-केंद्र की नीति है अब बासमती नहीं आम धान आसानी से बिक रहा है: मंडी अधिकारी
-पिछले साल का बासमती अब भी व्यापारी के पास पड़ा है: राइस मिलर्स
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चावल के मामले में पेट भरने व जीभ को स्वाद देने के साथ आपको सुगंधित खुशबू का अहसास देने वाला बासमती की आवक धान मंडियों में इस साल बढ़ी है लेकिन कीमत एक तिहाई तक गिर गई है। यानि खाने वालों की 'जरूरत के साथ इच्छाÓ पूरी करने वाला बासमती आने वाले सीजन 'किसान की जरूरतÓ और 'सरकार की डाइवरसीफिकेशन की इच्छाÓ पूरी नहीं कर पाएगा।
याद रहे कि धान की आम किस्मों करी तुलना में बासमती की बिजाई व रोपाई देरी से की जाती है और दस जून की बजाए जुलाई शुरू में आने वाली मानसून की बौछारों का इंतजार इसकी रोपाई कर लेती है। जिससे भूमिगत जल स्तर का नुकसान खासा कम रह जाता है।
पटियाला जिले की मंिडयों में जहां पिछले साल के पूरे सीजन में बासमती की आवक 60 हजार टन रही थी वहीं अब तक 61 हजार टन बासमती आ चुका है, जबकि धान की कुल औसत आवक का आंकड़ा पाने में एक लाख टन की अभी कमी है और सीजन के इन अंतिम दिनों में ज्यादातर धान बासमती अथवा इसके जैसी सुपरफाइन किस्मों की ही आवक होती है।
मंडी बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि सीजन में बासमती की कीमत 1575 से 1600 रूपये प्रति क्विंटल के बीच रही। इक्का दुक्का मामले में 1620 रूपये की बोली लगी है जबकि 2100 से 2200 रूपये की औसत बोली के बीच बिका बासमती बीते साल 2800 रूपये तक भी गया था।
दिलचस्प है कि पंजाब सरकार के मंत्रियों ने बासमती जैसी पीएयू-1121 किस्म के खिलाफ किसानों को खास 'जागरुकÓ भी किया था और ना लगाने की सलाह दी थी। याद रहे कि बासमती के अलावा दुनिया का ये सबसे लंबा चावल है और अरब देशों में खासा पसंद किया गया है।
इस साल हालत ऐसे हैं कि बासमती और 1121 लगभग एक जैसे दामों पर आ गए हैं जबकि सुपरफाइन किस्मों व 1121 का अंतर आठ सौ रूपये तक रहता रहा है।
जबकि मंडी बोर्ड के अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि केंद्र की नीति है, इसमें पंजाब कुछ नहीं कर सकता। पिछले साल बासमती व इसके जैसी किस्में बिक रही थी अब आम धान बिक रहा है। निजी खरीद काफी है। एफसीआई जैसे बड़े संस्थान को खरीद का मौका ही नहीं मिल पाया।
फैडरेशन आफ आल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान तरसेम सैणी कहते हैं कि पिछले साल व्यापारी वर्ग ने बासमती की खरीद खुल कर की लेकिन इसे बेचने में खासी परेशानी आई। पिछले साल की बासमती भी कई व्यापारियों के पास अब भी पड़ी है। वहीं आम धान के धड़ाधड़ बिकने का कारण इसके निर्यात का खोला जाना है।
-पिछले साल का बासमती अब भी व्यापारी के पास पड़ा है: राइस मिलर्स
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चावल के मामले में पेट भरने व जीभ को स्वाद देने के साथ आपको सुगंधित खुशबू का अहसास देने वाला बासमती की आवक धान मंडियों में इस साल बढ़ी है लेकिन कीमत एक तिहाई तक गिर गई है। यानि खाने वालों की 'जरूरत के साथ इच्छाÓ पूरी करने वाला बासमती आने वाले सीजन 'किसान की जरूरतÓ और 'सरकार की डाइवरसीफिकेशन की इच्छाÓ पूरी नहीं कर पाएगा।
याद रहे कि धान की आम किस्मों करी तुलना में बासमती की बिजाई व रोपाई देरी से की जाती है और दस जून की बजाए जुलाई शुरू में आने वाली मानसून की बौछारों का इंतजार इसकी रोपाई कर लेती है। जिससे भूमिगत जल स्तर का नुकसान खासा कम रह जाता है।
पटियाला जिले की मंिडयों में जहां पिछले साल के पूरे सीजन में बासमती की आवक 60 हजार टन रही थी वहीं अब तक 61 हजार टन बासमती आ चुका है, जबकि धान की कुल औसत आवक का आंकड़ा पाने में एक लाख टन की अभी कमी है और सीजन के इन अंतिम दिनों में ज्यादातर धान बासमती अथवा इसके जैसी सुपरफाइन किस्मों की ही आवक होती है।
मंडी बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि सीजन में बासमती की कीमत 1575 से 1600 रूपये प्रति क्विंटल के बीच रही। इक्का दुक्का मामले में 1620 रूपये की बोली लगी है जबकि 2100 से 2200 रूपये की औसत बोली के बीच बिका बासमती बीते साल 2800 रूपये तक भी गया था।
दिलचस्प है कि पंजाब सरकार के मंत्रियों ने बासमती जैसी पीएयू-1121 किस्म के खिलाफ किसानों को खास 'जागरुकÓ भी किया था और ना लगाने की सलाह दी थी। याद रहे कि बासमती के अलावा दुनिया का ये सबसे लंबा चावल है और अरब देशों में खासा पसंद किया गया है।
इस साल हालत ऐसे हैं कि बासमती और 1121 लगभग एक जैसे दामों पर आ गए हैं जबकि सुपरफाइन किस्मों व 1121 का अंतर आठ सौ रूपये तक रहता रहा है।
जबकि मंडी बोर्ड के अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि केंद्र की नीति है, इसमें पंजाब कुछ नहीं कर सकता। पिछले साल बासमती व इसके जैसी किस्में बिक रही थी अब आम धान बिक रहा है। निजी खरीद काफी है। एफसीआई जैसे बड़े संस्थान को खरीद का मौका ही नहीं मिल पाया।
फैडरेशन आफ आल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान तरसेम सैणी कहते हैं कि पिछले साल व्यापारी वर्ग ने बासमती की खरीद खुल कर की लेकिन इसे बेचने में खासी परेशानी आई। पिछले साल की बासमती भी कई व्यापारियों के पास अब भी पड़ी है। वहीं आम धान के धड़ाधड़ बिकने का कारण इसके निर्यात का खोला जाना है।
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