Thursday, 21 October 2010

धरती के भगवान, बर्बादी से अंजान, बठिंडा में युवक के लिए धुआं बना यमदूत

भूपेश चट्ठा, पटियाला किसानों ने गेहूं की जल्द बिजाई के लिए इंसानों के साथ-साथ मित्र कीटों की हत्या शुरू कर दी है। किसान द्वारा पराली जलाए जाने से फैले धुएं से जहां वीरवार को बठिंडा में हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है वहीं इससे असंख्य मित्र कीट भी मर रहे हैं। कृषि विभाग पराली के प्रति किसानों को जागरुक करने के लिए हर साल कई कार्यक्रम आयोजित करता है लेकिन अभी तक किसानों ने पराली जलाने का रास्ता नहीं छोड़ा। किसानों द्वारा जलाई गई पराली के कारण मित्र कीट, एंटी फीड, मिली फीड, नाइट्रोजन फिक्सेशन बैक्टीरिया और केंचुए आग में जल जाते हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और हर साल पैदावार पर असर पड़ता है। सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के प्रवक्ता डा. पीपी खोसला का कहना है कि नाइट्रोजन फिक्सेशन बैक्टीरिया जमीन के दो इंच नीचे चलने वाली प्राकृतिक खाद फैक्टरी है जो कचरे को खाद में बदल देते हैं। उन्होंने कहा कि जमीन में दीमक का होना भी जरूरी है क्योंकि पिछली फसल की जड़ें यदि खत्म नहीं होंगी तो वह बंजर हो सकती है। दीमक पुरानी फसलों के इसी कचरे को ठिकाने लगता है फाइव एलीमेंट्स एंड एजुकेशनल हेल्थ सोसायटी के चेयरमैन डा. जोगेंद्र टाइगर का कहना है कि किसानों को बार-बार जागरुक किए जाने के बावजूद उन पर कोई असर नहीं पड़ रहा। यदि किसान विशेषज्ञों की राय पर अमल करें तो पैदावार के साथ-साथ पराली को बेच कर आर्थिक लाभ भी ले सकते हैं क्योंकि पराली का इस्तेमाल करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। अब तो पराली से बिजली उत्पादन भी शुरू हो गया है। किसानों को चाहिए कि अपने पुराने परंपरागत तरीके एक बार याद करें। बुजुर्गो की बातें सुनें और उन पर अमल करें तो ये खेत इंडस्ट्री के रूप में उनको आय देगा। वे कहते हैं कि मंडी में फसल फेंक कर आने की बजाय बेचने की बात सोची जानी चाहिए। फिरोजपुर स्थित सिविल अस्पातल के एसएमओ डाक्टर बलदेव अरोड़ा के मुताबिक जलती पराली से निकलने वाले धुएं से जहां वातावरण दूषित होता है वहीं यह कई प्रकार की बीमारियां फैलाने में अहम भूमिका निभाता है
जानलेवा बनी पराली की आग
बठिंडा : जिले के गांव बंबीहा में किसान द्वारा धान की पराली को लगाई आग एक युवक के लिए काल बन गई। आग से निकलते धुएं के कारण सड़क पर आ रही बस और मोटरसाइकिल की टक्कर हो जाने से युवक की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के अनुसार गांव बंबीहा के जगसीर सिंह का इकलौता लड़का सेवक सिंह गांव में लकड़ी के दरवाजे, खिड़की बनाता था। पड़ोस की एक महिला ने बुधवार शाम बताया कि उसका लड़का स्कूल से घर नहीं लौटा है। सेवक सिंह उसे ढूंढने अपनी मोटरसाइकिल से निकला। वह गांव से बाहर निकला ही था कि मुख्य सड़क पर धान के खेत में पराली को किसान ने आग लगाई हुई थी। इस वजह से पूरी सड़क धुएं से भरी थी। लिहाजा सेवक को सड़क पर सामने से आती बस नहीं दिखी और वह अपनी रफ्तार से सड़क पर वाहन चलाता गया। परिणामस्वरूप उसका वाहन तेज रफ्तार बस से टकरा गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बस ड्राइवर मौके से फरार हो गया। इसकी सूचना थाना संगत पुलिस को दी गई। पुलिस ने बस के ड्राइवर जसमेल सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। हादसे का कारण बने पराली को आग लगाने वाले किसान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा पराली जलाने पर पाबंदी लगाई हुई है

1 comment:

  1. bhupesh ji hmmara smaaj na jaanne kaun se 'baazaar ki lapet aut chpet mein aa chuka ya ki hmesha hi se aisa tha.Lalch aur swarth kuchh dashkon se itna zyaada badh gya hai ki shaq hone lag pdaa hai ki adhyattm aur dharm ki neevon par khdaa hmaara raashtr apni asmita apni dharti apne paani aur hwaa ko bchaa bhi paayega ki nahi.Aap ki ye report kisan uske laalachon ko bhi ujaagar karti hai jinki khatir wo apni kheti-virasat ko, apni wisdom ko bhool gai-zimmewaar hota ja rha, apni hi zameen ko kshati pahuncha rha jiske bhyankar parinaam aanaa shuru ho chuke.
    dhanyawaad.

    ReplyDelete