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Friday, 2 March 2012

पंजाबी तड़के के बिना अधूरी टीम इंडिया!, cricket, punjabi , sidhuism,


हरभजन-युवराज के बाहर होते ही अर्श से फर्श पर
घर में बब्बर शेर इस टीम में एडाप्टेबिलीटी की कमी: नवजोत सिद्धू

भूपेश चट्ठा, पटियाला
जिस तरह से देश को खाद्य सुरक्षा प्रति पंजाब ने आत्म निर्भर बनाया और देश की सीमाएं पंजाब के योगदान के बिना अधूरी है, ठीक वैसे ही पंजाबियों को माइनस करते ही देश का क्रिकेट असुरक्षित हो गया है। पंजाबी तड़के बिना खेल रही टीम इंडिया की हालत हरभजन-युवराज के बाहर होते ही पतली हो गई है।
इसे आप इत्तेफाक कहें या कुछ और लेकिन ये सही है कि वल्र्ड कप के हीरो आल राउंडर युवराज सिंह और टर्बनेटर हरभजन सिंह के बाहर जाने के कारण चाहे जो भी रहे हों लेकिन इनके बाहर होते ही टीम इंडिया अर्श से फर्श पर आ गई है। दिलचस्प सी चर्चा में अब यह भी कहा जाने लगा है कि थोड़ी बहुत लाज अगर बचाई है तो वो दिल्ली के रहने वाले और प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की तरह 'पंजाबी कोहलीÓ ही हैं। जिनके दम पर वापसी करने का प्रयास हो रहा है।
युवराज की बीमारी कब ठीक होगी? कब हरभजन की वापसी होगी? कब दोनों की फार्म में वापसी के साथ इंडिया कैप मिलेगी? यह सवाल अलग है पर दोनों की परफार्मेंस लाजवाब रही है। हरभजन जहां कई बार मैच विनर साबित हुए हैं तो एक ही ओवर में टी-20 में छह छक्के लगाने वाले युवराज वल्र्ड कप में चार बार मैन आफ द मैच और मैन आफ द टूर्नामेंट रहे हैं।
दूसरी ओर इसी संबंध में पूर्व टेस्ट क्रिकेटर, कामेटेटर व सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने 'दैनिक जागरणÓ से विशेष बातचीत में खुलासा किया कि भारत की टीम में एडाप्टेब्लिटी की कमी है, टीम परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढ़ाल नही पा रही है या फिर परिस्थितियों को अपने पक्ष में नहीं कर पा रही है। यह टीम घर में बब्बर शेर है... घर में होती है तो सब पर भारी... घर के बाहर निकलते ही...Ó।
भारत की टीम में 'पंजाबी तड़केÓकी कमी के चलते 'परफार्मेंसÓ ना देने अथवा  'आउट परफार्मÓ ना कर पाने पर वे खुल कर हंसते हैं और साथ ही देश प्रेम के जच्बे से भर कहते हैं कि 'यह बात सिद्धू के मुंह से अच्छी नहीं लगेगीÓ। साथ ही सिद्धूजिम के अंदाज में कहते हैं 'छोटे बीर लिखना ही है तो ये लिख...कि हमारी टीम मगरमच्छ के जैसी शक्तिशाली है...पानी में होती है तो सौ शेरों पर भी भारी पड़ती है...पानी के बाहर आते ही मगरमच्छ की पूंछ... भी खींच लेते हैं... हमारी हालत अब पानी के बाहर आए मरमच्छ जैसी है जिसकी पूंछ...Ó।