आम वेरायटियों को छोड़ किसान बासमती की ओर हुआ
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भूपेश चट्ठा, पटियाला पंजाब और हरियाणा में घग्गर नदी के दोनों ओर बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो अतिरिक्त पनीरी लगाकर हर साल बाढ़ का इंतजार करते हैं। उनका उद्देश्य होता है कि जब बाढ़ से खड़ी फसल खराब होगी तो उनका माल खुल कर लाभ देगा। लेकिन इस बार ये इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ जाने से उनकी पनीरी भी बह गई जिसकी वजह से पनीरी के दाम आसमान छूने लगे हैं। अब जबकि पनीरी लगाने का समय समाप्त हो रहा है, बाढ़ की मार झेल रहे किसान बाजार में पनीरी को इस तरह से तलाश रहे हैं जैसे कोई माता-पिता अपनी बेटी की शादी के लिए लड़के को तलाश रहे हों। देवीगढ़ ब्लाक में बाढ़ का पानी अभी पूरी तरह से नहीं उतरा परंतु किसान उत्तरी पंजाब के अमृतसर से लेकर हरियाणा के करनाल और सिरसा तक पनीरी की तलाश कर रहे हैं। घग्गर के किनारे पर अपनी आधी से ज्यादा फसल की तबाही देख चुके धर्मेड़ी के किसान गुरप्रीत सिंह कहते हैं कि एक हजार रुपये की पौध दो हजार के पार है। करनाल जिले के गांव से लाने पर जीप का किराया 1500 रुपये अलग से है। आजकल पनीरी उखड़वाने के भी छह सौ रुपये चार्ज हो रहे हैं। किसान की पसंदीदा वेरायटियां मिल भी नहीं रही, पूरी फसल बासमती की ही लगने जा रही है ऐसे में रिस्क भी बढ़ रहा है। मुख्य कृषि अधिकारी सुभाष खुराना किसान के विकल्पों पर कहते हैं कि अब बसमती ही अच्छा विकल्प रह गया है इसमें थोड़ा बदलाव चाहें तो आप पूसा-1121 लगा सकते हैं। पंजाब का किसान बीते दो सालों से इससे परिचित भी है। वैसे पूसा-370 व 386 भी बासमती की अन्य किस्में है। खुराना कहते है कि किसान अब सीधी बिजाई भी कर सकता है पर ये तभी हो सकता है जब पानी उतर जाए। फिलहाल हालात दिखते नहीं बनते। बाढ़ के बाद उपजे हालात पर वे कहते है कि आरंभिक अनुमानों अनुसार करीब एक लाख एकड़ फसल डूबी है, चालीस हजार एकड़ में से पानी उतर गया है, पर बीस हजार एकड़ ऐसी है जहां शायद धान की बिजाई ना हो सके, शेष चालीस में फिर से रोपाई करनी पड़ेगी। खुराना कहते है कि धान न लगा सकने वाला किसान मूंगी, तोरिया इत्यादि लगा सकता है। एंटोमोलोजिस्ट गुरदेव सिंह बताते है कि बासमती की किस्में 135 से 140 दिन लेती हैं, पनीरी न लगा कर सीधी बिजाई की जाए तो दस दिन का समय और बच जाता है। कम समय वाली किस्मों में सकंदपुरी बासमती सबसे बेहतर है। यह 90 से 100 दिन का समय लेती है। सिरसा जिले से इसकी खासी पनीरी लाई जा रही है। गुरदेव सिंह कहते है कि 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ की बासमत्ती की उपज 15 तक भी बढ़ जाती है। लेकिन दामों के मामले में यहां स्थिरता नहीं रहती ये दो से चार हजार रूपये प्रति क्विंटल के बीच झूलता रहता है। ऐसे में सुनिश्चित आय की तुलना में यहां उतार-चढ़ाव ज्यादा है।
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