Thursday, 24 November 2011

ना आम किसान को कमाई, ना लोगों को निवाला,vegitables, season, farmer, inflation


-मंहगी को अगेती लगा, दवा के दम पर वसूलते हैं मोटा मुनाफा
-50 के पार बिकी गोभी अब 'टोकेÓ से सस्ती

भूपेश चट्ठा, पटियाला
गोभी कभी पचास के पार होती है तो कभी पशुओं के चारे के बराबर आ जाती है। मटर की कीमत कभी तिहाई में पहुंचती है तो चंद सप्ताह बाद वही हरे रंग का मटर दहाई में भी नहीं आ पाता। दिलचस्प है कि सब्जी के दाम कब गिरेंगे? कब चढ़ेंगे? इसका अंदाजा हर किसान को होता है पर स्टीक अनुमान लगा जुआ खेलने वाले ही मोटी कमाई कर पाते हैं। ऐसे में आम किसान को कमाई नहीं होती और आम आदमी को सस्ती सब्जी तभी मिलती है जब जानवरों के चारे के बराबर आ जाती है।
सब्जियों के दामों में होने वाले उतार चढ़ाव पर 'दैनिक जागरणÓ ने पाया कि मंहगी बिकने वाली सब्जी को अगेती लगाया जाता है और दवाओं के दम पर उगा जिंदा रखा जाता है और फिर सीजन शुय होने से पहले ही मोटा मुनाफा भी वसूला जाता है। जबकि जल्द खराब होने वाली सब्जी पर रिस्क कम लेते हुए सीजन अनुसार ही काम करते है। सब्जी के दामों में होने वाले उतार चढ़ाव पर पूर्वानुमान लगाने में एक दो बार असफल रहने वाला आम किसान इस पंगे से दूर चला जाता है। जबकि आधुनिक पेस्टीसाइड व केमिकल डालने व टीके लगाने के अलावा पुराने देसी तरीके अपनाने वालों की भी कमी नहीं है। यहां तक कि देसी तरीके से तूड़ी के कुप में प्याज भर कर स्टोर किया जाता है और दाम बढऩे के बाद ही बाहर निकाला जाता है।
सब्जी कारोबारी बाबू लाल बताते हैं कि गोभी नवरात्र से दीपावली तक 50 के पार बिकने वाली गोभी अब पशुओं को डालने वाले 'टोकेÓ से सस्ती हो गई है। टोका सवा दो रूपये किलो बिक रहा है तो गोभी दस रूपये की ढ़ाई किलो पर आ गई है। मूली का भी यही हाल है। 120 रूपये किलो का मटर 60 पर आया आगे छह रूपये भी होगा जबकि मटर का प्रिजरवड दाना 60 रूपये किलो है।
हालांकि पीढिय़ों से फल सब्जी व फूलों के बीजों की खेती करते आ रहे प्लांट्स मैन एंड सीड्स के अब्दुल वाहिद कहते हैं कि दुनिया भर में मंहगाई बढ़ी है, डीजल, खाद, दवाएं, कृषि उपकरण सहित अन्य खर्चे बढ़े हैं लेकिन किसान को थोड़ा भी लाभ मिलता है तो शोर शुरू हो जाता है। जबकि होना तो यह चाहिए कि सरकार मार्केटिंग का पुख्ता प्रबंध करे।
वहीं फाइव एलीमेंट्स हैल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाइगर कहते हैं कि जब, जो सस्ती हो तो समझो उसी का खाने का सीजन है और बिना जहरीले केमिकल के उपजी है। ऐसी सब्जी ही लाभकारी होती है जो प्राकृति के साये में उगे ना की प्राकृति के विपरीत जा कर।

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