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Friday, 5 October 2012

धान पर आफत बनने लगी बारिश, paddy, bad weather, harvesting,


-पत्ता लपेट सुंडी की मार के बाद सीलन से उपजी बीमारियों की आशंका
-बौछारों से सुंडी झडऩे की उम्मीद
फोटो: 19
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
जून जुलाई में बारिश को तरसे धान के लिए अगस्त तो ठीक ठाक रहा पर अब सितंबर के पहले सप्ताह में तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश फसल पर आफत बन कर बरसने लगी है।
धान की फसल पर बीते दिनों में पत्ता लपेट सुंडी की मार पड़ी थी और अब रुक रुक कर हुई बारिश में पैदा हुई सीलन से बीमारियों के पैदा होने की आशंका बन पड़ी है। हालांकि डकाला रोड स्थित खेड़ी जट्टां के किसान जोगिंदर सिंह कहते हैं कि बारिश की बौछारों से पौधे पर लगी पत्ता लपेट सुंडी के झडऩे की पूरी उम्मीद है।
वहीं मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल कहते हैं कि तेज बारिश से तो पत्ता लपेट सुंडी गिर जाएगी लेकिन तेज हवाओं के साथ आई बारिश से पौधों के गिरने की संभावना ज्यादा रहती है। हालांकि विभाग के पास अभी ऐसी कोई सूचना नहीं है। फसल को सीलन संबंधी बीमारी लगने के सवाल पर वे कहते हैं कि अभी किसी तरह का प्रयोग करने से बचना चाहिए। केवल उन किस्मों के लिए ये बारिश नुकसान दायक साबित हो सकती है जो अगेती है, अंकुरित हो रहे पौधों में दाने को नुकसान हो सकता है।

Friday, 28 September 2012

बारिश से राहत पर और तेज हुई तो आफत


-पत्ता लपेट सुंडी से धान के पौधों को मिलेगी निजात
-अगेती किस्मों पर और बारिश का हो सकता है नुकसान
फोटो: 1
भूपेश चट्ठा, पटियाला
लगातार हुई रिमझिम बारिश से सूखे की मार झेल रहे और मंहगा डीजल फूंक रहे किसानों को आखिरकार राहत मिल गई है, लेकिन धान के सीजन के जिन दिनों में ये बारिश हो रही है उसके और तेज होने अथवा हवाएं चलने से यही राहत, आफत में बदल सकती है।
प्रोग्रेसिव खेती से जुड़े जसविंदर सिंह बताते हैं कि बारिश का फसल को लाभ ही है। इस बार कोई भी ऐसी जगह नहीं है जहां धान की फसल डूब रही हो ऐसे में धान को सभी जगह पर फायदा हो रहा है। चारा व बासमती के नाम इसमें शामिल किए जा सकते हैं। इसी प्रकार कोरजीवाला के परविंदर सिंह कहते हैं कि वे देख रहे हैं कि कुछ दिनों से पत्ता लपेट सुंडी धान की बीमारी के रूप में पौधों को लग रही है। इन बारिशों से बिना स्प्रे ही दूर होनी चाहिए। वे कहते हैं कि जो जान ईश्वर के दिए पानी में है वो टयूबवेल के पानी में नहीं। वहीं बराबर पानी का छिड़काव होता है, यहां कुछ पौधे डूब रहे होते है तो कुछ पानी आने का इन्तजार कर रहे होते हैं।
इसी क्रम में आनन फानन ज्यादा डीजल फूंक कर शुरु में धान की बिजाई करने वाला किसान थोड़ा चिंतित होने लगा है। इन पौधों में बल्लियां निकलने को हैं वहां पर बारिश तेज होने से दाने में बनने वाले दूध की कमी रह जाती है अथवा दाना बनता ही नहीं है। हालांकि बारिश के साथ हवा ना चलने के कारण फसल के जमीन में बिछने की खबर नहीं है।
वहीं मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि बारिश का इसी रफ्तार से होना धान के लिए अच्छा है। इसके बाद खिलने वाली धूप पौधे की ग्रोथ और बढ़ाएगी। बारिश से पिछले दिनों में कुछ क्षेत्रों में थोड़ी बहुत पौधों को लगी पत्ता लपेट सुंडी भी हट जाएगी, लेकिन बारिश ज्यादा हुई तो धान की अगेती किस्मों विशेष रूप से पीआर 113, 114 आदि को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि धान की ही पछैती किस्मों के लिए ये अभी भी फायदेमंद है।

Friday, 13 April 2012

मौसम की मार, किसान लाचार, wheat, bad weather, farmer,


 गेहूं की फसल में एक सप्ताह की और देरी
बारिश का असर
-प्रभावित क्षेत्र में अगेती गेहूं की उपज में एक से दो क्विंटल की गिरावट
-तकनीकि कारणों से सरकार से मुआवजे की उम्मीद नहीं
भूपेश चट्ठा, पटियाला
 गेहूं की फसल की कटाई के दिनों में चली तेज हवाओं के साथ आई बारिश ने सरकारी तौर पर देरी से चल रहे सीजन में कम से कम एक सप्ताह की और देरी कर दी है।
प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरु की गई है, हालांकि पंजाब में गेहूं की कटाई परंपरागत रूप से वैसाखी पर ही शुरु होती है। इस साल चले लंबे सर्द सीजन के चलते सरकारी सीजन की तुलना में परंपरागत सीजन पर उपज मंडियों में आनी थी। लेकिन बारिश का प्रत्यक्ष रूप से असर ये हुआ की खेत गीले होने के अलावा गेहूं में नमी की मात्रा बढ़ गई। तय मापदंड अनुसार नमी 12 फीसदी से अधिक होने पर एमएसपी पर गेहूं का बिकना भी संभव नहीं है।
मौसम की मार पर भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रधान डा. दर्शन पाल कहते हैं कि गेहूं की अपेक्षा सरसों को नुकसान च्यादा हुआ है, पक्की हुई फसल अथवा अगेती लगी गेहूं के झाड़ में बारिश से एक से दो क्विंटल की कमी आ सकती है जबकि देरी से बिजाई वाली पछेती किस्में पानी से गिर गई हैं। इनकी कटाई में परेशानी आएगी।
दिलचस्प है कि सरकार की ओर से किसी तरह का मुआवजा मिलने की किसान को कोई संभावना नहीं है। मौसम की मार पर मुआवजा तभी दिया जा सकता है जब नुकसान कम से कम 25 फीसदी हुआ हो, ऐसे में तकनीकि कारण सामने हैं।
इसी क्रम में कंसोरटियम आफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन के प्रधान सतनाम सिंह बहरू बताते हैं कि फिलहाल तो ईश्वर की कृपा से बच गए हैं पर लोगों में डर खासा है, संगरूर, मानसा जिलों में ओलों से नुकसान जरूर हुआ है। देरी से चल रहे सीजन में प्रदेश के शेष क्षेत्र में एक दम से कटाई का जोर पडऩे वाला है। तब प्रबंध करना मुश्किल होगा।
दूसरी ओर अब तक प्रदेश की मंडियों में मात्र नौ हजार टन गेहूं की आवक होने के चलते मंडियों में गेहूं का नुकसान नहीं हुआ है।

'बारिश व तेज हवाओं से फसल कई जगहों पर टेडी हो गई है, संभव है कि कंबाइन चलाने में दिक्कत आए, लेकिन झाड़ में कमी नहीं आएगी, क्षेत्र विशेष में नुकसान हुआ है। जहां कहीं ओले गिरे हैं, वहां दाने भी गिरे है और पौधे भी टूटे हैं, पर लंबे चले ठंडे मौसम के चलते कुल उपज पिछले साल की 112 लाख 68 हजार टन से च्यादा और 115 लाख टन से 120 लाख टन मंडियों में आने की उम्मीद हैÓ अजमेर सिंह लक्खोवाल, चेयरमैन पंजाब मंडी बोर्ड  

Friday, 16 September 2011

बारिश ने तबाह कर डाली धान की 1121 किस्म, bad weather, paddy,


-पॉलीनेशन नहीं होने से दाने बल्लियों में पूरे नहीं पड़ते: डा. सोहल
-पछेती को भी नुकसान पर अगेती के दाने बदरंग होने की संभावना बढ़ी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
बल्लियां या धान की 'मुजंरेंÓ निकलने के ठीक उपर आई बारिश ने धान की पीएयू-1121 किस्म को लगभग तबाह कर डाला है, हालांकि कृषि विशेषज्ञों व पंजाब सरकार की ओर से इस किस्म को ना लगाने की सिफारिश की थी।
दुनिया भर में अपने सबसे लंबे चावल के लिए मशहूर धान की यह किस्म है तो साधारण लेकिन देखने में बासमती चावल का रंग रूप लिए होती है। अंतर सिर्फ इतना है कि इसमें बासमती जैसी खुशबू नहीं होती। इसके बावजूद दाम के मामले में ये साधारण धान की तुलना में दो से तीन गुना तक मंहगा बिकता है। खाड़ी देशों में ज्यादा मांग के चलते केंद्र सरकार की निर्यात नीति इसके दामों को आए सीजन प्रभावित करती रहती है। जिससे दाम शेयर बाजार की तरह अर्श से फर्श के बीच झूलते रहते है।
आठ व नौ सितंबर को हुई बारिश के बाद बीते दिन की बौछारों पर नौगावां केकुलजिंदर सिंह औलख बताते हैं कि जिस एकड़ में मुजंरें निकल रही थी वहां बारिश की बूंदों ने सारा सिट्टा सफेद कर दिया है और जहां दाने में दूध आ चुका था वहां पर अब आई बारिश ने इसे काला करना तय कर दिया है।
सितंबर मध्य की इन दो बौछारों ने धान की अन्य किस्मों को भी विपरीत रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। फसल कितने फीसदी खराब हुई है इसका आंकलन तो धूप निकलने के  बाद ही हो पाएगा लेकिन बारिश ने धान की गुणवत्ता पर सीधा-सीधा असर डाल दिया है। धर्मेहड़ी के गुरप्रीत सिंह कहते हैं कि इस साल बराबर अंतराल पर हुई बारिशों ने धान के फसल को खासा तगड़ा कर रखा था। भारी हुए पौधे पर इन दिनों की बारिश ने कुछ ऐसे हालात बना दिए हैं जैसे किसी के मुंह पर आप लगातार थपड़ मारते रहो। दाने का थोथा रह जाना अथवा कम वजन का होना उतना ही खतरनाक है जितना ना बनना। ऐसे फोके दाने पंखा लगाते ही कचरे के रूप में कबाड़ में जा गिरते हैं।
पंजाब कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर बीज, डा. बीएस सोहल बताते हैं कि सितंबर के इन दिनों में होने वाली बारिश को ठीक कहा ही नहीं जा सकता और इसके बाद आने वाली बारिश और ज्यादा खतरनाक साबित होगी। धान के पौधे पर सीधे पड़ी पानी की बौछारें और साथ में चली हवा से बल्लियों में से दाने झड़ जाते हैं और जहां पर दाने नहीं हुए हैं वहां पानी लगने से थोथे रह जाते हैं। अन्य फसलों पर तो विशेष असर नहीं होता पर प्रदेश की खरीफ की मुख्य फसल धान के मामले में पॉलीनेशन नहीं होने से दाने बल्लियों में पूरे नहीं पड़ते हैं।
 डा. सोहल कहते हैं जहां बल्लियां निकलने को होती हैं और हवा से पौधे गिर गए हैं उनमें बाद में बनने वाला बीज छोटा रह जाता है। इतना ही नहीं दाने का छिलका बदरंग हो जाता है। धान का छिलका काला होने पर इससे निकला चावल बदरंग अथवा मटमेला भूरा होता है। जिससे मंडी में धान के बेचने में भी खासी परेशानी आती है।
ऐसे ही लखविंदर सिंह बताते हैं कि  जिन किसानों ने धान की बिजाई और रोपाई देरी से की थी उन्हें इससे पहले नुकसान नहीं हुआ है। पर अब हालात बदल रहे हैं। पंजाब हरियाणा सीमा पर बाढ़ की मार तले आने वाले ज्यादातर क्षेत्र में कुछ ऐसा ही माहौल है। अगेती रोपाई पर जहां मार पड़ी है पर ज्यादा लाभ पछैती को भी नहीं है अलबत्ता नुकसान अब बढ़ेगा।

Saturday, 10 September 2011

बारिश से धान की गुणवत्ता पर असर, bad weather, paddy, sept.


भूपेश चट्ठा, पटियाला दो दिन से लगातार हो रही बारिश ने धान की फसल को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। फसल कितने फीसदी खराब हुई है इसका आंकलन तो धूप निकलने के बाद ही हो पाएगा, लेकिन बारिश ने धान की गुणवत्ता पर सीधा असर डाल दिया है।
पंजाब कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर बीज डा. बीएस सोहल बताते हैं कि इन दिनों में होने वाली बारिश को ठीक कहा ही नहीं जा सकता। इसके बाद आने वाली बारिश और खतरनाक साबित होगी। धान के पौधे पर सीधे पड़ी पानी की बौछारें और हवा से बालियों से दाने झड़ जाते हैं और जहां पर दाने नहीं हुए हैं वहां पानी लगने से थोथे रह जाते हैं। अन्य फसलों पर तो विशेष असर नहीं होता पर प्रदेश की खरीफ की मुख्य फसल धान के मामले में पॉलीनेशन नहीं होने से दाने बालियों में पूरे नहीं पड़ते हैं। पौधे गिरने से दाने का छिलका बदरंग हो जाता है। इसका चावल भी बदरंग अथवा मटमेला भूरा होता है। जिसे मंडी में बेचने में भी खासी परेशानी आती है।
धर्मेहड़ी गांव के किसान हरभजन सिंह बताते हैं कि जिन किसानों ने धान की बिजाई और रोपाई देरी से की थी उन्हें इस बारिश में भी नुकसान नहीं हुआ है। पंजाब हरियाणा सीमा पर बाढ़ की मार तले आने वाले ज्यादातर क्षेत्र में कुछ ऐसा ही माहौल है।