विधान सभा क्षेत्र:-पटियाला
भूपेश चट्ठा, पटियाला
एक चुनाव पहले प्रदेश का सत्ता केंद्र रहा पटियाला शहर अपने विकास की गति को कायम नहीं रख सका है। कहने सुनने को यहां काफी कुछ है और एक पूर्व मुख्यमंत्री के शहर में वर्तमान मुख्यमंत्री ने खासे दौरे भी किए और लोक सभा चुनावों से पहले संगत दर्शनों के नाम पर जम कर धन राशि बांटी भी गई लेकिन शहर में से कबाड़ी बाजार और ट्रैक्टर मंडी को बाहर निकाले जाने और लोअर माल को चौड़ा किए जाने के अलावा च्यादा च्यादा कुछ दिखाई भी नहीं देता। हालांकि कुछ ऐसे लंबी अवधि के प्रोजेक्ट भी हैं जिन पर काम चल रहा है।
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तुलना ही करनी है तो 2002 व 2007 के बीच की हो: कैप्टन अमरिंदर सिंह
कांग्रेस से विधायक व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कहते हैं कि इस निकम्मी सरकार ने हर वो काम रोका है जो हमने शुरु किया और शहर को बेहतर बनाने के लिए जरूरी था। वैसे विपक्ष में रहते हुए हमे कोई काम ही नहीं करने दिया, इन लोगों ने तो पटियाला को ही प्रतिनिधित्व वहीन करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हम विकास, विकास और विकास के नाम पर चुनाव लड़े थे जो हमने इससे पहले के पांच सालों में किया था। अगर शहर की समस्याओं को हल करने की ही बात करनी है तो 2002 से 2007 के बीच हुए कार्यो की करो। इन पांच सालों की नहीं। तुम लोगे बेहतर जानते हो विपक्ष में रह कर बंदा क्या कर सकता है।
70 से च्यादा टयूबवेल, दो सड़कें व सीवरेज बिछाया: कोहली
शिरोमणि अकाली दल से चुनाव लड़े सुरजीत सिंह कोहली कहते हैं कि पांच साल पहले के विधान सभा चुनावों के मुद्दे की बात वे नहीं करते। ये विधायक ने विधान सभा में उठाने होते हैं जबकि उन्होंने नगर निगम के माध्यम से विकास किया है। 70 से च्यादा टयूबवेल लगा कर पेय जल कि समस्या को हल किया तो सीवरेज की समस्या को 20 फीसदी पर लाए हैं। लोअर माल व इंकम टेक्स रोड को चौड़ा किया। 109 करोड़ रूपये का सीवरेज प्रोजेक्ट आउटर कालोनियों के लिए चल रहा है। नया जाल बिछाया जाउ रहा है। जबकि कांग्रेस तो उन्हें पांच करोड़ का कर्ज दे कर गई थी।
क्या नहीं हुआ
-शहर से पशुओं की डेयरी बाहर करना
-एयर कंडीशनंड बस स्टैंड बनाना
-छोटी नदी-बड़ी नदी के किनारे पक्का करना
-छोटी नदी नाले में तब्दील फिर कब्जे अधीन आई
-नाले की समस्या का स्थाई हल करना
-सड़कें चौड़ी करना
-नहरी पानी आधारित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा
-पटियाला-चंडीगढ़ राज मार्ग के फोर लेन का प्रोजेक्ट कागजों में सिमटा, केंद्र व राच्य के मंत्रालयों के बीच झूल रहा है।
जहां काम चालू है
-बाई पास निर्माणधीन, पुल बनने शेष
-सीवरेज सिस्टम पर काम चालू
-बड़ी नदी का काम राजपुरा रोड तक हुआ आगे अधूरा
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