-एक ने कहा सरकारी बंदे हैं, तो दूसरे ने कहा बहुराष्ट्रीय कंपनियां बनी हैं सपांसर
-देश भर के किसानों की महापंचायत 25 को अमृतसर में: लक्खोवाल
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
प्रदेश में पहली बार आयोजित की गई कंसोरटियम आफ इंडियन फारमर्स एसोसिएशन सीआईएफए की कांफ्रेंस ने किसान यूनियनों की राजनीति में गर्मी ला दी है। अब तक किसानों के मुद्दे पर एक दूसरे के साथ वैचारिक मतभेद रखने के बावजूद 'साड्डा ही बंदाÓ होने का दम भरने वाली यूनियनों ने एक दूसरे की कलई खोल दी है।
एक ओर जहां एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रधान के पद पर पहुंचे सतनाम सिंह बहरू के आज के शो से ठीक पहले भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान व पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल ने मार्केट कमेटी के कार्यालय में आ कर घोषणा कर दी की उनका संगठन देश भर के किसानों की महापंचायत का आयोजन 25 नवंबर को अमृतसर में करने जा रहा है। इसमें उत्तर भारत के 10 से 12 राच्यों के किसान नेता पहुंच रहे हैं।
इसी दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सतनाम बहरू के कार्यक्रम में शामिल होने बारे पूछे जाने पर लक्खोवाल कहते हैं कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि ये चंद सरकारी बंदों का झुंड है। जो सरकार के लिए ही काम करता है। यहां तक कि केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय में इन किसान नेताओं को आफिस तक दिया गया है। हालांकि पंजाब सरकार की ओर से स्वयं ली गई सुविधाओं पर वे कहते हैं कि यह मंडी बोर्ड के चेयरमैन के रूप में हैं ना किसान यूनियन को दी गई हैं।
दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला प्रधान डा. दर्शन पाल ने इसे प्रैस के माध्यम से कांग्रेस सांसद की ओर से चलाया जाने वाला प्रचार अभियान बताया है। डा. दर्शन पाल कहते हैं कि एक जागीरदार की बेटी और एक पूर्व राजा की पत्नि किसानों के मुद्दे कैसे समझ सकती है। जिन्हें सुलझाने का दावा कर रही है। साथ ही कहा है कि पूरा कार्यक्रम किसानों का खून चूसने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से प्रायोजित है। दिलचस्प है कि मंच पर लगे बैनर का हवाला भी स्पष्ट रूप से दर्शाने को दिया गया। जिस पर कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रायोजक के रूप में दिखाया गया है।
डा. दर्शन पाल का कहना है कि दूसरी ओर हरसिमरत कौर जैसी राजनीतिक रूप से शक्तिशाली महिला को बुलाना और किसानों का मंच उपलब्ध करवाना खुदकुशी करने वाले परिवारों की भावनाओं से खिलवाड़ करने बराबर है।
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