पर्यावरण मीत कीट का दुश्मन बना इंसान
पर्यावरण में संतुलन रखने के अलावा मिट्टी को बनाता है सबसे अधिक उपजाऊ
भूपेश चट्ठा, पटियाला खेत-खलिहान को हमने इस कदर जहरीला बना दिया कि अब दीमक ने भी गांवों को छोड़ शहरों की ओर दौड़ लगा दी। आलम यह है कि अमृतसर में दीमकों की 6100 कालोनियों की पहचान कर, इन पर दवाएं छिड़क समाप्त किया जा रहा है तो पटियाला के ऐतिहासिक बारादरी बाग को बचाने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में बने प्रोजेक्ट की फाइल की तलाश शुरू हो गई है। पेस्ट कंट्रोल के नाम पर इस व्हाइट एंट (सफेद चींटी) को मारने के लिए बाजार में लाल चींटियों की बिक्री भी शुरू हो चुकी है। दो हजार रुपये के दो डिब्बे बाजार में बड़ी मांग लिए हुए हैं। खुदाई के दौरान मकान की नींव में इसे डाला जा रहा है। उधर पर्यावरणविदों ने भी दीमक के लिए लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। दीमक पर्यावरण में संतुलन रखने का फर्ज सदियों से बखूबी निभाता आया है। 500 ई.पू. महान गणितज्ञ व ज्योतिषि वराह मिहिर की वराहट संहिता में भूजल को तलाशने के विज्ञान की भी चर्चा है। इसमें बताया गया है कि दीमक की कालोनी के पूर्व की ओर मीठा पानी निकट होता है। इसके पास निश्चित रूप से होने वाले बड़े पेड़ से दक्षिण में 15 फीट पर कुआं खोदने की सलाह दी गई है। 99 से 100 फीसदी नमी अपनी कालोनी में रखने वाला दीमक यदि रेगिस्तान में एक साथ पांच दिख जाएं और बीच में चल रहा पूरी तरह से सफेद हो तो 412.5 फीट पर पानी है। राजस्थान में इसे आज भी पानी मिलने के शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। जुटाई गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 1996 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, दीमक की 2800 प्रजातियों को सात फैमिली में बांटा गया है। इनमें से दस फीसदी ही नुकसानदायक हैं, जो ज्यादातर आस्ट्रेलिया व अमेरिका में पाई जाती हैं। अफ्रीका व कर्नाटक के जंगल तो दीमक की ही देन बताए गए हैं। पर्यावरण में इसकी तुलना बायोरिएक्टर के रूप में अमेरिका में की जा रही है। कार्बन डाईआक्साइड व आक्सीजन में संतुलन रखने के अलावा प्राकृतिक मीथेन छोड़ने वाला सबसे बड़ा जीव है। एक कागज की शीट चटकर यह दो लीटर हाइड्रोजन पैदा करता है। यह फर्मेंटिग बैक्टीरिया भी पैदा करता है। हर तरह की लकड़ी, दस्तावेज, कपड़ा, चमड़ा, हड्डियां इत्यादि सबको री-साइकिल करने का काम भी करता है। कम्युनिटी मेडिसिन में एमडी डा. अमर सिंह आजाद सवाल करते हैं, जहां कि समस्या है, वहां की सरकारें इसे नष्ट करें। आस्ट्रेलिया की समस्या का इलाज अमृतसर पर क्यों थोपा जा रहा है? दीमक मृत लकड़ी खाता है, धरती के अंदर की जड़ें यदि दीमक न चट करे तो कुछ ही सालों में सिर्फ जड़ें रह जाएंगी, जो कोयला खदानों की सी होंगी, और उगेगा कुछ नहीं। खेती विरासत मिशन के कार्यकारी निदेशक उमेंद्र दत्त कहते हैं कि वह इस मामले को जल्द ही प्रशासन के सामने उठाएंगे। कोंकण जैसे क्षेत्रों में दीमक को देवी की तरह पूजा जाता है, दूसरी ओर पेस्ट कंट्रोल हो रहा है। दीमक मिट्टी की हालत केंचुए से भी कहीं अधिक दुरुस्त करता है। अगर आप खेत-खलिहान मारोगे तो यह शहर में आपके घर में ही घुसेगा। फाइव एलीमेंट हेल्थ एंड एजुकेशन सोसाइटी के जोगिंदर टाइगर बताते हैं कि धान पर छिड़की जाने वाला चायपत्ती रूपी जहर इतना खतरनाक है कि धरती के नीचे चलने वाली प्राकृतिक खाद की फैक्ट्री नष्ट की जा चुकी है। इसने चूहे व सांप नहीं छोड़े, दीमक केंचुए क्या चीज हैं।
रानी की होती है सल्तनत एक सामाजिक संगठन के रूप में रहने वाले दीमकों की कालोनियां होती हैं, जहां रानी दीमक रायल चैम्बर में रहती है तो कर्मी काम करते हैं। सिपाहियों का जिम्मा सुरक्षा व काम करवाने और अनुशासन में रखने का होता है। रानी की अपनी सल्तनत है तो वंशवृद्धि करने वालों की भी जिम्मेदारियां तय हैं। विकेंद्रीकरण पर आधारित ये स्वसंगठित होते हैं। जासूसी का नेटवर्क इतना तेज कि एक अकेली दीमक भोजन नहीं कर सकती। ऐसी हिमाकत करने पर मार दी जाती है।
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