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Thursday, 13 December 2012

कमजोर मानसून: पर धान की उपज सात फीसद ज्यादा


-धान का सीजन समाप्त, लिफ्टिंग मुकम्मल
-आपात स्थितियों में उत्पादन बढ़ता है: कृषि विशेषज्ञ
-उत्पादन की तुलना में किसान का खर्च ज्यादा बढ़ा: किसान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मानसून के दिनों में प्री मानसून के नाम पर जून में एक भी बारिश नहीं सर्वाधिक जरूरत व जोरदार मानसून वाले जुलाई महीने में हुई तीन से चार बारिश और कुल मिला कर कमजोर कहे जाने वाले मानसून के बावजूद धान की उपज बढ़ गई है। कम से कम पटियाला जिले में पिछले साल की तुलना में धान का उत्पादन बढ़ा है।
मंडियों में आए धान के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल के शानदार मानसून के खरीफ सीजन की तुलना में इस साल धान की उपज सात फीसद ज्यादा रही है। यही आंकड़े एक और दिलचस्प तथ्य उजागर कर रहे हैं। जिसके अनुसार देरी से बिजाई की जाने वाली बासमती किस्मों के उत्पादन को शामिल किया जाए तो कुल बढ़ोतरी दो फीसद ही रह जाती है। यानी बासमती अथवा इसके समतुल्य किस्मों का उत्पादन कम हुआ है।
जिले की 107 मंडियों में पिछले साल जहां 11 लाख 68 हजार 915 टन धान की आवक हुई थी वहीं इस साल इन्हीं पीआर किस्मों की आवक 12 लाख 51 हजार 666 टन धान आया है। जो पिछले साल से सात फीसद ज्यादा है। इसी प्रकार मंडियों में बासमती सहित आए कुल धान की आवक जहां पिछले साल 13 लाख 14 हजार टन रही थी वहीं इस साल ये बढ़कर 13 लाख 41 हजार 260 टन पर आ गई है।
मंडी बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि धान का सीजन अब लगभग समाप्त हो चुका है और मंडियों में से धान की लिफ्टिंग भी मुकम्मल हो चुकी है। संभव है कि एक, दो ट्राली आ जाए पर उम्मीद अब नहीं है।
दूसरी ओर कमजोर मानसून के बावजूद उत्पादन बढऩे के सवाल पर कृषि विशेषज्ञ डा. एएस मान कहते हैं कि आपात स्थितियों में उत्पादन बढ़ता है। पौधों का व्यवहार भी इंसान या अन्य जीवों की तरह होता है। जो खुद को खतरे में पाकर आबादी बढ़ाने लगते हैं। यह लंबे युद्ध अथवा अकाल जैसी  परिस्थितियों में देखा गया है। कृषि विशेषज्ञ कहते हैं कि पौधे के लिए मौसम उसके पक्ष में होने अथवा बारिश ठीक ठाक होने की स्थिति में वो फलता फूलता ज्यादा है। वेजीनेशन का आनंद लेने लग जाता है। उसकी लंबाई ज्यादा बढ़ती है पर बल्लियों में बीज पैदा नहीं होता। इस साल भी कुछ हालात ऐसे ही बने कि पौधे ज्यादा नहीं पनपे पर दाने ज्यादा बने हैं।
वहीं भारतीय किसान यूनियन के हरभजन सिंह कहते हैं कि सरकार उत्पादन बढऩे की बात तो करती है पर इसकी तुलना में किसान का खर्च ज्यादा बढ़ा है। उसका जिक्र नहीं करती। मौसम चाहे जैसा हो, सूखे की मार चाहे जितनी पड़े, किसान अपनी फसल को गहने बेच कर या उधारी लेकर पाल ही लेगा। ये भी उसके बच्चों के बारबर ही होती है। जिसे मरने नहीं दिया जा सकता, पर सूखे पर सरकार ने क्या किया?

Monday, 29 October 2012

धान की सरकारी खरीद का बायकाट किया कर्मियों ने

-राज्य सरकार की पांच खरीद एजेंसियों के कर्मियों की तालमेल कमेटी ने की घोषणा
-धान की संयुक्त कस्टडी की चली आ रही नीति का कर रहे हैं विरोध
-तीन को चंडीगढ़ में रैली कर करेंगे घोषणा और कैसे जता सकते हैं विरोध
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
एक अक्टूबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राज्य भर में शुरु होने वाली धान की  सरकारी खरीद का बायकाट करने की फील्ड कर्मियों ने घोषणा कर दी है। राज्य सरकार की पांच खरीद एजेंसियों मार्कफैड, पनग्रेन, पंजाब एग्रो, पनसप व वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के कर्मियों के संगठनों की तालमेल कमेटी ने शुक्रवार को यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उक्त घोषणा कर दी है।
कमेटी के प्रधान भुपिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक रोज पहले घोषित की गई धान नीति के विरोध में सरकारी खरीद करवाने वाले फील्ड इंस्पेक्टरों ने असहमति जताई है। ये कर्मी धान की शैलर मालिकों के साथ संयुक्त कस्टडी की चली आ रही नीति का विरोध करते आ रहे हैं। प्रधान भुपिंदर सिंह का कहना है कि जब कर्मियों के पास निजी शैलर में बंद पड़े धान की चौकीदारी अथवा सीधी निगरानी का कोई साधन ही नहीं है तो संयुक्त कस्टडी का कोई मतलब नहीं रह जाता। दूसरा पक्ष करोड़ों के चावल हजम कर जाता है और इलजाम कर्मियों पर बराबर का आता है। जबकि ऐसे धान पर कर्मी का सीधा नियंत्रण नहीं होता।
कमेटी का कहना है कि उन्हें एक अगस्त से 17 अगस्त तक ढुलाई का बायकाट करने के बाद लगातार आश्वस्त किया गया कि पिछली धान खरीद नीति बदली जाएगी और सिंगल कस्टडी दी जाएगी, लेकिन अंतिम दिन शैलर मालिकों के दवाब में नीति बदल दी गई। यह वही नीति है जिसके चलते कई हाल ही में भर्ती हुए इंस्पेक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं और कोई भी अपनी सेवा मुक्ति के लाभ के साथ रिटायर नहीं हो पा रहा। लगातार मामले दर्ज हो रहे हैं, जबकि उनका कोई कसूर नहीं है। विजीलेंस व पुलिस के हाथों कर्मी जलालत झेलते हैं, कई निलंबित चल रहे हैं। ऐसे में धान की खरीद कर मुसीबत मोल लेने का कोई मतलब नहीं रह जाता।
कमेटी के उप प्रधान विधुशेखर भारद्वाज, हरप्रीत सिंह चहल, महासचिव सर्वणजीत सिंह और वित्तय सचिव बलजीत सिंह गिल की मौजूदगी में यह भी कहा गया है कि तीन अक्टूबर को चंडीगढ़ में रैली कर अगली घोषणा भी की जाएगी कि और कैसे विरोध जता सकते हैं। इसमें गेहूं की ढुलाई का बायकाट और खाद आदि का प्रबंध करना शामिल है।


बायकाट के बीच धान की खरीद आज से
-13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद
- मौसम अनुकूल है पिछला रिकार्ड सुधरने की उम्मीद
फोटो: 17
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य में धान की 90 फीसद से ज्यादा सरकारी खरीद करने का जिम्मा रखने वाली प्रदेश सरकार की पांच खरीद एजेंसियों के फील्ड इंस्पेक्टरों की ओर से खरीद करने के बायकाट के बीच सरकारी खरीद सोमवार एक अक्टूबर से शुरु होने जा रही है। हालांकि शुरु में मंडियों में धान की आवक सुस्त रहने का अनुमान है। इसके एक सप्ताह बाद ही जोर पकडऩे का अनुमान जताया जा रहा है।
पहले सूखा और बाद में लगातार बारिश ने चाहे किसान की खेती लागत बढ़ा दी हो, पर कटाई के दिनों में खिली धूप ने किसान की यह उम्मीद भी जगा दी है कि उपज कम नहीं रहने वाली। मंडी बोर्ड की जिला ईकाई का अनुमान है कि इस बार जिले की 106 मंडियों में 13 लाख टन से ज्यादा धान आने की उम्मीद है।
जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि मौसम अनुकूल है। ऐसे में पिछला रिकार्ड सुधरने की पूरी उम्मीद बनी हुई है। जिले में धान की स्टोरेज के सवाल पर वे बताते हैं कि इसमें कोई दिक्कत नहीं है। जिले में 520 शैलर काम कर रहे हैं और इनमें धान स्टोर करने का पर्याप्त स्थान है। चूंकि धान की कस्टडी शैलर मालिकों के पास होती है और गेहूं-चावल की सरकार के गोदामों में ऐसे में धान के मामले में भण्डारण संबंधी कोई समस्या नहीं है।
पटियाला राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान और प्रदेश के महासचिव गुरदीप सिंह चीमा भी किए गए प्रबंधों से संतोष प्रकट करते हैं और कहते हैं कि स्टोरेज की कोई दिक्कत नहीं आने वाली। हालांकि  घोषित हुई धान नीति पर वे कहते हैं कि उनके पास अभी तक कापी नहीं आई है लेकिन बताया जा रहा है कि  पिछले साल अलाट किए गए धान में से 70 फीसद से कम धान की मिलिंग करने वाले शैलरों को इस साल धान अलाट ना किया जाए। इसके अलावा बैंक गारंटी संबधी भी कुछ बदलाव किए गए हैं। पिछले सालों की तुलना में बैंक गारंटी बढ़ाई गई है।
वहीं जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी डा. अंजुमन भास्कर बताती हैं कि धान का सीजन एक अक्टूबर से शुरु हो रहा है और सभी तैयारियां पूरी है। धान की एजेंसियों में बंटवारे क सवाल पर वे बताती हैं कि पंजाब एग्रो का हिस्सा 25 फीसद, पनग्रेन का 23, मार्कफैड का 22, पनसप को 11 फरीसद, वेयर हाउंसिंग कारपोरेशन को नौ फीसद और एफसीआई को दस फीसद की अलाटमेंट की गई है।
दूसरी ओर पांचों खरीद एजेंसियों के कर्मियों की तालमेल कमेटी के विधु शेखर भारद्वाज का कहना है कि सरकार की ओर से कर्मियों को कटघरे में खड़ा करने वाली धान की खरीद नीति का वे डट कर विरोध कर रहे हैं और अभी धान की खरीद का बायकाट किया है। इससे आगे की रणनीति का खुलासा तीन अक्टूबर को किया जाएगा।