Friday, 17 June 2011

नाबार्ड से पंजाब को नहीं मिला धेला, flood protection, nabard, river ghagger,

नाबार्ड से मांगे थे 101 करोड़ रुपये
 राज्य ने अपने संसाधनों से 26 करोड़ जुटाए, 30 तक निपटाएगा काम
उप-मुख्य संवाददाता, पटियाला : नहरी पानी व ट्यूबवेलों से सिंचाई की व्यवस्था के चलते पंजाब में बहुत कम किसान हैं, जिन्हें बारिश की ज्यादा चिंता रहती है, लेकिन ऐसे किसानों की संख्या खासी ज्यादा है, जिन्हें मानसून में बाढ़ का फिक्र ज्यादा सताता है। ऐसे हालात में पंजाब व पंजाबियों को नेशनल बैंक फार एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) से करारा झटका मिला है। पंजाब की ओर से मानसून पूर्व बाढ़ रोकथाम के लिए किए जाने वाले उपायों के लिए मांगी गई धन राशि में से एक धेला भी नहीं मिला है। गौरतलब है कि मई-जून के दिनों में उत्तर भारत के ज्यादातर क्षेत्रों में खेत खलिहान खाली रहते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार मुहैया करवाने की दिशा में पेयजल योजनाओं में कुआं और तालाब खोदने से लेकर सड़क निमार्ण तक के कार्य नाबार्ड की ओर से करवाए जाते हैं, जबकि पंजाब में टोबों से लेकर नदी नालों की साफ सफाई और उनके तटबंध मजबूत करने का काम होता है। बाढ़ रोकने के उपाय भी इनमें शामिल हैं। पंजाब ने अपनी जरूरतें बता नाबार्ड के पास इस बार बाढ़ रोकथाम उपायों के लिए 101 करोड़ रुपये के एस्टीमेट भेजे, लेकिन मानसून आने में एक पखवाड़े से भी कम समय रहने के बावजूद एक पैसा भी पंजाब के लिए जारी नहीं किया गया है, जबकि हर काम के लिए विज्ञापन से टेंडर जारी कर पूरी प्रक्रिया अपनानी होती है और इसमें खासा समय लगता है। उधर, बाढ़ रोकथाम के लिए ड्रेनेज विभाग की ओर से किए जा रहे उपायों पर शुक्रवार को पूछे जाने पर सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पीएस भोगल कहते हैं कि विभाग प्रदेश में नदियों के उफान व बाढ़ का समय एक जुलाई से 20 सितंबर तक मानकर चलता है, बाढ़ रोकथाम के उपाय 30 जून तक निपटा लिए जाएंगे। राज्य सरकार ने इसके लिए 26 करोड़ रुपये की राशि विभाग को आवंटित की है। इसमें से पिछले साल बुरी तरह से प्रभावित होने वाले पटियाला जिले के लिए चार करोड़ रुपये रखे गए हैं। पटियाला की राव, टांगरी, मारकंडा का कुछ हिस्सा, मीरांपुर चौ सहित घग्गर में सफाई चल रही है। जहां जरूरत है वहां पत्थर भी लगाए जा रहे हैं और कमजोर कडि़यों को पक्का करने के लिए किनारों को मजबूती दी जा रही है। वे कहते हैं कि घग्गर नदी में ही पिछले साल 30 कटाव आए थे। ये सभी पूरी तरह से बंद कर लिए गए हैं। संगरूर जिले में एक दो स्थानों पर काम चल रहा है, उसे भी निपटा लिया जाएगा।

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