बनेगी तो गांव की चौपाल पर गिर जाएगी 
भूपेश चट्ठा, पटियाला 
विधानसभा चुनावों के लिए हुए मतदान में सोमवार शाम पांच बजते बजते इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन ईवीएम के शांत होने के साथ ही हर तरफ हर वर्ग में बिना किसी भेदभाव के अटकलों-आंकलनो और अनुमानों का न थमने वाला दौर शुरु हो गया है। 
दिलचस्प है कि चुनावी विश्लेषण का फार्मूला संभवत बिलकुल न जानने वाले अपनी तरफ से 'तथ्यों पर आधारितÓ सटीक अनुमान लगाने के दावे कर रहे हैं। हालांकि उनके अपने ही दावे हर आधे घंटे में किसी अनुभवी की बात सुनने के साथ ही बदल भी रहे हैं। बात ठीक अपने हल्के से शुरु होती है फिर जिले अथवा लोकसभा क्षेत्र अधीन आने वाली आसपास की सीटों पर अनुमान लगाने के साथ ही सरकार बनाने का दावा ठोक दिया जाता है और मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा शुरु कर दी जाती है। 
निर्दलीय उम्मीदवार जहां वोटों के शेयर में दस अथवा बीस हजार का आंकड़ा पारकर आगे राजनीतिक कैरियर संवारने की संभावनाएं तलाशते रहे तो दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थकों के विश्लेषण में उनकी ओर से लगभग हारी हुई सीट को 'फंसी हुईÓ के कालम में रख कर 'फाइट हैÓ का जुमला पढ़ा जा रहा है। तो बुरी तरह से हारी सीट हुई अथवा क्षेत्र विशेष में पिछडऩे या पकड़ वाले गांवों और शहरी आबादी में कम मतदान होने पर कहा जा रहा है 'मार्जन कवर किया है।Ó
जाने माने चुनावी विश्लेषक उजागर सिंह बताते हैं कि आज मतदान हुआ है और एक महीने का अंतर परिणाम आने में रखा गया है। ऐसे में अगले 35 दिन यही दौर चलने की पूरी संभावना है। एक गली के नुक्कड़ पर सरकार बनेगी तो अगली गली तक पहुंचने से पहले या तो गिर जाएगी या फिर बदल जाएगी। गांव की चौपाल पर भी कुछ ऐसा ही आलम होगा। सुबह एक पार्टी की सरकार कुछ तर्क बताकर बनाई जाएगी तो शाम होने से पहले कुछ अन्य पहलू बताकर गिरा भी दी जाएगी। 
पुराना इतिहास, नए बदलाव, चुनाव आयोग के आदर्श चुनाव आचार संहिता का हवाला, प्रचार में कमी, धन बल का खुल कर प्रयोग ना होना, डेरे के फेरे या स्वामी रामदेव, अन्ना हजारे फैक्टर के इधर से उधर होने को सामने रख कर असमंजस की स्थिति को और बढ़ाया जा रहा है। हालांकि इस दौर में कुछ मीडिया सलाहकार ऐसे भी हैं जो फोन बंद कर सिर्फ और सिर्फ 'रिलेक्सÓ ही होना चाहते हैं। 

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