Wednesday, 13 October 2010

वहा रे किसान! पहले शिकायत, फिर हिमायत

भूपेश चट्ठा, पटियाला
बिजली बोर्ड के जमाने से कर्मचारियों व किसानों में भ्रष्टाचार व मारपीट का रिश्ता गर्मियों और धान के सीजन में कुछ ज्यादा ही गहरा हो जाता है। पहले तो किसान शिकायत करते हैं। जब कार्रवाई की बारी आती है तो वही अधिकारी या कर्मचारी उनका खास निकल आता है। उसे छोड़ने की हिमायत होने लगती है। इसका सबसे दिलचस्प पहलू मंगलवार को पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के साथ शिअद की अंतरराष्ट्रीय किसान विंग की बैठक में सामने आया। एक ओर जहां किसानों ने पावर कॉम के अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप यह कह कर लगाए कि पैसे के बिना कोई बात नहीं सुनता वहीं पावर कॉम प्रबंधन का स्पष्टीकरण भी कुछ कम नहीं था। पावर कॉम कहता है कि किसान प्रतिनिधिमंडल के रूप में आते हैं। शिकायत करते हैं और कई बार लिखकर भी दे जाते हैं, लेकिन जब जांच के बाद सजा की बात आती है तो वही किसान उसी अफसर का सबसे करीबी हिमायती हो जाता है। केस वापस लेने भी आ पहुंचते हैं। ऐसे में शिकायत करने वाले किसानों में जागने वाली दया की इस भावना के चलते भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो पाती। किसानों से धान के सीजन से पहले उनकी मुश्किलें सुनने और फीड बैक लेने को बुलाई गई बैठक में पावर कॉम के प्रबंधकों ने स्पष्ट किया कि सिस्टम ओवरलोड है। इसे दुरुस्त करने के प्रयास जारी हैं। ट्रांसफार्मरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है और नई लाइनें भी बिछाकर डी-लोड किया जा रहा है। सिस्टम इस बार फेल नहीं होगा इसकी इस साल कोई गारंटी तो नहीं दी जा सकती पर अगले साल तक यह सामान्य की तरह चलता रहेगा। बिजली की उपलब्धता पर वे कहते हैं कि मौसम पर बहुत कुछ निर्भर करता है। इसमें मानसून अहम है। यह ठीक रहा तो कट बहुत कम लगेंगें, हो सकता है न भी लगें। धान के सीजन में बिजली की खरीद से लेकर अन्य उपाय किए गए हैं। अनुमान है सबकुछ ठीक ही रहेगा। बैठक में पावर कॉम के मेंबर डिस्ट्रीब्यूशन इंजीनियर केडी चौधरी, प्रबंधकीय सदस्य गुरबचन सिंह बची, वीके गुप्ता, मुख्य आईआर आरपी पांडव ने भाग लिया। वहीं किसान संगठन के प्रतिनिधिमंडल में बूटा सिंह शादीपुर, राम सिंह, परमजीत सिंह, बलविंदर सिंह मलकपुर, हरजिंदर सिंह बल, जसपाल सिंह कवातरा, बलबीर सिंह उपली, सवर्ण सिंह रताखेड़ा, हरदयाल सिंह आदि मौजूद थे।

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