Tuesday, 31 January 2012

बूथ स्तर पर लगी 'अपने बंदों' की ड्ïयूटियां, punjab election, polling booth



-पहली प्राथमिकता पार्टी का वर्कर, फिर रिश्तेदार और दोस्त
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
विधान सभा चुनावों के लिए होने वाले मतदान के लिए राजनीतिक दलों व निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने आज अनुभवी कार्यकर्ताओं के साथ अंतिम बैठकें कर चुनावी बस्ते बांट दिए हैं और बूथ स्तर पर 'अपने बंदोंÓ की ड्यूटियां लगा दी गई हैं।
मतदान से पूर्व बूथ स्तर पर की जा रही तैयारियों में जुटे राजनीतिक दल और प्रत्याशियों के यहां पर चले बस्ते बांटने के दौर पर एडवोकेट मनोज सोईन कहते हैं कि पोलिंग एजेंट के फार्म के अलावा कुछ अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ कई तरह की मतदाताओं से संबंधित जानकारी इसमें दी जाती है।
सबसे अधिक प्राथमिकता राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को ही देते हैं। इनमें शहरी क्षेत्र में पार्षद व ग्रामीण में सरपंच व पंच आदी होते हैं। हारे हुए या जीते हुए का कोई सवाल नहीं होता। इन लोगों को चुनावी लोकतंत्र का अनुभव होता है। हालांकि प्रचार के दौरान भी देख लिया जाता है कि कौन भाग दौड़ कर रहा है? और कौन भाग गया है? प्रचार के दौरान बैठकें आयोजित करवाने वाले भी यही लोग होते हैं। इसके बाद रिश्तेदारों व दोस्तों की बारी आती है।
एडवोकेट सोईन कहते हैं कि एक दिन पहले बंद कमरों में होने वाली बैठकों में फर्जी मतदाता को चैलेंज करने और चुनाव आयोग की ओर से बदले गए नियम कानूनों के दायरे में रहते हुए अपना काम निकालने के टिप्स भी दिए जाते हैं। बूथ कहां लगेगा? एक कुर्सी एक मेज का फार्मूला क्या है? जैसी नई जानकारियों से अवगत करवाया जा रहा है। जिससे किसी तरह की तकनीकि परेशानी ना हो।

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