Wednesday, 13 October 2010

विविधीकरण वालों ने फूंकी ज्यादा नाड़

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
गेहूं-धान के फसली चक्र में किसी तरह से तीसरी फसल लेने का मादा रखने वाला मेहनतकश और जागरूक किसान ही आज पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। दैनिक जागरण की ओर से जुटाई जानकारी में सामने आया कि गेहूं के बाद और धान की फसल से पहले जिन किसानों ने मूंग के बाजार भाव 85 रुपये प्रति किलो देखकर एक-दो सप्ताह पहले मूंग की बिजाई की थी, वे ही नाड़ जलाने वालों में सबसे आगे रहे हैं। कोरजीवाला गांव की शैलर रोड के किनारे आधुनिक डेयरी फार्म चला रहे परविंदर सिंह बताते हैं कि आज किसान को सब पता है। अंजान नहीं है। फिर भी सफाई का मारा अपना ही नुकसान करने पर तुला है। पहले आग लगाकर अपना और अपने खेत का सत्यानाश करते हैं और फिर यूरिया और डाया जैसी खादें डाल जेब भी ढीली करते हैं। गेहूं के नाड़ से बनी तूड़ी वे इन दिनों में भी 350 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीद रहे हैं। फरवरी का महीना आते आते दाम 500 के पार हो जाते हैं। आंकड़ों की पृष्ठभूमि में वह कहते हैं कि एक एकड़ से 12-13 क्विंटल तूड़ी निकलती है। ऐसे में यह कमाई का जरिया भी हो सकती है। अपने पशुओं के लिए मक्की व चरी की खेती कर रहे बलबीर सिंह तर्क देते हैं कि गेहूं के बाद समय नहीं होता, इसलिए नाड़ जला देते हैं। हालांकि इससे बचा जा सकता है। यदि बेहतर ढंग से गेहूं की ही कटाई कर ली जाए। थोड़ी मेहनत हो जाए तो कमाई भी हो जाती है। पर मंहगा डीजल और मंहगी हो गई लेबर थोड़ा अडं़गा जरूर बनती है। ऐसे में लोग सिर्फ अपने घर में प्रयोग के लायक ही तूड़ी बनाते हैं और शेष को आग के हवाले कर देते हैं। वहीं फायर ब्रिगेड के आंकड़े बताते हैं कि पटियाला के आसपास के ही क्षेत्रों में इस साल रबी की फसल लेने के बाद जिले के विभिन्न हिस्सों में कुल 248 आग लगने की घटनाएं फायर ब्रिगेड के सामने आई। दिलचस्प है कि बीते माह 25 व 28 अप्रैल को 25 से 30 घटनाएं एक ही दिन में लगीं। कमजोर आधारभूत ढांचे के चलते फायर ब्रिगेड इनमें से पांच स्थानों पर ही आग बुझाने के लिए पहुंच सका। बिजली कटों के दौरान फायर ब्रिगेड के पास अपनी गाडि़यों में पानी भरने का कोई समाधान नहीं है। हालांकि पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड से बीते साल इसी सीजन में आग से मुआवजा लेने वालों की पूरे राज्य में संख्या 318 थी। इस साल बढ़ी घटनाओं के पीछे मौसम को भी बड़ा जिम्मेवार माना जा रहा है। मौसम में नमी के बजाय इस साल आंधियां चली हैं और पारा 44 के पार भी पहंुचा है।

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