विधान सभा क्षेत्र :-समाना
कांग्रेस-रणइंद्र सिंह
शिअद-भाजपा-सुरजीत सिंह रखड़ा
वोटर:-एक लाख 51 हजार 560
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में विधान सभा चुनावों की बात होती है तो अक्सर मुख्यमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश प्रधानों के ही क्षेत्र चर्चित व प्रतिष्ठित की श्रेणी में आते हैं, लेकिन पटियाला, लंबी, गिदड़बाहा और लहरगागा की कड़ी में अगला नाम समाना का जुड़ गया है। यहां पर दो धनाड्ड आमने सामने है।
एक ओर प्रदेश कांग्रेस के प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पुत्र युवराज रणइंद्र सिंह है तो उनके सामने शिरोमणि अकाली दल के सुरजीत सिंह रखड़ा है अपने एनआरआई कनेक्शन और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करीब 13 सालों से करीबी रिश्तों के चलते नाम कमा चुके हैं।
े समाना क्षेत्र में वोटरों की संख्या में चाहे एक लाख से च्यादा की कटौती हो गई हो लेकिन यहां पर निर्णायक भूमिका एक बार फिर डेरे के ही वोट निभा सकते है, हालांकि इस बार वे किस ओर करवट भरेंगे अभी तक तय नहीं है। इसके अलावा पटियाला शहर के 22 वार्ड यहां से बाहर हो गए हैं और समाना शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र ही अधिक है।
दिलचस्प है कि प्रदेश में अब तक बनी हाल की सभी सरकारों में समाना से चुना गया विधायक विपक्ष में ही बैठता रहा है। यहां कि जनता जिसे अपना फतवा देती है प्रदेश की शेष जनता उस पार्टी को नकारती रही है। एक बार जगतार सिंह राजला के समय संयोग बदला तो वे जत्थेदार टोहड़ा के नेतृत्व में अकाली-भाजपा सरकार से अलग हो गए।
सुरजीत सिंह रखड़ा
ताकत:-
दस सालों से क्षेत्र के लोगों के सीधे संपर्क में, ग्रामीण क्षेत्र का टकसाली अकाली वोट बैंक, पार्टी में अब विरोध नहीं, सभी विरोधी अन्य क्षेत्रों में एडजस्ट, परीसीमन के बाद डकाला क्षेत्र से टूट कर आए 52 गांव अकाली बहुल माने जाते हैं, पटियाला शहर का त्रिपड़ी क्षेत्र का निकल जाना, 30 करोड़ खर्च कर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से, सीवरेज, सड़क, अस्पताल, कालेज के बहुप्रतिक्षित काम निपटाए।
कमजोरी:-
पूर्व में किए गए वायदे और लोगों की उम्मीदों का खासा च्यादा होना, परंपरागत अकालियों का परंपरागत दबंगई राजनीति ना कर पाना, शहरी हिंदू वोटों पर लिबरल चेहरे के बावजूद पकड़ ना बना पाना।
किन मुद्दों पर लड़ रहे हैं:-
वर्तमान सरकार की ओर से किए गए विकास कायों के अलावा, क्षेत्र में रोजगार बढ़वाने और मौजूदा इंडस्ट्री को पिछड़े क्षेत्र के लाभ दिलवाने फोकल प्वाइंट बनवाना
रणइंद्र सिंह:
ताकत:-
युवा पढ़ा लिखा चेहरा, आधुनिक विचार, सरकार आने पर सत्ता में सीधा हस्तक्षेप, केंद्र में मां परनीत कौर के पास महत्वपूर्ण मंत्रालय, सियासत में परिवार दशकों से लोगों के संपर्क में है, तीन बार की सांसद मां का समाना विधान सभा क्षेत्र से हमेशा लीड लेना, पिता का क्षेत्र से निर्विरोध विधायक बनना। शाही परिवार का अपना ग्लैमर, नया चेहरा खुलकर किसी का विरोध नहीं, नए लोगों को जोडऩे की क्षमता
कमजोरी:-
प्रचार में देरी से लगना, क्षेत्र में लोगों से सीधा परिचय ना होना, ग्रामीण भौगोलिक क्षेत्र से अनभिज्ञता, बठिंडा के पुराने नेटवर्क पर अधिक निर्भरता, अकाली दल छोड़ कर आए नेताओं पर प्रचार के लिए च्यादा निर्भर होना, पिछले दो चुनावों में पार्टी के उम्मीदवार ब्रहम महिंदरा के ठीकविपरीत नीति अपनाने से विरोधाभास पैदा होना, हिंदू कार्ड चला पाने में असहज
किन मुद्दों पर लड़ रहे हैं चुनाव:-
क्षेत्र में पटियाला शहर के डीजल लोको मार्डेनाइजेशन वर्कशाप जैसा कोई बड़ा प्लांट केंद्र के खाते से लाना, छोटी इंडस्ट्री के लिए रास्ते खोलने वाले प्रोजेक्ट लाकर क्षेत्र में बेरोजगारी दूर करना, सरकार बनने की स्थिति में हर साल सौ करोड़ रूपये क्षेत्र में खर्च करने का वायदा। बिना भेदभाव के सभी तक सुविधाएं पहुंचाना।