Wednesday, 13 October 2010

मुर्गे को अब गाय का बोवीन हार्मोन

भूपेश चट्ठा , पटियाला
दुधारू पशुओं के प्रजनन के लिए प्रतिबंधित आक्सीटोसीन के टीके लगाकर अधिक दूध प्राप्त करने की शिकायतों के बाद अब मुर्गो का वजन बढ़ाने के लिए उन्हें गाय से बनने वाला बोवीन हार्मोन दिया जाने लगा है। दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार या सरकारी निकायों के पास निजी पोल्ट्री फार्मो में मुर्गो को दी जाने वाली इन दवाओं को रोकने का कोई कानून अथवा नियम नहीं है। इसके चलते राज्य में अभी तक न तो कोई जांच हो पाई है, न ही कोई चालान काटा गया है। राज्य और राज्य के बाहर के पोल्ट्री फार्मो के मालिक जल्द कमाने के लिए मुर्गो पर एस्ट्रोजिन, टेस्ट्रोसिरोन तथा अन्य संबंधित कंपाउंडों का प्रयोग कर रहे हैं। इनसेउत्पन्न हार्मोन से मुर्गो का वजन पहले 10-12 दिनों में इतना बढ़ जाता है कि मुर्गा खुद अपना वजन नहीं उठा पाता। परिणामस्वरूप उसके जोड़ों से ब्लीडिंग होने लगती है। मुर्गो के खून के माध्यम से ये हार्मोस मांसाहारी लोगों के शरीर में जा मिलते हैं। प्रभावित होती है सेक्स क्षमता : महिला रोग विशेषज्ञ डा. मनजीत ने बताया कि इन दवाओं के अधिक मात्रा में सेवन से पुरुषों की सेक्स क्षमता में कमी आ जाती है, जबकि महिलाओं की प्रजनन क्षमता में कमी के साथ-साथ उनके शरीर पर बाल आने लगते हैं। सोशल साइंसेज तथा हेल्थ फोरम के डा. बलजीत सिंह बताते हैं कि चिकन खाने वालों का ब्लड पे्रशर एवं वजन बढ़ने लगता है। इसके संदर्भ में पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोल्ट्री फार्म स्थापित करने वाले व्यक्ति को आरंभ में ही सभी प्रकार की जानकारी दे दी जाती है। फीड के सैंपल प्रयोगशालाओं से पास होने के बाद ही फीड दी जाती है। जांच के अधिकार नहीं : डा. बलजीत सिंह के अनुसार, निजी पोल्ट्री फार्मो में मुर्गो को कौन से हार्मोस दिए जा रहे हैं, इसकी जांच का अधिकार पोल्ट्री इंस्पेक्टर के पास भी नहीं है। पटियाला के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का कहना है कि वह चिकन के बाजार में आने के बाद साफ-सफाई को ध्यान में रखकर बेचने के आदेश दे सकते हैं, लेकिन पोल्ट्री फार्मो की जांच करने के अधिकार उनके पास नहीं हैं। इस विषय पर नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डा. बांगा कहते हैं कि मुर्गो को दी जाने वाली इन दवाओं को रोकने का कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है। दुधारू पशुओं को प्रजनन के आक्सीटोसीन के टीके लगाने तथा बेचने पर प्रतिबंध जरूर है। वे हैं कि पशुपालन विभाग को ही अधिक जानकारी होती है सिविल स्वास्थ्य के महकमे को पशुओं के बारे में पता नहीं होता। राज्य में हर साल खाए जाते हैं 1200 करोड़ से अधिक मुर्गे : केवल पटियाला जोन के चार जिलों में ही, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 800 से अधिक पोल्ट्री फार्मों में 1.46 करोड़ से अधिक मुर्गे (चिकन) हैं तथा राज्य में 1200 करोड़ से अधिक मुर्गे प्रतिवर्ष खाए जा रहे हैं। वहीं, पोल्ट्री डाइग्नोटीशियन डा. नवदीप कहते हैं कि मुर्गो को कुछ एंटी-बायोटिक जरूर दिए जाते हैं लेकिन हार्मोस का पोल्ट्री फीड में काम नहीं है।

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