धान की पनीरी की रोपाई मशीनों प्रति सुस्त है किसान
नरेगा ने रोकी लैबर की आमद, शहर में दिहाड़ी भी बढ़ी
भूपेश चट्ठा, पटियाला : धान की रोपाई सीधे मशीन से कर मजदूरों की कमी पर पार पाने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने के पंजाब कृषि विभाग के प्रयासों में संभवत: किसानों की कोई खास दिलचस्पी नहीं है। हालांकि मजदूरी की तुलना में सस्ती पड़ने वाली मशीन से भी उन्हीं का फायदा है और उत्पादन बढ़ने से भी उन्ही को सीधा लाभ मिलेगा। आलम यह है कि कई ऐसे पूरे के पूरे ब्लाक हैं जहां किसानों ने न तो मशीन अभी तक देखी है और न ही इसमें कोई मतलब है। बात प्रोग्रेसिव किसानों कि करें तो भी परिणाम अच्छे नहीं आते। धर्मेड़ी गांव के किसान गुरप्रीत सिंह पंजाब हरियाणा सीमा पर स्थित उनके गांव में अभी तक किसी ने बात नहीं की है, लेबर की कमी है, इसका अनुभव बीते साल हो चुका है। पर हमारे किसान भाई पहले नहीं सोचते, आज भी कोई नाम लेवा नहीं है। जब सिर पर पड़ेगी, फिर हो हल्ला होगा। वे स्वयं स्वीकार करते हैं कि उन्होंने मशीन नहीं देखी न ही इस दिशा में कोई प्रयास ही किया है और उनके जैसे लोगों की संख्या खासी ज्यादा है। वहीं कृषि विशेषज्ञ डा. बाएस सोहल कहते हैं कि शहर में दिहाड़ी 200 के पार जा चुकी है। गांव में 130 रुपये आम है तो सीजन में यह 150 के पार होती है। मजदूरी ने मंहगाई के साथ ही बढ़ना है और इसे बढ़ते ही रहना है। बीते साल खेत में धान की रोपाई की मजदूरी प्रति एकड़ 1500 चली है। इस बार भी नहीं लगता कि नरेगा प्रभाव खत्म हो गया है। अनुमान है कि इस साल धान की रोपाई दो हजार पर आ जाए। ऐसे में मशीनों की ओर हमे ठीक वैसे ही रुख करना होगा जैसे हमने हल छोड़ कर ट्रैक्टर संभाल लिए। डा. सोहल कहते हैं कि जापान की एक कंपनी कम्बोटो पंजाब के खेतों में जा कर इस मशीन का प्रर्दशन कर भी रही है। लाख से डेढ़ लाख रुपये कि ये मशीने एक घंटे में दो से ढ़ाई एकड़ में रोपाई करने में सक्षम हैं। कुछ मशीने पूरी तरह से आटोमेटिक हैं तो कुछ के पीछे चलना पड़ता है, चार से आठ लाइनों में रोपाई करने वाली इन मशीनों के साथ कहां कैसे और कितनी गड़बड़ी हुई, आपरेट करने में जहां दिक्कत आई उसे भी किसानों को विभाग बता रहा है। रकबा बीते साल तो काफी कम था, लेकिन इसे लगातार बढ़ते रहना है।
क्या कहते हैं मुख्य कृषि अधिकारी
मशीन से धान की रोपाई करने से ठीक एक महीना पहले होने वाली धान की बिजाई की समझ खासी जरूरी है। धान की बिजाई यदि किसान एक समान तरीके से मैट पर करता है तभी मशीन का प्रयोग किया जा सकेगा, इसके लिए उचित जानकारी होनी जरूरी है। कृषि विभाग विभिन्न स्थानों पर शिविर लगा कर तकनीक को प्रदर्शित कर भी रहा है। पिछले कड़वे अनुभवों पर वह कहते हैं कि मशीनों में कोई खराबी नहीं थी, किसानों को ढ़ंग से पनीरी लगानी नहीं आ सकी इसी वजह से गड़बड़ी हुई। इसका समाधान किया जा रहा है। किसानों में लोकप्रियता पर वह कहते है कि जिले में तीन मशीनें चल रही है और इतने ही किसानों ने खरीदने की इच्छा जताई है। इस साल इनसे रोपाई का रकबा पांच हजार से ऊपर जा सकता है।
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