Wednesday, 13 October 2010

वन की जगह बसाए कंकरीट के जंगल

भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब के चिकित्सा क्षेत्र में चलते आ रहे गोलमाल की परतें सीबीआई ने एक बार क्या उधेड़नी शुरू की, हमाम में कई नंगे चमकने लगे हैं। गोलमाल कितने समय से चलता आ रहा है, यह भी सामने आने लगा है। सीबीआई की जांच में खुल रही कालेज की गुत्थी पर सामने आया कि बनूड़ के पास रामनगर की जिस जमीन पर ज्ञान सागर मेडिकल कालेज बनाया गया है, उसे वन क्षेत्र विकसित करने के नाम पर खरीदा गया था लेकिन अब दर्जनों एकड़ में फैली इसी जमीन पर कंकरीट के जंगल फैल गए हैं। जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि राज्य में पर्ल गोल्डन फारेस्ट (पीजीएफ) नाम की कंपनी का शानदार तरीके से उदय हुआ। कंपनी ने पंजाब व राज्य से बाहर भी लोगों से कृषि व वन क्षेत्र विकसित करने के नाम पर पैसे लिए और मोटी कमाई की। शुरू के दिनों में खूब नाम व पैसा कमाने वाली यह कंपनी जल्दी ही विवादों में आ गई। सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के पास शिकायत हुई और मामला दर्ज हो गया। इसी तरह की शिकायत पर एक मुकदमा विचाराधीन भी है, वहीं पीजीएफ के विवादों में आते ही कंपनी के मालिकों ने एक अन्य कंपनी बना चिट फंड से जुटाया पैसा ट्रांसफर कर दिया। पर्ल ने पंजाब एग्रीकल्चर कंपनी के नाम से बनाई पर्ल पीएसीएल पर पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। पैसे के अकाउंट बदलने का क्रम यहीं नहीं थमा। इस धन का बड़ा हिस्सा पंजाब इंफ्रास्टक्चर प्राइवेट लिमिटेड में तब्दील कर लिया गया। इसी पैसे का कुछ हिस्सा ज्ञान सागर चैरिटेबल एंड एजुकेशनल सोसाइटी के हिस्से में चला गया। कालेज बनाने के लिए ऐसे में उसी जमीन का प्रयोग कर लिया गया जिसे एक चिट फंड कंपनी ने वन क्षेत्र विकसित करने के लिए खरीदा था। यह एमसीआई की मूल शर्तो का उल्लंघन है। ऐसी स्थिति में कालेज की मान्यता पर भी सवाल खड़े होने तय है। वैसे सूत्र यह भी बताते हैं कि वन क्षेत्र के नाम पर यह अकेली जायदाद नहीं है जिस पर कंकरीट के जंगल बसाए गए हैं। रामनगर के अलावा मोहाली, लुधियाना, चंडीगढ़, जयपुर, बठिंडा, पुणे भी हैं जहां आवासीय कालोनी से लेकर होटल तक बने हैं। केंद्र की घोषणा से पंजाब में सांसें थमी पटियाला। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद की सोमवार की घोषणा ने पंजाब के मेडिकल एजुकेशन के छात्रों की सांसें अटका दी हैं। घोषणा के अनुसार हाल के ही के वर्षो में जिन कालेजों की सीटें बढ़ी हैं या जिन्होंने बढ़वाई हैं, उन सभी की नए सिरे से जांच होगी और गड़बड़ी पाए जाने पर मान्यता रद करने की घोषणा ने बीते तीन सालों में एडमिशन लेने वालों को बुरी तरह से डरा दिया है। याद रहे कि इसी अवधि में प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का विकास हुआ है। उधर, बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के वाइस चांसलर डा. एसएस गिल कहते हैं कि किसी भी कालेज को डी-रिकोग्नाइज नहीं किया जा रहा। यदि किसी परिस्थिति में ऐसा होता भी है तो ये छात्र यूनिवर्सिटी के हैं। हमारे पास छह अन्य कालेज भी है।

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