-हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद हजारों किसानों के अटके करोड़ों
-देरी करने पर 15 फीसद ब्याज के साथ होगा भुगतान: गन्ना कमिश्नर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गेहूं-धान की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद 72 घंटों में किसान को उपज भुगतान का दावा करने वाली सरकार एक ओर जहां किसानों को इसी फसलीय चक्र से निकाल कर डाइवरसीफिकेशन का नारा लगा रही है वहीं डाइवरसीफिकेशन वाली प्रमुख फसल गन्ने के बकाया का भुगतान ही नहीं किया गया है। ये भुगतान एक या दो सप्ताह अथवा महीने दो महीने का नहीं अलबत्ता पूरी एक फसल का है और अगर अब किसान गन्ने की ओर रुख करना चाहता है तो अगली बिजाई उधारी से करनी तय हो गई है।
आढ़ती के ब्याज व बाजार की उधारी से जूझ रहा किसान डाईवरसीफिकेशन वाली इस फसल से मुंह मोड़ सकता है। रबी के सीजन में इन दिनों में 'स्यालू गन्नेÓ की बिजाई करने जा रहा है। ऐसे में किसान की दिलचस्पी कितनी होगी? इस पर कंसोरटियम आफ इंडियन फार्मस एसोसिएशन के प्रधान सतनाम सिंह बहरू कहते हैं कि गन्ने का फसल वैसे ही चार-छह महीनों की बजाए एक साल लगाती है। उस पर एक साल से किसानों का 93 करोड़ 40 लाख का बकाया छोड़ा गया। अब भुगतान होने लगा है, लेकिन यह अभी भी हजारों किसानों के करोड़ों का बकाया पड़ा है। ऐसे में किसान कैसे अपना परिवार पालेगा? और कहां से बिजाई करेगा? बिना मेहनताने के अफसर दो महीने नहीं निकाल पाते, किसान के दो साल भी कुछ नहीं लगते।
याद रहे कि सरकार एक ओर कम पानी का प्रयोग करने वाली फसलों की ओर किसान को लेजाने का प्रयास कर रही है दूसरी ओर गन्ने का भुगतान नहीं किया गया।
वहीं गन्ना कमिश्नर डा. रणजीत सिंह स्वीकार हैं कि किसानों को उनकी फसल की अंतिम किश्त नहीं मिली है, लेकिन अब हाई कोर्ट के आदेशों के बाद किसानों को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, आदेश अनुसार किसानों को बकाये के भुगतान में देरी होने पर 15 फीसद के हिसाब से ब्याज दिया जाएगा। ये काम भी मिलों ने ही करना है। सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अलबत्ता सरकार इन्हें लोन दे सकती है।
इनसेट
सी रंगराजन कमेटी की सिफारिश चीनी हो डी-कंट्रोल
हाल ही में सी रंगराजन कमेटी की रिपोर्ट में चीनी का डी-कंट्रोल करने की सिफारिश के साथ ही बाजार भाव पर तय होने वाले दाम से मिले लाभांश में से बड़ा हिस्सा किसान को देने की बात कही गई है। ऐसे में भुगतान गन्ने की पिड़ाई के बाद तैयार हुई चीनी के बिकने के बाद ही होगा। किसान एक ओर बाजार के दामों से उत्साहित हैं तो दूसरी ओर भुगतान की संभावित देरी से भी डरे हैं।
ठंडा है एथनाल, बिजली बनने में भी समय
गन्ने से एथनाल बनाने के सवाल पर आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि हाल ही में डाइवरसीफिकेशन पर हुई बैठक में शूगर मिलों में एथनाल बनाने की मात्रा बढ़ाने का प्रस्ताव लाया जरूर गया है पर निर्णय नहीं हुआ। केवल पांच फीसद तक की अनुमति है। जो चल रहा है। राच्य में 16 मिले काम कर रही है इनमें सात निजी और नौ सहकारी क्षेत्र की हैं। इनमें से इक्का दुक्का को छोड़ शेष का जीर्णोद्धार कर बिजली बनाने का प्रस्ताव भी अभी ठंडा है।
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