भूपेश चट्ठा, पटियाला
हम यूरोप से डेढ़ सौ साल पीछे हैं, जिस इंडस्ट्री को वहां प्रदूषण के चलते बंद कर दिया गया उसे हमारे यहां भेजा जा रहा है और हम प्राकृतिक कानून के विपरीत काम कर रहे हैं, यही वजह है कि पर्यावरण में सुधार की बजाए प्रदूषण का ग्राफ बढ़ रहा है। कम्यूनिटी मेडिसन के विशेषज्ञ व जाने माने पर्यावरणविद् डा. अमर सिंह आजाद पंजाब में पेयजल कि स्थिति पर अब तक की हर सरकार के साथ प्रदूषण नियंत्रण करने की जिम्मेदार संस्था को जम कर कोसते हैं।
कहते हैं कि पंजाब के अलावा हरियाणा व हिमाचल प्रदेश की इंडस्ट्री का टॉक्सिक जल, कई तरह के हैवी मैटल व रसायनिक ततवों के साथ और यहां के शहरों का सीवरेज लगातार दरिया व बरसाती नालों में उड़ेला जा रहा है। जो प्राकृति के नियम के विपरीत है। जो पानी एक बार ले लिया जाता है, उसे वापिस नदी अथवा नाले में नहीं डाला जाता, उस पानी का शोधन कर खेती में सिंचाई के लिए प्रयोग करना होता है। लेकिन यहां पर सारी इंडस्ट्री लगाई ही नदी किनारे जाती है, सरकार सोई रहती है और खुद अनुमति देती और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी सारी उम्र में एक भी इंडस्ट्री अथवा प्रदूषण फैलाने वाले को सजा नहीं दिलवा पाता।
डा. आजाद कहते हैं कि जिस पानी की कसमें खाई जाती थी और जिस पर गीत लिखे जाते थे, वो बहता पानी तो कई साल पहले गंदा कर दिया अब तो रिस कर धरती के नीचे पहुंचा पानी बीमारियां दे रहा है।
सरकार को परामर्श
डा. आजाद सलाह देते हैं कि सरकार को हर दिशा में काम करना होगा। नियम कानून को सख्ती से लागू करने के अलावा, घटिया और पुरानी पड़ चुकी तकनीक को पंजाब आने से रोकना होगा। जिससे शराब फैक्ट्रीयों की बाढ़ ना आए, कोयला आधारित थर्मल प्लांट ना आएं। पेस्टीसाइड व रसायनिक खादों का प्रयोग कम कर प्राकृतिक खेती की ओर जाना और शहरों में बड़े पैमाने पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने होंगे। तभी जीवन चक्र में प्रवेश कर चुके टॉक्सिक ततव निकाले जा सकेंगे अन्यथा कैंसर के रूप में ये फूटते रहेंगे।
पेय जल व सेनीटेशन :-पटियाला
कुल आबादी-18 लाख 92 हजार 282
शहरी- सात लाख, 62 हजार, तीन
ग्रामीण-11 लाख 37 हजार 130
-विश्व बैंक के प्रोजेक्ट के तहत पीने के स्वच्छ पानी की एक्सलरेटेड रूरल वाटर सप्लाई प्रोग्राम एआरडब्ल्यूएसपी के तहत हर ब्लाक में चार से पांच प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। कुल कमयूनिटी डिवेलपमेंट सीडी नाम से आठ ब्लाक हैं पांच सौ प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं 33 पर काम चल रहा है।
प्रोजेक्ट नाम-ओवर हैड वाटर रिजरवायर जिसे पानी की टंकी भी कह देते है। औसतन 30 लाख में बन रही है और एक टंकी से औसतन एक हजार की आबादी वाले गांव को सप्लाई,
- पीने के पानी का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सीवरेज का काम चालू होगा, अभी इक्का दुक्का पायलेट प्रोजेक्ट हैं। कुछ शर्तो के साथ इस पर काम होगा, तीन एकड़ जमीन हो, सैल्फ ससटेनेबल हो, पंचायत अथवा कमेटी के पास उचित आया हो, 70 फीसदी आबादी सेप्टिक टैंक का प्रयोग कर रही हो तभी सीवरेज की शुरुआत होगी
-टोबे को दुरुस्त करने के प्रोजेक्ट में हर ब्लाक में 25-25 गांव किए गए हैं
-पीने के पानी की व्यवस्था 2012 के अंत तक पूरी हो जाएगी, शहरी क्षेत्र में आबादी कवर है, लेकिन नहरी पानी राजपुरा में आता है। शेष में भूमिगत जल का ही प्रयोग होता है।
-पटियाला में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का वायदा पूरा नहीं हुआ, 131 करोड़ के सीवरेज प्रोजेक्ट पर दोनों ही पार्टियां दावे प्रति दावे कर रही हैं। भूपेश चट्ठा
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