...बिजली
- चारों बड़े बांधों में भरपूर पानी, थर्मल प्लांटों में नहीं कोयले की कमी
- पिछले साल के मानसून का असर, स्थिति सामान्य रही तो भाखड़ा इस साल भी छुएगा खतरे का निशान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
उत्तर भारत के चारों बड़े बांधों में पानी की कोई कमी नहीं है। कुदरत की इस मेहरबानी के चलते इन बांधों से सिंचाई का पानी लेने वाले पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पीने के पानी की जरूरतें पूरी करती राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कम से कम मानसून तक पानी की किल्लत नहीं होने वाली। ठीक इसी तरह इन बांधों के पानी से बनने वाली पन बिजली से उक्त राज्यों के अलावा हिमाचल प्रदेश को भी राहत मिलने जा रही है। पिछले साल के शानदार मानसून का असर इस साल भी जारी है।
दिलचस्प है कि इस साल गर्मी के जल्द दस्तक देने और यौवन पर बने रहने के चलते बांधों का भराव सीजन भी तकनीकि दृष्टि से एडवांस में शुरू हो गया है। पन बिजली उत्पादन के लिए इन बांधों के पानी पर नजर रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड मान कर चलता है कि बांधों का भराव सीजन 15 मई से शुरू होता है, लेकिन इस बार चार में से तीन बांधों का जल स्तर एक सप्ताह पहले ही बढऩा शुरू हो गया है। तेज गर्मी के चलते पहाड़ों की बर्फ पिघलने से भाखड़ा को छोड़ अन्य तीन रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध, सतलुज -ब्यास नदियों के पौंग और डेहर में जलस्तर ऊपर उठने लगा है।
पावरकाम के आंकड़े बताते हैं कि भाखड़ा बांध का जल स्तर पिछले साल 13 मई की तुलना में इस साल 48 फीट उपर 1577.80 फीट पर है। यहां पानी की आवक भी बीते साल की तुलना में चार हजार क्यूसिक ज्यादा है और ये 24 हजार क्यूसिक पर बनी हुई है, हालांकि बांध से 31 हजार क्यूसिक पानी छोड़ा भी जा रहा है।
इसी प्रकार पौंग बांध का जल स्तर 1298.88 की तुलना में 50 फीट उपर है और यहां पानी 1348.76 फीट पर है। बीते साल के तीन हजार की आवक पर इस साल 54 सौ क्यूसिक पानी आ रहा है, जबकि 28 सौ क्यूसिक पानी ही छोड़ा जा रहा है। रणजीत सागर बांध का स्तर 510.20 मीटर पर है, पिछले साल यहां 499.70 मीटर पर पानी था। यहां 9838 क्यूसिक पानी आ रहा है, ये पिछले साल से तीन हजार क्यूसिक ज्यादा है। यहां से 91 सा क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है।
डेहर बांध का स्तर बीते साल से मात्र सात फीट उपर 2929 फीट पर है, लेकिन 86 सौ क्यूसिक की आवक पर 64 सौ क्यूसिक पानी छोडऩे से यहां भी स्तर ऊपर उठ रहा है। बीते साल आवक इन दिनों 53 सौ पर ही थी।
नार्मल और समय पर मानसून की स्थिति में माना जा रहा है कि जिस तरह से बीते साल 1680 फीट पर भाखड़ा के आ जाने से तीन बार लड गेट खोले गए ठीक उसी तरह से इस बार भी बांध लबालब होंगे।
नहीं है थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी
पावरकाम के पंजाब में तीनों थर्मल प्लांटों में समुचित मात्रा में कोयला है। तय मापदंड अनुसार कम से कम 15 दिन का कोयला होना चाहिए, जबकि बठिंडा में 25, रोपड़ में 21.5 और लहरा महोब्बत में 22.20 दिन का कोयला मौजूद है। बठिंडा की एक इकाई जीर्णोद्वार पर है तो रोपड़ की एक इकाई वार्षिक मर मत पर चल रही है। पावरकाम का कहना है कि सभी इकाईयों की वार्षिक मर मत समय रहते निपटा ली जाएगी।
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