गेहूं की फसल में एक सप्ताह की और देरी
बारिश का असर
-प्रभावित क्षेत्र में अगेती गेहूं की उपज में एक से दो क्विंटल की गिरावट
-तकनीकि कारणों से सरकार से मुआवजे की उम्मीद नहीं
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गेहूं की फसल की कटाई के दिनों में चली तेज हवाओं के साथ आई बारिश ने सरकारी तौर पर देरी से चल रहे सीजन में कम से कम एक सप्ताह की और देरी कर दी है।
प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरु की गई है, हालांकि पंजाब में गेहूं की कटाई परंपरागत रूप से वैसाखी पर ही शुरु होती है। इस साल चले लंबे सर्द सीजन के चलते सरकारी सीजन की तुलना में परंपरागत सीजन पर उपज मंडियों में आनी थी। लेकिन बारिश का प्रत्यक्ष रूप से असर ये हुआ की खेत गीले होने के अलावा गेहूं में नमी की मात्रा बढ़ गई। तय मापदंड अनुसार नमी 12 फीसदी से अधिक होने पर एमएसपी पर गेहूं का बिकना भी संभव नहीं है।
मौसम की मार पर भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रधान डा. दर्शन पाल कहते हैं कि गेहूं की अपेक्षा सरसों को नुकसान च्यादा हुआ है, पक्की हुई फसल अथवा अगेती लगी गेहूं के झाड़ में बारिश से एक से दो क्विंटल की कमी आ सकती है जबकि देरी से बिजाई वाली पछेती किस्में पानी से गिर गई हैं। इनकी कटाई में परेशानी आएगी।
दिलचस्प है कि सरकार की ओर से किसी तरह का मुआवजा मिलने की किसान को कोई संभावना नहीं है। मौसम की मार पर मुआवजा तभी दिया जा सकता है जब नुकसान कम से कम 25 फीसदी हुआ हो, ऐसे में तकनीकि कारण सामने हैं।
इसी क्रम में कंसोरटियम आफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन के प्रधान सतनाम सिंह बहरू बताते हैं कि फिलहाल तो ईश्वर की कृपा से बच गए हैं पर लोगों में डर खासा है, संगरूर, मानसा जिलों में ओलों से नुकसान जरूर हुआ है। देरी से चल रहे सीजन में प्रदेश के शेष क्षेत्र में एक दम से कटाई का जोर पडऩे वाला है। तब प्रबंध करना मुश्किल होगा।
दूसरी ओर अब तक प्रदेश की मंडियों में मात्र नौ हजार टन गेहूं की आवक होने के चलते मंडियों में गेहूं का नुकसान नहीं हुआ है।
'बारिश व तेज हवाओं से फसल कई जगहों पर टेडी हो गई है, संभव है कि कंबाइन चलाने में दिक्कत आए, लेकिन झाड़ में कमी नहीं आएगी, क्षेत्र विशेष में नुकसान हुआ है। जहां कहीं ओले गिरे हैं, वहां दाने भी गिरे है और पौधे भी टूटे हैं, पर लंबे चले ठंडे मौसम के चलते कुल उपज पिछले साल की 112 लाख 68 हजार टन से च्यादा और 115 लाख टन से 120 लाख टन मंडियों में आने की उम्मीद हैÓ अजमेर सिंह लक्खोवाल, चेयरमैन पंजाब मंडी बोर्ड