Saturday, 3 November 2012

कहीं मूषक ना भोग लगा ले गेहूं के बीजों का!


-रबी के सीजन की शुरुआत से पहले खेत को चूहों से मुक्त करना होता है
-कृषि विभाग के पास चूहे मारने की दवा जिंक फास्फेट खरीदने का फंड नहीं
-विभाग तकनीकि जानकारी उपलब्ध करवाता है: डायरेक्टर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
भारतीय सभ्यता में हर काम से पहले गणेश जी को याद किया जाता है। शायद इसीलिए काम की शुरुआत को ही 'श्री गणेशÓ करना कह दिया गया है। त्यौहारों के दिनों में आस्था चाहे बढ़ती हो लेकिन उत्तर भारत में रबी फसलों की बिजाई से पहले और विशेष रूप सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की खेती से पहले भगवान गणेश के वाहन को खेतों से मुक्ति दिलवानी होती है। इस साल मूषक मुक्त खेत करने कृषि विभाग के पास फंड नहीं है और बाजार में गैर सरकारी दवाओं में दवा कम और बीमारी ज्यादा बिक रही है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि चूहे मारने में प्रयोग होने वाली दवा जिंक फास्फेट खरीदने का प्रबंध नहीं हो पाया है। हर साल गेहूं की खेती होती है और हर साल इसी साल्ट की दवा का छिड़काव किया जाता है, लेकिन अलग से कोष ना होने की सूरत में अब 'इधर-उधरÓ से फंड का बंदोबस्त करने में विभाग जुटा है।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि धान की फसल लेने के बाद और गेहूं की बिजाई से ठीक पहले खेत को इन मूषकों से मुक्त करवाना होता है। बीज को धरती में डालने से पहले उसे तैयार करते समय प्रिजर्व करने की किसी भी जरूरी प्रक्रिया के समान ही यह भी अति आवश्यक कार्य होता है। अन्यथा अंकुरित होने तक गेहूं का बीज ही चूहे चट कर जाते है और दोबारा बिजाई करने तक समय निकल जाता है।
उल्लेखनीय है कि गोदामों में स्टोर किए गए अनाज पर भारी छिड़काव होता है और खेतों में से धान की कटाई के बाद यहां पर राज करने वाले चूहे खाने के लिए इधर उधर मुंह मारते हैं। इसी दौरान किसान का मंहगा बीज इन चूहों का आसानी से टार्गेट बनता है।
कृषि विभाग के डायरेक्टर डा. मंगल सिंह संधू कहते हैं कि रैट कंपैन इन दिनों के लिए बेहद जरूरी है लेकिन विभाग के पास इस क्षेत्र में करने को च्यादा कुछ नहीं है। विभाग के पास इस कार्य के लिए किसी तरह का फंड नहीं है। प्रदेश का कृषि विभाग किसानों को तकनीकि जानकारी उपलब्ध करवाता है। इस अनुसार 40 किलो बीजों में एक किलो जिंक फास्फेट मिला कर खेत में डालने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा खेत में मौजूद चूहे की बिलों को पहले बंद करना होता है। हर स्तर पर चूहे का प्रबंध करना होता है। फसल की बिजाई से लेकर कटाई तक ये सिलसिला चलता है।

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