-पटाखों के प्रदूषण पर खामोशी
-बीते साल स्कूलों में चलाया था अभियान, विद्यार्थियों से भरवाए शपथ पत्र
-जागरुकता रैलियां बनी थी आकर्षण केंद्र
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चूल्हा जलाने को गैस नहीं मिल रही ऐसे में मंहगाई की मार तले पिस रहे आम आदमी के बच्चे भला पटाखे कहां से जलाएंगे? इस पर मौसम भी साथ है। पिछले साल की तुलना में सर्द मौसम में आ रही दीवाली में प्रदूषण की संभावना वैसे ही कम है। संभावित रूप से इन दोनों 'उम्मीदोंÓ के सहारे इस साल सरकार, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अथवा प्रशासन की ओर से पटाखों के चलाने से होने वाले प्रदूषण प्रति 'जागरुकÓ करने कम से कम अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पटाखों से हर साल होने वाले प्रदूषण पर इस प्रकार की 'खामोशीÓ पर पीपीसीबी के ही एक अधिकारी बताते हैं कि पिछले साल स्कूलों में महीना भर पहले ही अभियान शुरु कर दिया गया था। दीवाली पर 'ग्रीन प्लैजÓ के नाम से विद्यार्थियों से शपथ पत्र भरवाए गए थे। यह बड़े शहरों से आगे निकलते हुए कस्बों तक में भी चला था। इसके अलावा शहरों में निकाली गई जागरुकता रैलियां भी आकर्षण का केंद्र बनी थी हालांकि रैलियों का सिलसिला पिछले कई सालों से चलता आ रहा है, पर इस बार यह भी नहीं हुआ है।
दूसरी ओर सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला कहते हैं कि पंजाब में दीवाली धान के बोनस व गेहूं के घोषित होने वाले एमएसपी पर निर्भर करती है। इस बार दोनों तो गायब ही हैं। उस पर ब्याज दरों में कमी ना आने से मकान, मोटर से लेकर हर तरह के लोन की किश्त का कम ना होना... घी, तेल, चीनी, दाल सब्जी के बाद घरेलू गैस, डीजल-पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी और उस पर पड़ी मंहगी बिजली की मार के बीच झूल रहा इंसान इस दीवाली पटाखों पर भला क्या फूंकेगा?
इसी प्रकार पिछले साल दीवाली के रोज चली तेज हवा में पटाखों का रहा सहा प्रदूषण वैसे ही उड़ गया था। इस बार तो पिछले साल के 26 अक्टूबर की तुलना में दीवाली 17 दिन देरी से है। नवंबर मध्य में होने के चलते धान की पराली से होने वाला प्रदूषण खत्म होने को होगा और खेतों में गेहूं की बिजाई शुरु हो चुकी होगी। दीवाली पर ठंड बढऩे से स्मोक व फोग के मिलने से बना स्मोग तो बनेगा लेकिन ज्यादा देर तक आसमान पर नहीं टिक सकेगा और जल्द ही नीचे आ जाएगा। ऐसे में जहरीली गैसों से लेकर रेस्पीरेटरी सस्पेंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल तक सभी के आंकड़ों में गिरावट दर्ज होनी तय है। ऐसे में हर कोई आराम से है कि हो जाएगा।
एसजीपीसी से भी आतिशबाजी का समय कम करवाया
अपने फैसलों पर अडिग रहने वाली सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी पटाखों से होने वाले प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब परिसर से होने वाली आतिशबाजी का समय कुछ कम कर इसमें अपना योगदान दिया था। पीपीसीबी के तत्कालीन चेयरमैन केएस पन्नू ने दीवाली के बाद विशेष रूप से एसजीपीसी का इस पर धन्यवाद भी किया था।
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विज्ञापन दे रहे हैं मीडिया में: चेयरमैन
पीपीसीबी के चेयरमैन रविंदर सिंह कहते हैं कि विभिन्न समाचार पत्रों व मीडिया में दीवाली पर होने वाले प्रदूषण से संबंधित विज्ञापन जारी कर लोगों को जागरुक करने जा रहे हैं। पिछले साल के समान स्कूली विद्यार्थियों से शपथ पत्र दायर करवाने अथवा किसी अन्य प्रकार का अभियान चलाए जाने के सवाल पर वे कहते हैं कि अभी फाइनल नहीं हुआ है। एक दो दिनों में पूरा अभियान सामने होगा और लोगों से अपील की जाएगी कि पटाखे ना चालाएं।
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