उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के मुख्यालय को वीरवार को लगभग सभी तरह के प्रशासकीय प्रबंधों को नकारा साबित करते हुए और न्यायालय के आदेशों को धत्ता बता बेरोजगार लाईन मैन यूनियन ने पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा। यूनियन पावरकॉम में भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए विज्ञापन जारी करने की मांग कर रही है।
दिलचस्प है कि एक ओर जहां 42 सौ कर्मियों वाले पावरकॉम मुख्यालय में चेयरमैन से लेकर सुरक्षा गार्ड तक सभी खुद को असहाय महसूस कर रहा था वहीं यूनियन के कार्यकत्तरा सीना ताने घंटों भाषणबाजी करते रहे।
महर्षि वाल्मीकि के प्रकाश उत्सव पर आज सरकार की ओर से घोषित किए गए हाफ डे के पूरा होने से कुछ देर पहले करीब साढ़े 12 बजे यूनियन के कार्यकत्तराओं ने मुख्यालय के तीनों दरवाजों पर सोची समझी नीति के तहत ताले जड़ दिए। हालांकि पहले घोषित कार्यक्रम अनुसार आज से मरण व्रत शुरू किया जाना था।
इसी दौरान कर्मियों अधिकारियों ने जैसे ही डेढ़ बजे बाहर का रुख किया तो दरवाजे सील देख उच्च अधिकारियों से संपर्क साधा। बात सीएमडी तक पहुंची तो उन्होंने एसएसपी से बात की। विभागीय सूत्र बताते है कि इसके बाद मात्र एक डीएसपी और एक इंस्पेक्टर के साथ कुछ पुलिस वाले भेज दिए गए। इसी बीच एसडीएम ने भी अपनी ओर से ताले खुलवाने का प्रयास किया पर परिवारों सहित धरने पर पहुंचे यूनियन के लोग मुख्यमंत्री से नीचे किसी के साथ बैठक करने पर सहमत नहीं हुए। हालांकि बीते सप्ताह ही जिला प्रशासन ने धरने की जगह तय कर अपनी और से कारवाई पूरी कर दी। और आज यही प्रशासन पांच घंटे मूकदर्शक बना खुद को लाचार पा रहा था। वहीं प्रबंधन ने पहले धरने के खिलाफ कोर्ट से स्टे लिया और फिर कंटेम्ट भी दायर कर जिला प्रशासन को लिखा, इस पर भी कोई कार्यवाई होती नहीं दिखी।
महर्षि वाल्मीकि के प्रकाश उत्सव की पूर्व संध्या पर हाफ डे के चलते 42 सौ कर्मियों में से अधिकतर खाना नहीं लाए और कुछ ऐसा ही अनुमान कैंटीन के प्रबंधकों ने लगाया जिनके दूध-बिस्किट कुछ ही देर में समाप्त हो गए। ज्यादातर कर्मियों की स्थिति बंधकों सी हो कर रह गई। हालांकि जनरल कैटेगरी वेलफेयर ऐसोसिएशन के प्रधान जसवंत सिंह ने इस सब के बावजूद बेरोजगारों को नौकरी दिए जाने का समर्थन किया है।
दूसरी ओर शाम ठीक पांच बजे हुए समझौते पर यूनियन के महासचिव जगतार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री से सीएमडी की उपस्थिति में 27 अक्टूबर को बैठक होने पर उन्होंने ताले खोल दिए है और मांगें माने जाने तक संघर्ष जारी रहेगा।
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