डैमेज चावल का प्रतिशत 4.75 से घटाकर तीन फीसदी करने से समस्या बढ़ी
चावल पर लेवी 75 फीसदी जबकि देर तक हुई बारिश से नमी काफी ज्यादा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
धान की खरीद में इस साल एफसीआई की कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही है। निजी व्यापारी भी खरीद करने में उतना उत्साह नहीं दिखा रहे हैं। धान खरीद के आंकड़े चाहे जो कहें और राज्य सरकार की खरीद एजेंसियों ने कितना भी जोर लगा रखा हो पर आंकड़े बता रहे हैं कि स्थिति सुधर नहीं रही है। मंडियों में अब तक आई फसल और बीते साल के आंकड़ों की तुलना बताती है कि इस बार एफसीआई ने मात्र 537 टन धान की खरीद जिले की 97 मंडियों में की है जबकि बीते साल यह आंकड़ा 16 गुना ज्यादा था। इसी प्रकार निजी क्षेत्र अब तक कुल खरीद में 3823 टन का योगदान दिया है जबकि पिछले साल पांच गुना ज्यादा 17 हजार 820 टन धान इस वर्ग ने खरीदा था। धान की कुल खरीद में भी कमी आई है पर ये उतनी नहीं है। जिले में अब तक बीते साल के चार लाख 48 हजार टन के मुकाबले इस साल तीन लाख 45 हजार टन की खरीद की गई है। इस सारे घालमेल पर आढ़ती एसोसिएशन पंजाब के महासचिव व जिला प्रधान जसविंदर सिंह राणा कहते हैं कि निजी व्यापारी अथवा शैलर मिलर इस बार सहमा हुआ है। सरकार ने डैमेज चावल का प्रतिशत 4.75 से कम कर तीन फीसदी कर दिया है और चावल पर लेवी 75 फीसदी रखी गई है। जबकि इस साल देर तक बारिश होने की वजह से नमी काफी अधिक आ रही है। ऐसे में चावल का टुकड़ा और ज्यादा आने की संभावना है। इसके तीन फीसदी से नीचे रहने की कम ही संभावना है। इस पर लेवी के 75 फीसदी पर होने और एफसीआई के पास स्टोरेज की कमी शैलर मालिकों को साफ दिख रही है। ऐसे में उन्हें ये भी लग रहा है कि मिलिंग के बाद एफसीआई ने चावल रखने में आना कानी करने पर ब्याज का भार उन्हीं पर पड़ेगा। दिलचस्प है कि खु़द एफसीआई की ओर से कम खरीद किए जाने के पीछे प्रदेश के महासचिव जसविंदर सिंह राणा कहते हैं कि कुछ साल पहले तक धान की स्पेसिफिकेशन में नमी का हिस्सा 18 फीसदी हु़आ करता था जिसे कम कर 17 फीसदी कर दिया गया। एफसीआई को पता है कि इन शर्तो पर मिलिंग करवाना खासा मुश्किल है। सो खरीद नहीं कर रही। वे आरोप लगाते हैं कि एफसीआई की नीतियों में हर तरफ ब्लैकमेलिंग की गुंजाइश छोड़ी गई है और इस केंद्रीय एजेंसी को छोड़ कर हर कोई फंसता है। चाहे वो मिलर हो या आढ़ती या फिर राज्य की खरीद एजेंसी का अधिकारी-कर्मचारी।
DHAAN Naal DHAN batorana hai...
ReplyDeletephir dhan dhan ho jayegi...
lol...