Friday, 23 November 2012

पूर्व डीसी विकास गर्ग व एक अन्य जमानत याचिका खारिज


 पटियाला में विवादित जमीन घोटाला
-बचाव पक्ष ने कहा तत्कालीन डीसी की जमीन के वसीकों को तसदीक करने में भूमिका नहीं
-रवदीप के वकील ने कहा उसके पास केवल मुख्तयारनामा ही था, जिसके रद्द होने की उसे खबर नहीं थी
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
बहु चर्चित व कई करोड़ रूपये की विवादित जमीन के मामले में घोटाले के आरोप झेल रहे पटियाला के पूर्व डिप्टी कमिश्नर व आईएएस अधिकारी विकास गर्ग व एक अन्य आरोपी रवदीप सिंह की जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दी है।
उल्लेखनीय है कि लीला भवन के निकट सिविल सर्जन कार्यालय परिसर की विवादित जमीन के खरीद फरोख्त के मामले में कथित घोटाला सामने आने पर विजीलेंस ने नौ नवंबर को पूर्व डीसी विकास गर्ग, जिला माल अधिकारी राजवीर सिंह, नायब तहसीलदार गुरविंदर सिंह, कानूनगो प्रितपाल सिंह, पटवारी सुरेश कुमार के अलावा एनपी सिंह, यशपाल अग्रवाल, दविंदर सिंह संधू, रवदीप सिंह और जसवंत सिंह पर मामला दर्ज कर लिया था। इनमें से पूर्व डीसी विकास गर्ग व जीपीए होल्डर रवदीप सिंह की ओर से दायर की गई जमानत की याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निर्भय सिंह गिल की अदालत ने खारिज कर दी है।
विजीलेंस ब्यूरो की ओर से अदालत में बताया गया कि सरकारी जमीन की रजिस्ट्रियां करने की मंजूरी जिला माल अधिकारी की ओर से उस समय के डिप्टी कमिश्नर विकास गर्ग की सहमति से दी गई थी। इस बात को पटियाला डिवीजन के कमिश्नर की ओर से की गई जांच में खुद विकास गर्ग ने माना भी है। इसके अलावा विकास गर्ग रजिस्ट्री होने के दिनों में जमीन के खरीददारों के साथ फोन पर लगातार संपर्क में रहे। इससे स्पष्ट होता है कि सारा मामला विकास गर्ग की जानकारी में था।
इसी प्रकार विजीलेंस की ओर से रवदीप सिंह के बारे में बताया गया कि यह व्यक्ति जमीन के खरीददार एनपी सिंह का सगा भाई है और इस व्यक्ति की ओर से रद्द हुए मुख्तयारनामे के आधार पर सरकारी जमीन की रजिस्ट्री करवाई है। विजीलेंस का कहना है कि इस जमीन का सौदा 6.25 करोड़ रूपये में होना दिखाया गया था जबकि इस जमीन की बाजार कीमत 200 से 250 करोड़ रूपये है। वास्तव में बेचने वाले को खरीददार की ओर से 3.25 करोड़ रूपये की अदायगी ही की गई।
दूसरी ओर बचाव पक्ष में विकास गर्ग के वकील अशोक माथुर ने दलील दी है कि विवादित जमीन के वसीकों को तसदीक करने में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर विकास गर्ग की कोई भूमिका नहीं है। यह मंजूरी समय के माल अधिकारी राजवीर सिंह की ओर से अपने स्तर पर दी गई थी। मंजूरी देने संबंधी फाइल कभी भी विकास गर्ग के सामने पेश नहीं की गई।
इसी क्रम में रवदीप सिंह के वकील ने कहा उसके पास केवल मुख्तयारनामा ही था, जिसके आधार पर उसने जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी और उक्त मुख्तयारनामे के रद्द होने की उसे खबर नहीं थी।

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