भूपेश चट्ठा, पटियाला
राज्य में तीन महीने पहले पंजाब और हरियाणा में आसमान से टपकी आफत से अब किसान को राहत मिल रही है क्योंकि किसानों को नुकसान का मुआवजा मिल चुका है। इस दौरान भूजल स्तर में सुधार किसानों को डिविडेंट के रूप में मिला है।
भूजल स्तर को नापने वाले प्रमुख किसान गुरप्रीत सिंह का कहना है कि धरती के नीचे, जो पानी 55 फुट नीचे से मिल रहा था, अब 53 फुट पर मिल रहा है। उनका कहना है कि अभी दो-तीन महीने रिसाव जारी रहेगा और भूजल स्तर में सुधार होगा।
धान की फसल को पांच से सात बार पानी की दरकार होती है और इस साल कई बार बीस मिलीमीटर से ज्यादा पानी एक ही दिन में बरसा है। ऐसे में नलकूप कम चले। कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस साल धरती रीचार्ज हुई या नहीं, यह तो अगले महीने ही पता चलेगा पर अच्छी बारिश ने यह जरूर तय कर दिया है कि हमने दोहन नहीं किया यही बचत है। वैसे इस क्षेत्र में रिसाव ज्यादा नहीं होता उस पर धान के लिए हुए 'कद्दू' ने धरातल को और ज्यादा पथरीला कर दिया। गिरते जलस्तर पर वे कहते हैं कि पटियाला जिले में ही पिछले दस सालों में औसतन 0.99 मीटर पानी नीचे की ओर खिसक रहा है। हाल ही के सालों में तो यह सवा मीटर के भी पार चला गया है। इस बार उम्मीद है कि यह औसत सुधरेगा जरूर।
पंजाब में पिछले साल खराब बारिश के बावजूद धान का रकबा 28.02 लाख हैक्टेयर था जबकि इस साल यह कम हो कर 27 लाख पर आ गया है। पंजाब में बर्बाद हुई और देरी से बिजाई वाली धान की फसल का आंकड़ा तीन लाख हैक्टेयर से कम नहीं है। ऐसे ही साथ लगती हरियाणा की सीमा पर दो लाख 59 हजार हैक्टेयर धान की फसल बर्बाद हुई है।
उधर सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड उत्तर क्षेत्र के आंकड़ों अनुसार 17 जिलों के 138 ब्लाक में औसतन 780 मिलीमीटर प्रतिवर्ष की बारिश होती है। पर 103 ब्लाक ओवर एक्सपलोएटिड, पांच क्रिटीकल और चार सेमी क्रिटीकल की श्रेणी में आ चुके है। दिलचस्प है कि इस बार बाढ़ की मार तले आने वाले जिलों में बारिश पंजाब के औसत के खासी नीचे रहती रही है। इनमें पटियाला का औसत 631 मिमी., संगरूर का 552 मिमी., लुधियाना का 681 मिमी., मोगा 463 मिमी., फिरोजपुर 437 मिमी., फतेहगढ़ साहिब 635 मिमी. और फरीदकोट का वार्षिक औसत 450 मिमी. है। और पंजाब के इन जिलों में ऐसा कोई भी नहीं है जहां इस बार सिर्फ मानसून तक एक हजार मिमी. का आंकड़ा परा ना किया हो, चंडीगढ़ से पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, लुधियाना, रोपड़ जैसे पंजाब के जिलों और हरियाणा के साथ लगते व बाढ़ प्रभावित अंबाला, कैथल में तो एक ही दिन में सौ से दो सौ मिमी. के रिकार्ड भी कायम हुए है।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_6810066.html
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