सीधी बिजाई ने बाढ़ को भी दी मात
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_6725130_1.html
सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित पटियाला जिले में 1.40 लाख टन अधिक उत्पादन की उम्मीद
शुरू में दबी रही फसल ने शानदार बढ़त दिखा चौंकाया
भूपेश चट्ठा, पटियाला : धान की सीधी बिजाई करने वाले किसान बाढ़ के दिनों में खासे सहमे थे लेकिन अब बारिश अच्छी होने और कई क्षेत्रों में छह-सात दिन फसल के डूबे रहने के बावजूद फसल का खराब न होना और कटाई के निकट आने तक इसका फिर से उभर जाना किसान के लिए दोहरा लाभ देने वाला साबित हुआ है। पानी की शानदार बचत करने वाली और धरती में बरसाती पानी जाने के रास्ते में रुकावट न बनने के अलावा किसानों का लागत मूल्य खासा कम करने वाली धान की सीधी बिजाई ने एक तरह से बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा को भी सीधा कर दिया है। दिलचस्प है कि सीधी बिजाई करने वाले किसानों को पांच हजार प्रति एकड़ का मुआवजा भी मिल गया और फसल भी पुन: नहीं बीजनी पड़ी, जबकि इसकी तुलना में पनीरी लगाने वाले किसान हरियाणा के करनाल से अमृतसर तक महंगी पनीरी के लिए भटकते रहे और इन्हें एक बार फिर रोपाई करनी पड़ी। धर्मेड़ी के किसान गुरप्रीत सिंह बताते है कि खर्चे में कटौती इस तरीके से तय है, 15 सौ रुपये की पनीरी लगवाई नहीं देनी पड़ती, इसके अलावा खाद का उपयोग भी इस बार कम हुआ है। फसल की अवधि कम होने पर डीजल के खर्च में कमी को वे इससे नहीं जोड़ते। कहते है कि बारिश ने पेट भरे रखा ऐसे में डीजल की जरूरत नहीं पड़नी थी। पर्यावरण को लाभ इससे कितना हुआ इसपर वे भूमिगत जलस्तर पर ही रूक जाते हैं। वहीं मुख्य कृषि अधिकारी एससी खुराना कहते हैं कि शुरू में ऐसा लग जरूर रहा था कि धान की ये फसल कुछ कमजोर रह गई है लेकिन अब पूरी तरह से दुरूस्त है, किसी तरह की बीमारी भी नहीं लगी है। बाढ़ की मार तले आई इस तरह के धान की फसल तीन से चार दिन पानी में पूरी तरह से डूबी रहने के बावजूद अब बेहतरीन उपज देने जा रही है। अगले साल सीधी बिजाई के इस गुण को भी किसानों के सामने रखने के सवाल पर वे कहते हैं कि बाढ़ तो न ही आए तभी अच्छा है। पर सीधी बिजाई को पूरी तरह से बाढ़ प्रूफ होने का सर्टिफिकेट देने से वे फिलहाल हिचकते है। कहते है कि धान की फसल में पानी में डूबे रहने की क्षमता होती है। चूंकि सीधी बिजाई में पौधा जमीन से बीज के रास्ते जुड़ता है ऐसे में पनीरी की तुलना में पकड़ ज्यादा मजबूत रहती है। उधर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले पंजाब के पटियाला जिले के डिप्टी कमीश्नर दिपेंद्र सिंह कहते हैं कि इस साल पिछले साल की तुलना में1.30 लाख टन ज्यादा फसल होने की संभावना है। दो लाख 32 हजार हैक्टेयर में बिजाई हुई है, और 14 लाख 74 हजार टन उत्पादन होने की उम्मीद है।
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Pro Farmer!!
ReplyDeletePro Society!!
Plz, keep it up.