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Tuesday, 6 March 2012

आलू का थैला बैन, पर पैकिंग में चिप्स बिकेगा, plastic, carry bag, pollution, potato, chips


-40 माइक्रोन से मोटे प्लास्टिक के कैरी बैग पर कानूनन प्रतिबंध लगा
-ज्यादा खतरनाक एलडी व एचडी दाने के मिलने से बना पैकिंग मैटेरियल खुल कर सरकार बिकवा रही है
-राज्य सरकार ने 'पंजाब कैरी बैग रूल 2005Ó बनाया है पर...: पीपीसीबी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
आम आदमी साधारण सी रेहड़ी पर से आलू खरीदता है तो उस आलू को भरने वाले आम थैले पर सरकार ने पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन वही आलू यदि कोई बड़ी कंपनी चिप्स बना कर पैकिंग में बेच रही है तो कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि तकनीकि रूप से चिप्स की पैकिंग में प्रयोग किया गया प्लास्टिक पर्यावरण की दृष्टि से ज्यादा खतरनाक है।
प्लास्टिक इंडस्ट्री से जुड़े जानकार बताते हैं कि आलू चिप्स, भुजिया, क्रेक्स से लेकर शैंपू तक और हर तरह के इलेक्ट्रानिक अथवा इलेक्ट्रिक सामान की पैकिंग करने में जिस मैटेरियल का प्रयोग हो रहा है वो अब तक बनने के बाद से धरती पर ही मौजूद है और इस वेस्ट पदार्थ को कहीं भी खत्म नहीं किया जा सका है।
बाजार में एलडी व एचडी दानों को साथ मिला कर तैयार किए जाने इस पैकिंग मैटेरियल का कोटा भी केंद्र सरकार की भारत पैट्रोलियम जैसी कंपनियां ही उपलब्ध करवा रही हैं और प्लांट भी चल रहे हैं। व्यवसाय से जुड़े हरविंदर सिंह कुक्कू बताते हैं कि पांच रूपये किलो वाले आलू को पैक करने के लिए दो रूपये का लिफाफा चाहिए जबकि 20 रूपये के सौ ग्राम चिप्स लेकर जाने के लिए कुछ नहीं। गरीब आदमी पर अधिक बोझ डालने के अलावा हम यह भी भूल रहे हैं कि आलू की थैली तो फिर कोई गरीब गली में से बीन कर ले जा रहा है पर चिप्स का खाली पैकेट पांव से ही गाली देकर धकेल रहा है। लो डेंसिटी व हाई डेंसिटी के ये पैट्रोलियम उत्पाद प्राकृति के लिए ज्यादा खतरनाक हैं। स्पष्ट है कि सब्जी वाले ने आलू पैक किया तो अपराध और बहुराष्ट्रीय कंपनी ने आलू का टुकड़ा पैक किया तो सुविधा।
दिलचस्प है कि प्रदेश व केंद्र की सरकारों को एयर टाइट पैकिंग के लिए ज्यादा मजबूत मैटेरियल का हवाला दे कर एलडी व एचडी दाने का प्रयोग किया जा रहा है जबकि यही मजबूती कुछ शैंपू बनाने वाली कंपनियां पैपर की पैकिंग पर सेलोविन की परत चढ़ा कर पर्यावरण में चंद सप्ताह में घुलने वाला उत्पाद भी बनाने लगी हंै।
वहीं पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर डा. चरणजीत सिंह बताते हैं कि पंजाब कैरी बैग रूल 2005 के तहत 40 माइक्रोन से मोटे प्लास्टिक के कैरी बैग पर कानूनन प्रतिबंध लगाया गया है। जबकि अन्य पैकिंग मैटेरियल इस श्रेणी में नहीं आता।
याद रहे कि 40 माइक्रोन से पतले  कैरी बैग भी वही ठीक  हैं जिन पर इन्हें बनाने वाली कंपनी का पता भी स्टांप के साथ लगा होता है। इन्हें हिलाने पर आवाज नहीं होती और खींचने पर टूटते नहीं खिंचते चले जाते हैं। ये कुछ समय बाद पानी में घुल जाते हैं। जबकि एलडी व एचडी से बने उत्पादों को नष्ट नहीं किया जा सकता।