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भूपेश चट्ठा, पटियाला : ..बिक जाएगा मिट्टी के मोल, खाक में मिल जाएंगे.. जैसे जुमले कुछ ऐसा दर्शातें हैं मानो इसका कोई मोल ही न हो पर आजकल रेत बजरी के बढ़े दामों ने इसे अनमोल बना दिया है। महंगे दामों में कालाबाजारी के रास्ते मिल रहा भवन निर्माण में काम आने वाला रेत बाजार से लगभग गायब है, कुछ माह पहले की तुलना में इसके दाम पांच गुणा महंगे हो गए हैं और अब हाल की बाढ़ ने इसकी तस्करी पर प्राकृतिक रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय की ओर से नदियों में से अवैध रूप से बेतरतीब ढंग से खनन कर इनके रास्ते बदल बाढ़ का कारण बनने व माफिया पर अंकुश लगाने के लिए राज्य की नदियों में से खनन करने पर लगाई रोक हालांकि हटा ली गई है पर अभी तक खनन शुरू नहीं हुआ है। दिलचस्प है कि तीन साल पहले तक नदियों में से रेत निकालने के ठेके हुआ करते थे तो भवन निर्माण में सबसे ज्यादा खपने वाला रेत 2007 में डेढ़ हजार रुपये प्रति ट्रक अथवा 350 वर्ग फुट पर मिल रहा था। कारोबार के जानकार हरजिंदर सिंह नीटू बताते हैं कि दाम कुछ महीने पहले तक पांच हजार के पार फिर भी नहीं हुए थे, पर अब तो सभी हदें पार हो गई हैं, दो महीने पहले यह दस हजार पर आया तो लगने लगा कि मानसून में क्या होगा और अब वही अंदेशा सही साबित हो रहा है। दाम 16 हजार पर हैं। पटियाला में रेलवे के संस्थान डीएमडब्लू व निगम में ठेकेदारी करते संजीव वालिया बताते हैं कि क्षेत्र में घग्गर के अलावा, जीरकपुर व कालका से धुला हुआ रेत आता है, यह घग्गर के रेत से 20 फीसदी महंगा रहता आया है, लेकिन पंजाब में प्रतिबंध लगने के बाद कालका (हरियाणा) से आने वाला रेत भी मंहगा हो गया है। 12 रुपये वर्ग फुट का रेत कब 40 पर आया पता ही नहीं चला। पंजाब में रेत अब हरियाणा के करनाल, इंद्री व यमुनानगर क्षेत्र से आ रहा है। बाहर से लाने पर ढुलाई, रायल्टी और सेल्स टैक्स बैरियर पर कटने वाली पर्ची इसे और महंगा बना रही है, लेकिन दाम इतने ज्यादा होंगे इसका अनुमान आम आदमी तो क्या ठेकेदारों को भी नहीं था, आज बिल्डर काम बंद कर रहे हैं, यही वजह है कि सीमेंट पांच रुपये थैला सस्ता हो गया है, गोदामों में सीमेंट रखने को जगह नहीं है और काम बंद हो रहे हैं। संजीव वालिया कहते हैं कि पहला झटका ईंट भट्ठों की लॉबिंग ने ईंटों दाम बढ़ा कर दे दिया, अब रेत दूसरा झटका दे रहा है काम पुराने रेट पर मिले हैं, ऐसे में बहुत मुश्किल हो रहा है। बीते साल सीमेंट से दुखी थे पर अब उल्टा हो रहा है। याद रहे कि बीते दिनों प्रतिबंध के बावजूद बरसात आने तक घग्गर में कालका से हनुमानगढ़ तक, मोगा, अमृतसर में रावी और ब्यास नदियों के अलावा पठानकोट, लुधियाना में खनन बदस्तूर जारी रहा और तस्करी के रास्ते काम चलता रहा। हालात अब ऐसे हैं कि लोग सुबह चुंगी नाकों पर रेत का इंतजार कर रहे होते हैं। वहीं माफिया ने बाढ़ के साथ बह कर आए रेत को खेतों से टै्रक्टर ट्रालियों की मदद से बाजार में लाना शुरू कर दिया है, लेकिन इसमें सिल्ट मौजूद है और भवन निर्माण के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता। उधर विभाग का हर अधिकारी अब कह रहा है कि मामला न्यायालय में था यही वजह थी कि दाम बढ़ रहे थे अब कुछ दिनों में भाव ठीक हो जाएंगे, जब खनन की नीलामी शुरू होगी।
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