Friday, 17 June 2011

बारिश से धान को आराम विविधीकरण को नुकसान, weather, diversification, crop,

मौसम की मार
30 नॉटीकल मील की गति से आए एक अंधड़ ने बागों पर कहर बरपाया
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला : जेठ-हाड़ तपे तां सौण-भादों हंसे.. बुजुर्गो की कही ये बात इस साल कहीं सही साबित न हो जाए। यह आशंका आज हर किसी के मन में उपज रही है। कारण स्पष्ट है कि इस बार जून में ही पंजाब में पारा कम से कम दो बार दस डिग्री से नीचे लुढ़क चुका है। हालांकि यह 40 डिग्री के पार भी जा रहा है और तकरीबन हर सप्ताह हो रही बारिश ने जहां धान की फसल को आराम दे दिया है। वहीं, विविधीकरण वाली हर दूसरी फसल को नकारात्मक रूप से प्रभावित भी किया है। कृषि विशेषज्ञ डा.बीएस सोहल कहते हैं कि पंजाब में चूंकि इन दिनों में अधिकतर हिस्से में धान की ही रोपाई की जा रही है। ऐसे में कुल मिलाकर तो फायदा ही है। किसान को सिंचाई के लिए कम पानी का प्रबंध करना पड़ रहा है। मौसम में नमी की वजह से वाष्पीकरण भी तुलनात्मक रूप से कम हो रहा है। वहीं, खेतों में खड़ी मक्की और सूरजमुखी की फसलें आंधी से प्रभावित हुई हैं। इनके पौधे गिरने से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। ठीक इसी तरह से कपास तो एक बारगी पूरी ही उजड़ चुकी है। बेमौसमी बारिश और उस पर 30 नॉटीकल मील की गति से आए एक अंधड़ ने बागों पर भी बुरी तरह से कहर बरपाया है। डा.सोहल कहते हैं कि हार्टीकल्चर के ही क्षेत्र में नुकसान है। कच्चे अचारी आम आपको बाजार में सस्ते व ढेरों में दिखाई दे रहे हैं। इसका साफ मतलब है कि पेड़ पर पकने से पहले ही ये आंधी से नीचे आ गिरे हैं। ऐसे ही जो नाशपाती मानसून के दिनों में बाजार में आनी थी, वे फल भी पूरी तरह से विकसित होने से पहले ही झड़ गए हैं। जामुन का बौर शुरुआती आंधी में गिरा, तो झाड़ कम होना तय हो गया। अमरूद जैसे हर उस बाग को नुकसान हुआ है, जहां अभी फूल निकलने की स्टेज चल रही थी। मौसम में आ‌र्द्रता व उमस का स्तर इन दिनों में बारिश आने पर 100 तक भी जा पहुंचा, जबकि अन्य दिनों में ये 25 तक भी गिरा है। पारे के सात से 44 डिग्री के बीच झूलने और उमस के ऊपर नीचे होने ने पौधों को इस तरह से असमंजस में डाला कि सुबह फूल खिलता है और शाम होते होते गिर जाता है। सब्जियों की काश्त करने वाले सील गांव के हरदीप सिंह कहते हैं कि आंधी का आलम यह रहा है कि कद्दू की जमीन से लगी बेल भी उथल पुथल में फंस गई। उलझी बेलें व टूटे फूलों से अब झाड़ पिछले साल से आधा भी हो जाए तो गनीमत है। नींबू टमाटर व मिर्च के यही दिन होते हैं जब इनसे कमाई होती है, बारिशों के बाद मिर्च तीखी हो जाती है और पालक में कीड़ा पड़ जाता है जबकि नींबू-टमाटर की मांग गिर जाती है।

No comments:

Post a Comment