भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य की सत्ता में दो सबसे महत्वपूर्ण जिलों में से एक पटियाला में जहां तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ एक निर्दलीय ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रखी है, वहीं यही प्रदेश का एक मात्र जिला है जहां ऐसे आंकड़ों के साथ एक सीट खाली भी पड़ी है। पटियाला ग्रामीण के नाम से बनी सीट पहली बार अपना विधायक तय करेगी।
पिछले चुनावों के बाद बने राजनीतिक हालातों पर 'दैनिक जागरणÓ की विशेष रिपोर्ट
1 पटियाला शहर
-विधायक कैप्टन अमरिंदर सिंह-कांग्रेस
हिंदु बहुल सीट पर पूर्व मुख्य मंत्री व प्रदेश कांग्रेस के प्रधान कैप्टन अमरिंदर को पाकिस्तान से आए रिफयूजी सिखों का समर्थन मिलता रहा है। अकाली दल को उम्मीदवार तलाशने में भी दिक्कत होती है, जीत का अंतर कांग्रेस लगातार बढ़ा रही है। संभावित अकाली उम्मीदवार में पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह कोहली हो सकते हैं। 22 हजार वोटों का अंतर पाट पानी मुश्किल है।
मुद्दा:-कैप्टन अमरिंदर की दमदार छवि
2 पटियाला ग्रामीण
सीट खाली
-इस बार ही समाना विधान सभा क्षेत्र के हिस्से को काट कर बनाया गया है। कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री व पांच बार के विधायक ब्रहम महिंदरा उम्मीदवार हो सकते हैं। बहावलपुरी बिरादरी के 20-25 हजार वोट प्रत्यक्ष रूप से उनके खाते में जाते हैं। अकाली दल की ओर से पंथ रत्न जत्थेदार स्व. टोहरा के जंवाई व पूर्व मंत्री हरमेल सिंह टोहरा को हाल ही के क्षेत्र के संगत दर्शन में प्रकाश सिंह बादल ने प्रमुखता दी थी। अगर भाजपा के साथ कोई सीटों का आदान प्रदान हो तो राजपुरा से विधायक राज खुराना को बहावलपुरी बिरादरी के चलते उतारा जा सकता है।
मुद्दा:-विकास के दावे प्रति दावे
3 समाना
-विधायक ब्रहम महिंदरा-कांग्रेस
तकनीकि रूप से अकाली दल की सीट कही जा सकती है, अकाली दल के हल्का इंचार्ज सुरजीत सिंह रखड़ा की सुखबीर बादल घोषणा कर चुके हैं, रिफ्यूजी जट्ट सिखों में पैठ रखने वाले हैरी मान कहीं एडजस्ट ना हुए तो 15 से 20 हजार वोटों के साथ समीकरण बदल सकते हैं। कांग्रेस के संत राम सिंगला चुनाव लडऩे की घोषणा कर चुके हैं, कैप्टन अमरिंदर सिंह के भाई मालविंदर सिंह भी दावा जताते रहे हैं, कांग्रेस में आए पूर्व विधायक जगतार सिंह राजला भी सीट पर अपना हक समझते हैं।
मुद्दा:-विकास यहां मुद्दा नहीं है
4 सन्नौर-पुरने नाम डकाला का अधिकांश क्षेत्र
-विधायक लाल सिंह-कांग्रेस
कंबोज बिरादरी की वोटों के दम पर सात बार विधान सभा में पहुंचे हैं, अकाली दल की ओर से पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने स्मर्थकों के रास्ते अपना नाम उछाला है पर हरमेल सिंह टोहरा की पिछले बार की उम्मीदवारी अभी कायम है। प्रो. चंदूमाजरा को पिछले चुनाव में लहरागागा से उतारे जाने पर यहां से उनके समर्थक बड़ी संख्या में कूच कर गए और इतने ही अंतर से हरमेल हार गए। हरमेल और चंदूमाजरा एक दूसरे के लिए अड़ंगा रहेंगे।
मुद्दा:- घग्गर की बाढ़, हांसी बुटाना का जिन्न
5 घनौर
-विधायक मदन लाल जलालपुर, निर्दलीय
निर्दलीय के रूप में जीते पहले अकाली हुए आजकल कांग्रेसी हैं। जिले में अगर कांग्रेस तीसरे कंबोज को टिकट देने का जोखिम उठाती है तो उनका नाम कांग्रेस के पूर्व मंत्री जसजीत सिंह रंधावा से आगे होगा। अकाली दल से पूर्व मंत्री अजैब सिंह मुखमैलपुर उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन अकाली दल से ही पांच बार विधायक रहे जसदेव सिंह संधू के पुत्र व एसएस बोर्ड के पूर्व चेयरमैन तेजिंदर पाल सिंह संधू सरेआम पिता की बरसी पर बादल के सामने चुनाव लडऩे की घोषणा कर चुके हैं।
मुकाबला यहां भी तिकौना ही रहेगा, लेकिन निर्दलीय के स्थान पर पंजाब पीपल्स पार्टी का नाम आ सकता है। संधू संभावित पीपीपी के उम्मीदवार होंगे, यह भी संभव है कि अकाली दल हरमेल टोहरा के पुत्र को टिकट सन्नौर अथवा पटियाला ग्रामीण से टिकट दे कर मुखमैलपुर को भी शांत कर दे, मुखमैलपुर की बेटी हरमेल के लड़के को ब्याही है।
मुद्दा:- बाढ़ व परिवारिक समिकरण
6 राजपुरा
-विधायक राज खुराना-भारतीय जनता पार्टी
राज खुराना के हालात पहले जैसे नहीं रहे, लेकिन कांग्रेस के हरदयाल कंबोज भी बाहरी होने का लेबल नहीं हटवा पाए हैं। महारानी परनीत कौर के करीबी होने के चलते किसी भी स्थानीय कांग्रेसी का नाम हटवा कर टिकट उन्हें टिकट मिलता है, तो बढ़त तभी बना सकते हैं यदि अकाली दल एसजीपीसी सदस्य सुरजीत सिंह गढ़ी को नहीं उतारती है। अकाली दल के लिए चंदूमाजरा फैक्टर उनके गांव की वजह से भी काम करेगा, उनके समर्थक आगे हुए तो कांग्रेस को उनके नेगेटिव रवैये के चलते लाभ होगा, यहां हिंदू व सिखों का मामला भाजपा की जगह अकाली दल के उतरने पर कांग्रेस को लाभ होगा।
मुद्दा:-बहावलपुर बिरादरी और बाहरी उम्मीदवार
7 नाभा
-विधायक काका रणदीप सिंह-कांग्रेस
अब इसे आरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। दोनों ही दलों के उम्मीदवार क्षेत्र में नए होंगे, कांग्रेस के अमलोह से विधायक साधू सिंह धर्मसोत को बाजीगर बिरादरी का वोट बैंक उनके पक्ष में है। अकाली दल नए चेहरे मक्खन सिंह लालका पर दांव लगा सकता है। दिलचस्प है कि इस बार यहां पर तिकौना मुकाबला आरक्षित सीट हो जाने के चलते कम होने की संभावना है।
मुद्दा:-जिला बनाया जाए
8 शुतराणा
-विधायक निर्मल सिंह शुतराणा-कांग्रेस
अकाली से कांग्रेसी हुए निर्मल सिंह की स्थिति कैप्टन अमरिंदर के प्रधान बनने से फिर ठीक हो गई है, जबकि पूर्व कांग्रेसी मंत्री व पिछला चुनाव अकाली दल से लडऩे वाले हमीर सिंह घग्गा का टिकट कटना तय है। कैप्टन कंवलजीत से करीबी के चलते उन्हें पिछली बार टिकट मिला था। संभव है कि पूर्व विधायक इकबाल सिंह को अकाली दल टिकट दे दे।
मुद्दा:-घग्गर की बाढ़
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निम्न चुनाव क्षेत्रों में डी-लिमिटेशन के चलते बदलाव आया है
9 बनूड़ अब डेरा बस्सी-जसजीत सिंह बन्नी-शिरोमणि अकाली दल,
डेराबस्सी पटियाला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है पर जिले के रूप में अब मोहाली में जा चुका है।
ठीक ऐसे ही नाभा विधान सभा क्षेत्र को पटियाला लोक सभा का हिस्सा इस बार बनाया गया है, जबकि संगरूर जिले के लहरा गागा व सुनाम विधान सभा क्षेत्रों को पटियाला लोक सभा क्षेत्र से बाहर कर दिया गया है।
10 लहरागागा-बीबी राजिंदर कौर भट्ठल-कांग्रेस
11 सुनाम-परमिंदर सिंह ढींडसा-शिरोमणि अकाली दल
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