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दो सौ गज से ऊपर मकान बनाना नहीं होगा आसान
नगर निगम के जनरल हाउस की अगली बैठक में 200 गज के हर निर्माण में लगाना होगा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम : कमिश्नर
भूपेश चट्ठा, पटियाला प्रदेश में इस समय सरकार अकाली-भाजपा गठबंधन की है तो इन्हीं की चलेगी, कांग्रेस की थी तो कांग्रेसियों की चलती थी इसमें कोई दो राय नहीं है, पर राजनीति से ऊपर रह अर्थव्यवस्था हर शासन में चलती रहती है। शायद यही वजह है कि राष्ट्रपिता की तस्वीर वाले नोट को देखकर हर कोई राजनीति से ऊपर उठकर विकास व आर्थिकता की बात करता है। कुछ ऐसे ही तौर तरीके अपना कर रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग के होने वाले आवश्यक उपायों को धत्ता बताया जा रहा है। सारे नियम कानून सिर्फ किताबों तक सिमटाते जाते रहे हैं। पटियाला शहर में अब तक जो हो गया सो हो गया पर अब एक प्रयास और होने जा रहा है, जो कम से कम कानूनी रूप से यह कहलवा देगा कि उत्तर भारत के सबसे कम प्रदूषण वाले शहरों में रहा यह शहर इस दिशा में भी काम करने लगा है। नगर निगम के कमिश्नर मंजीत सिंह नारंग ने बुधवार को इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को वे निगम के जरनल हाउस की अगली बैठक में कानूनी रूप से अनिवार्य करने जा रहे हैं। हर 200 गज के ऊपर के भवन निर्माण में इसकी व्यवस्था करनी होगी। नारंग कहते हैं कि अभी तक उनके पास कॉमर्शियल भवनों के नक्शे पास करवाने वाले तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रबंध कर आते हैं, लेकिन रिहायशी परिसरों के लिए लोगों में दिलचस्पी न के बराबर ही है। कानून भी पांच सौ गज से ऊपर जोर नहीं देता है। माना जा सकता है कि पर्यावरण संरक्षण की जरूरतों को देख कर कोई भी पार्षद इस पर ऐतराज न करे और 200 गज तक के मकानों को इसकी सीमा में लाए जाने का प्रस्ताव ध्वनि मत से ही पास हो जाए। एक बार नक्शा पास करवाने के बाद रेन वाटर टैंक के नक्शे से निकल कर बेसमेंट, गोदाम, पार्किंग और कभी कभी बैंकुएट हाल का हिस्सा बन जाने के सवाल पर कमिश्नर कहते हैं कि लोगों की मानसिकता बदलने में खासी परेशानी आ रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि इन चीजों का सबसे पहले व सीधा लाभ तो उसी व्यक्ति को है जिसने इन्हें बनवाया हो, पर अक्सर देखा गया है कि संबधित व्यक्ति ही नहीं समझ रहा होता। इसके लिए भी प्रयास होगा कि जागरूकता अभियान चलाया जाए। गौरतलब है कि प्रदेश में लुधियाना व जालंधर नगर निगमों की ओर से रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किए जाने के बाद पंजाब अर्बन डेवलपमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी (पूडा) भी अपने 1996 के भवन नियमों में बदलाव करने जा रही है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर कमिशन की ओर जारी हिदायतों के बाद से पटियाला व लुधियाना शहरों में किसी तरह के गहरे नलकूप नहीं खोदने की सिफारिश पांच साल पहले दी गई थी, पर यह सिलसिला दोनों जगह जारी है। पटियाला में अब नहरी पानी लाने की योजना आगे बढ़ने लगी है।
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