-स्कूल की कुल क्षमता का 25 फीसद हिस्से में गरीब छात्रों को देना होगा प्रवेश
-शपथ पत्र ना दायर करने वालों की मान्यता अगले शैक्षणिक सत्र से होगी रद्द
-अभी ब्लाक स्तर से रिपोर्ट आनी है, फिर आंकड़ा और बढ़ेगा: शिक्षा अधिकारी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
रोटी कपड़ा और मकान की बुनियादी जरूरतों के पार जा रहे भारतीय लोकतंत्र में शिक्षा का अधिकार चाहे तकनीकि रूप से संविधान ने आम आदमी को दे दिया हो लेकिन जमीनी हकीकत में यह अभी आधे के थोड़ा पार ही निकल पाया है। राज्य में शिक्षा का हब कहे जाने वाले पटियाला जिले के नौ से कुछ अधिक स्कूलों में से साढ़े पांच सौ ने ही तय समय में जिला शिक्षा अधिकारी के पास शपथ पत्र दिए हैं कि वे अपने यहां पर प्रवेश दिए जाने वाले बच्चों में से एक चौथाई सीटों पर गरीब बच्चों को ही प्रवेश देंगे।
इसी संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक हरिंदर कौर कहती है कि उन्होंने ब्लाक स्तर पर स्कूलों से उक्त परफार्मा भरवाने को कहा था। 550 से अधिक का आंकड़ा जिला मुख्यालय का है। 12 अक्टूबर की अंतिम तिथि के बाद आज पहला कार्य दिवस आया है, ऐसे में अभी ब्लाक स्तर से रिपोर्ट आनी है। इसके बाद आंकड़ा और बढ़ेगा। शिक्षा अधिकारी का कहना है कि जल्द ही प्रदेश को सारी रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत हर स्कूल में गरीब बच्चों को प्रवेश देने की बात कही गई है। अधिनियम अनुसार स्कूल की कुल क्षमता का 25 फीसद हिस्सा गरीब विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखा जाएगा। ऐसा ना करने वालों की मान्यता अगले शैक्षणिक सत्र से समाप्त कर दी जाएगी।
स्कूलों विशेष रूप से मोटी फीस वसूलने वाले निजी व पब्लिक स्कूलों ने गरीब की परिभाषा को लेकर अड़ंगा लगा दिया और सवाल उठाया कि यह कौन तय करेगा कि गरीब कौन है? इसी बीच स्कूलों की ओर से शपथ पत्र दायर करने की अंतिम तिथि निकल गई, हालांकि इस तिथि को एक बार फिर बढ़ा कर 12 अक्टूबर कर दिया गया है।
वहीं यह भी सामने आया है कि स्कूलों में 25 फीसद गरीब बच्चों को प्रवेश देना सुनिश्चित करने के लिए जो कार्य अथवा होमवर्क शिक्षा अधिकारियों अथवा शिक्षा विभाग की ओर से किया जाना था वो पूरी तरह से नहीं हो पाया है। समाज सेवी संस्थाओं की ओर से चलाए जाने वाले कई ऐसे भी स्कूल हैं जो गरीब बच्चों की मदद करना चाहते हैं लेकिन उन्हें बताया ही नहीं गया कि किस बच्चे को प्रवेश देना है। राच्य सरकार के शिक्षा विभाग के अलावा सेंट्रल बोर्ड आफ स्कूल एजूकेशन की ओर से भी स्कूलों को परफार्मे भेजे गए हैं।
इसी क्रम में डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल एसआर प्रभाकर कहते हैं कि वे तो पहले से ही 11 लाख रूपये की मदद अपने स्कूल के बच्चों की कर रहे हैं। उनकी संस्था स्वेच्छा से ही मदद करती रही है। उन्हें खुशी होगी अगर वे कुछ होनहार बच्चों की मदद कर सकें जो पैसों की वजह से पढ़ाई जारी ना रख सकता हो।
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