पंजाब ने लिखा हरियाणा को, विभाग करेगा स्टिंग आपरेशन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब हरियाणा सीमा पर दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में 'अस्थाई नर्सिंग होमÓ के 'आपरेशन थियेटरोंÓ में हो रही भ्रूण हत्याओं पर पंजाब की ओर से हरियाणा को आगाह किया गया है और पंजाब ऐसे ही क्षेत्रों में स्टिंग आपरेशनों की तैयारी भी कर रहा है।
चीफ मेडिकल अफसर वरिंदर सिंह मोही कहते हैं कि उन्होंने हरियाणा राच्य की सीमा के भीतर हो रही भ्रूण हत्याओं पर अपने विभाग के अधिकारियों के माध्यम से हरियाणा सरकार को लिख भेजा है कि अंबाला व कैथल जिलों में पंजाब से गर्भवती महिलाएं जा कर अजन्मी कन्याओं की हत्याएं करवा रही हैं।
2006-07 में पंजाब-हरियाणा सीमा के निकट पातड़ां कस्बे में एक सौ से अधिक कन्या भ्रूणों को एक नर्सिंग होम के निकट कुएं में से बरामद किया गया था। उक्त कार्य को अंजाम देने वाले डा. मोही ने 'दैनिक जागरणÓ के सवाल पर कहा कि जानकारी देने वाले को प्रशस्ति पत्र के अलावा चार हजार रूपये नगद और स्टिंग आपरेशन में साथ देने वाली तीन से चार महीने की गर्भवती महिला के लिए 20 हजार रूपये का ईनाम तय किया गया है।
याद रहे कि पीएनडीटी एक्ट लागू करवाने में पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नि डा. नवजोत कौर ने भी डम्मी के रूप में कई स्टिंग आपरेशनों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है।
-हरियाणा सीमा पर गुप्त व अस्थाई ठिकानों पर हो रहा है लिंग परीक्षण टेस्ट
-पांच हजार से दस हजार के बीच पहुंचा परीक्षण टेस्ट, दलालों की चांदी
विनय शौरी, पटियाला
भ्रूण हत्या पर कानून की सख्ती और स्वास्थ्य विभाग की चौकसी से बेशक सरकार सहित आला
अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अब पंजाब के कन्या भ्रूण की हत्या हरियाणा के गुप्त ठिकानों पर बने अस्थाई अल्ट्रा साउंड सैंटरों पर होने लगी है। दिलचस्प है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को भी है, लेकिन सही सबूत या गवाह न होने की वजह से विभागीय अधिकारी खुद को असमर्थ मान रहे हैैं।
राज्य भर में लिंग परीक्षण करवाने को लेकर बढ़ी सख्ती के बाद से लिंग परीक्षण करवाने के इच्छुक व्यक्ति दलालों के माध्यम से हरियाणा सीमा से सटे गुप्त ठिकानों पर बने अस्थाई अल्ट्रासाउंड सेंटरों की सेवाएं अच्छे खासे दामों में ले रहे हैैं। सुरक्षा के लिहाज से हरियाणा के शहरों की बजाए ग्रामीण इलाकों में ठिकाने बनाकर लिंग परीक्षण करते हुए कन्या भ्रूण की हत्या करने का काम कर रहे हैैं। इकट्ठा की गई जानकारी के मुताबिक पंजाब के कई डाक्टर हरियाणा के डाक्टरों के साथ मिलकर इस गौरख धंधे को अंजाम दे रहे हैैं। गर्भवती महिला को अस्थाई अल्ट्रासाउंड सेंटर तक ले जाने और लाने के बीच लिंग परीक्षण का परिणाम देते हुए कन्या भ्रूण की हत्या तक को इतना गुप्त रखा जाता है कि मरीज और उसके पति के अतिरिक्त किसी अन्य को जानकारी देने से पूरा तरह से मना किया जाता है।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक लिंग परीक्षण करने वाले कई डाक्टर तो इस सुविधा को घर बैठे-बिठाए ही देने में सक्षम हैैं। जैसी सुविधा वैसे दाम के फार्मूले पर काम करते हुए ऐसे डाक्टर 10 से 15 हजार रुपये की फीस संबंधित ग्राहक से बटोर रहे हैैं। ग्राहकों की संख्या को बढ़ाने के लिए डाक्टरों ने कई एजेंट व बिचोलिए भी काम पर लगाए हुए हैैं। इनमें सरकारी अस्पतालों के दर्जा चार कर्मचारियों से लेकर लैब अटेंडेंट तक के कर्मचारी शामिल हैैं।
डीएसपी डिटेक्टिव मंजीत सिंह बराड़ के मुताबिक उक्त मामले की जानकारी उनके पास है, लेकिन बिना सबूत और शिकायत के पुलिस दूसरे राज्य में कार्रवाई कैसे कर सकती है। डीएसपी बराड़ के मुताबिक ऐसे किसी बड़े मामले को बेनकाब करने के लिए ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली दाईयों से संपर्क कर उनसे मुखबिरी करवाई जा रही है।
प्रो. एचपीएस वालिया
अजन्मी बच्चीयों के भोग डाल कर किया जागरुक, लगाया पंघूड़ा
2007 से अब तक आठ अनचाहे बच्चों जिनमें सात लड़कियां और एक अपाहिज लड़के को मां बाप और अच्छा घर कानूनी रूप से दिलवा चुके पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पत्रकारिता एंव जन संचार विभाग के पूर्व मुखी डा. हरजिंदर पाल सिंह वालिया भ्रूण हत्या के पीछे आर्थिक कारण ज्यादा मानते हैं कहते हैं कि ऐसे में इसकी रोकथाम का तरीका भी यही है कि भ्रूण हत्या करने वाले की आर्थिक परेशानी हल कर दो। उनकी संस्था ग्लोबल पंजाब फाउंडेशन ने हर तरह से यही प्रचार किया है कि कन्या भ्रूण की हत्या करने की बजाए उनके पंघूड़े में डाल दो, वे कानूनी रूप से उचित व्यक्ति की गोद तक पहुंचा देंगे।
याद रहे कि प्रो. वालिया ने ही कुछ साल पहले पातड़ां के एक निजी क्लीनिक के निकट सौ से अधिक भ्रूण के अवशेष एक कुंए में से मिलने के बाद अजन्मी बच्चीयों के नाम श्री अखंड पाठ साहिब के भोग समारोहों की शुरुआत पातड़ां से की थी, संत कंबली वाले गुरूद्वारा साहिब और टिकाना भाई राम किशन इत्यादि से होता हुआ ये जागरुकता अभियान कई चरण पर कर चुका है और सर्दियों में विदेशों से आने वाले एनआरआई इसमें बड़ी संख्या में शामिल होने लगे हैं। फांउडेशन का पंगुड़ा आजकल केके इंटरनेशनल स्कूल में लगा है।
डा. हरशिंदर कौर
326 लड़कियों की हर माह फीस जमा
भ्रूण हत्या को नस्ल मिटाने बराबर बता, भ्रूण हत्या पर सख्ती में डाक्टर के साथ मां-बाप को कड़ी सजा देने वाले इंटनेशनल कानून की वकालत कर रही डा. हरशिंदर कौर कहती है कि पीएनडीटी एक्ट पूरी तरह से असफल रहा है। ये बीमारी पंजाब में ही नहीं एनआरआई पंजाबियों में भी फैल चुकी है और पूरे एशिया में चलन ढ़ीले कानून के चलते बढ़ा है।
यूएनओ में भारत की ओर से मुद्दा उठाने के बाद सुर्खियों में आई डा. हरशिंदर कौर ने भ्रूण हत्या, बच्चों व महिलाओं की समस्याओं पर 22 किताबें भी लिखी हैं। उन्होंने 20 लड़कियों की स्कूल कालेज की फीस जमा करवाने से शुरुआत की थी, फिर एनआरआई लोगों के समर्थन से बना ट्रस्ट आज 326 लड़कियों की हर महीने चैक से उनके स्कूल अथवा कालेज के अकाउंट में फीस के पैसे जमा करवाता है।
बाबा चमकौर सिंह
सो क्यूं मंदा आखिए जित जम्में राजान
सेवा पंथी संप्रदाय के टिकाना भाई राम किशन के मुख्य सेवादार बाबा चमकौर सिंह ने पांच साल पहले प्रदेश में पंघूड़ा प्रथा आरंभ की थी किन्हीं कारणों के चलते ये एक बार बंद हो गई पर अब इसी साल के अंत तक एक बार फिर शुरू करने जा रहे हैं। कहते हैं कि हमारे सामाजिक ढ़ांचे की वजह से भ्रूण हत्याएं हो रही है। हम भ्रूण तो संभाल नहीं सकते लेकिन नवजात शिशु को संभाल सकते हैं। इसलिए पंघूडे को भ्रूण व शिशु संभाल केंद्र का नाम रखा गया कि जो अपनी बेटी को नहीं रख सकते वे इस पंघूड़े में छोड़ जाएं, हम सारी व्यवस्था करवा देंगे। बाबा चमकौर सिंह कहते हैं कि जब गुरू साहिबान ने पांच सौ साल पहले ही महिलाओं के बारे में कह दिया था कि 'सो क्यूं मंदा आखिए जित जम्में राजानÓ।
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब हरियाणा सीमा पर दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में 'अस्थाई नर्सिंग होमÓ के 'आपरेशन थियेटरोंÓ में हो रही भ्रूण हत्याओं पर पंजाब की ओर से हरियाणा को आगाह किया गया है और पंजाब ऐसे ही क्षेत्रों में स्टिंग आपरेशनों की तैयारी भी कर रहा है।
चीफ मेडिकल अफसर वरिंदर सिंह मोही कहते हैं कि उन्होंने हरियाणा राच्य की सीमा के भीतर हो रही भ्रूण हत्याओं पर अपने विभाग के अधिकारियों के माध्यम से हरियाणा सरकार को लिख भेजा है कि अंबाला व कैथल जिलों में पंजाब से गर्भवती महिलाएं जा कर अजन्मी कन्याओं की हत्याएं करवा रही हैं।
2006-07 में पंजाब-हरियाणा सीमा के निकट पातड़ां कस्बे में एक सौ से अधिक कन्या भ्रूणों को एक नर्सिंग होम के निकट कुएं में से बरामद किया गया था। उक्त कार्य को अंजाम देने वाले डा. मोही ने 'दैनिक जागरणÓ के सवाल पर कहा कि जानकारी देने वाले को प्रशस्ति पत्र के अलावा चार हजार रूपये नगद और स्टिंग आपरेशन में साथ देने वाली तीन से चार महीने की गर्भवती महिला के लिए 20 हजार रूपये का ईनाम तय किया गया है।
याद रहे कि पीएनडीटी एक्ट लागू करवाने में पूर्व क्रिकेटर व वर्तमान सांसद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नि डा. नवजोत कौर ने भी डम्मी के रूप में कई स्टिंग आपरेशनों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है।
-हरियाणा सीमा पर गुप्त व अस्थाई ठिकानों पर हो रहा है लिंग परीक्षण टेस्ट
-पांच हजार से दस हजार के बीच पहुंचा परीक्षण टेस्ट, दलालों की चांदी
विनय शौरी, पटियाला
भ्रूण हत्या पर कानून की सख्ती और स्वास्थ्य विभाग की चौकसी से बेशक सरकार सहित आला
अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैैं, लेकिन सच्चाई यह है कि अब पंजाब के कन्या भ्रूण की हत्या हरियाणा के गुप्त ठिकानों पर बने अस्थाई अल्ट्रा साउंड सैंटरों पर होने लगी है। दिलचस्प है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को भी है, लेकिन सही सबूत या गवाह न होने की वजह से विभागीय अधिकारी खुद को असमर्थ मान रहे हैैं।
राज्य भर में लिंग परीक्षण करवाने को लेकर बढ़ी सख्ती के बाद से लिंग परीक्षण करवाने के इच्छुक व्यक्ति दलालों के माध्यम से हरियाणा सीमा से सटे गुप्त ठिकानों पर बने अस्थाई अल्ट्रासाउंड सेंटरों की सेवाएं अच्छे खासे दामों में ले रहे हैैं। सुरक्षा के लिहाज से हरियाणा के शहरों की बजाए ग्रामीण इलाकों में ठिकाने बनाकर लिंग परीक्षण करते हुए कन्या भ्रूण की हत्या करने का काम कर रहे हैैं। इकट्ठा की गई जानकारी के मुताबिक पंजाब के कई डाक्टर हरियाणा के डाक्टरों के साथ मिलकर इस गौरख धंधे को अंजाम दे रहे हैैं। गर्भवती महिला को अस्थाई अल्ट्रासाउंड सेंटर तक ले जाने और लाने के बीच लिंग परीक्षण का परिणाम देते हुए कन्या भ्रूण की हत्या तक को इतना गुप्त रखा जाता है कि मरीज और उसके पति के अतिरिक्त किसी अन्य को जानकारी देने से पूरा तरह से मना किया जाता है।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक लिंग परीक्षण करने वाले कई डाक्टर तो इस सुविधा को घर बैठे-बिठाए ही देने में सक्षम हैैं। जैसी सुविधा वैसे दाम के फार्मूले पर काम करते हुए ऐसे डाक्टर 10 से 15 हजार रुपये की फीस संबंधित ग्राहक से बटोर रहे हैैं। ग्राहकों की संख्या को बढ़ाने के लिए डाक्टरों ने कई एजेंट व बिचोलिए भी काम पर लगाए हुए हैैं। इनमें सरकारी अस्पतालों के दर्जा चार कर्मचारियों से लेकर लैब अटेंडेंट तक के कर्मचारी शामिल हैैं।
डीएसपी डिटेक्टिव मंजीत सिंह बराड़ के मुताबिक उक्त मामले की जानकारी उनके पास है, लेकिन बिना सबूत और शिकायत के पुलिस दूसरे राज्य में कार्रवाई कैसे कर सकती है। डीएसपी बराड़ के मुताबिक ऐसे किसी बड़े मामले को बेनकाब करने के लिए ग्रामीण स्तर पर काम करने वाली दाईयों से संपर्क कर उनसे मुखबिरी करवाई जा रही है।
प्रो. एचपीएस वालिया
अजन्मी बच्चीयों के भोग डाल कर किया जागरुक, लगाया पंघूड़ा
2007 से अब तक आठ अनचाहे बच्चों जिनमें सात लड़कियां और एक अपाहिज लड़के को मां बाप और अच्छा घर कानूनी रूप से दिलवा चुके पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पत्रकारिता एंव जन संचार विभाग के पूर्व मुखी डा. हरजिंदर पाल सिंह वालिया भ्रूण हत्या के पीछे आर्थिक कारण ज्यादा मानते हैं कहते हैं कि ऐसे में इसकी रोकथाम का तरीका भी यही है कि भ्रूण हत्या करने वाले की आर्थिक परेशानी हल कर दो। उनकी संस्था ग्लोबल पंजाब फाउंडेशन ने हर तरह से यही प्रचार किया है कि कन्या भ्रूण की हत्या करने की बजाए उनके पंघूड़े में डाल दो, वे कानूनी रूप से उचित व्यक्ति की गोद तक पहुंचा देंगे।
याद रहे कि प्रो. वालिया ने ही कुछ साल पहले पातड़ां के एक निजी क्लीनिक के निकट सौ से अधिक भ्रूण के अवशेष एक कुंए में से मिलने के बाद अजन्मी बच्चीयों के नाम श्री अखंड पाठ साहिब के भोग समारोहों की शुरुआत पातड़ां से की थी, संत कंबली वाले गुरूद्वारा साहिब और टिकाना भाई राम किशन इत्यादि से होता हुआ ये जागरुकता अभियान कई चरण पर कर चुका है और सर्दियों में विदेशों से आने वाले एनआरआई इसमें बड़ी संख्या में शामिल होने लगे हैं। फांउडेशन का पंगुड़ा आजकल केके इंटरनेशनल स्कूल में लगा है।
डा. हरशिंदर कौर
326 लड़कियों की हर माह फीस जमा
भ्रूण हत्या को नस्ल मिटाने बराबर बता, भ्रूण हत्या पर सख्ती में डाक्टर के साथ मां-बाप को कड़ी सजा देने वाले इंटनेशनल कानून की वकालत कर रही डा. हरशिंदर कौर कहती है कि पीएनडीटी एक्ट पूरी तरह से असफल रहा है। ये बीमारी पंजाब में ही नहीं एनआरआई पंजाबियों में भी फैल चुकी है और पूरे एशिया में चलन ढ़ीले कानून के चलते बढ़ा है।
यूएनओ में भारत की ओर से मुद्दा उठाने के बाद सुर्खियों में आई डा. हरशिंदर कौर ने भ्रूण हत्या, बच्चों व महिलाओं की समस्याओं पर 22 किताबें भी लिखी हैं। उन्होंने 20 लड़कियों की स्कूल कालेज की फीस जमा करवाने से शुरुआत की थी, फिर एनआरआई लोगों के समर्थन से बना ट्रस्ट आज 326 लड़कियों की हर महीने चैक से उनके स्कूल अथवा कालेज के अकाउंट में फीस के पैसे जमा करवाता है।
बाबा चमकौर सिंह
सो क्यूं मंदा आखिए जित जम्में राजान
सेवा पंथी संप्रदाय के टिकाना भाई राम किशन के मुख्य सेवादार बाबा चमकौर सिंह ने पांच साल पहले प्रदेश में पंघूड़ा प्रथा आरंभ की थी किन्हीं कारणों के चलते ये एक बार बंद हो गई पर अब इसी साल के अंत तक एक बार फिर शुरू करने जा रहे हैं। कहते हैं कि हमारे सामाजिक ढ़ांचे की वजह से भ्रूण हत्याएं हो रही है। हम भ्रूण तो संभाल नहीं सकते लेकिन नवजात शिशु को संभाल सकते हैं। इसलिए पंघूडे को भ्रूण व शिशु संभाल केंद्र का नाम रखा गया कि जो अपनी बेटी को नहीं रख सकते वे इस पंघूड़े में छोड़ जाएं, हम सारी व्यवस्था करवा देंगे। बाबा चमकौर सिंह कहते हैं कि जब गुरू साहिबान ने पांच सौ साल पहले ही महिलाओं के बारे में कह दिया था कि 'सो क्यूं मंदा आखिए जित जम्में राजानÓ।