http://in.jagran.yahoo.com/epaper/article/index.php?page=article&choice=print_article&location=46&category=&articleid=87214673372008
1998 में बना कानून, पंजाब में पहली बार नगर परिषद पटियाला में 1999 में हुआ लागू
सरकार ने ही लिख भेजा कि शर्तें खासी कड़ी हैं, किसानों को इंसेंटिव देना ही ठीक
भूपेश चट्ठा, पटियाला पांच दरियाओं की धरती को कहीं आने वाली पीढि़यां रेगिस्तान के नाम से ही न जानने लगें इस बात पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) खासा संजीदा रहा है पर यही राजनीतिक दल एक दशक पहले तक कड़े कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों में सबसे आगे रहा है। विशेष रूप से कानून यदि वोट बैंक यानी किसानों को किसी भी तरह से प्रभावित करता हो। प्रदेश में भूजल का प्रयोग कैसे हो, कैसे इसे संजोया जाए और कैसे बचाया जाए जैसे मुद्दों को ध्यान में रख पंजाब स्टेट वाटर रिसोर्स कमेटी के मॉडल बिल पर आधारित ग्राउंड वाटर कंट्रोल (कंट्रोल एंड रेगुलेशन) एक्ट 1998 बनाया गया। दिलचस्प है कि कमेटी ने ही ड्राफ्ट को उपभोक्ताओं के लिए खासा कड़ा बताया। इस पर यह भी कहा गया कि यह बिल किसानों के हित में ज्यादा नहीं है, परामर्श दिया गया कि किसानों के लिए इंसेंटिव देने का सिस्टम ही बेहतर है। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र को सूचित किया कि भूजल पर नया विधेयक लाने से पहले सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा करने और पक्षों की सुनवाई के बाद ही लाया जाए। दिलचस्प है कि 1998 में एक्ट आने के साथ ही पटियाला नगर परिषद के तत्कालीन कमिश्नर केएस कंग ने इस पर 1999 में काम करते हुए शहर के पानी रुकने वाले आठ स्थानों का चयन किया। इसके बाद वहां 250 फिट गहरे बोर करवा कर इनमें तय मात्रा में मोटे पत्थर, फिर छोटे पत्थर, कोयला, कंक्रीट, बजरी इत्यादि की परतें बिछा कर विभिन्न सतहों पर फिल्टर लगाकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग करने के लिए कुएं खुदवाए। बताया जाता है कि केएस कंग इस मामले पर पटियाला में तो आलोचना का शिकार हुए पर अमृतसर में उन्हें सफलता हासिल हुई । पटियाला में ये कुंए दो से तीन सालों में ही रख रखाव के अभाव में दम तोड़ गए। वहीं, आज से सात आठ साल पहले नगर निगम की सत्ता पर विराजमान तत्कालीन मेयर विष्णु शर्मा कहते हैं कि जब आप जिम्मेदार पद पर बैठे हैं तो अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन किस तरह से करें यह खुद तय करना होता है इसके लिए आप इंतजार नहीं कर सकते। याद रहे कि विष्णु शर्मा के कार्यकाल में शहर में बरसाती पानी रुकने वाले चार दर्जन से अधिक स्थानों का चयन कर रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रोजेक्ट शुरू करवाया गया। मरम्मत के अभाव में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कुंए दम तोड़ते गए। पूर्व मेयर विष्णु शर्मा अपने समय की बातों को याद कर कहते हैं कि भूजल स्तर सभी क्षेत्रों में गिर रहा है, और बरसात का पानी हर साल सड़कें तोड़ता है, ऐसे में यदि आप उचित स्थान पर पानी ठिकाने लगा देते हैं तो प्रकृति में संतुलन लाने के साथ साथ आप लोगों को भी सुविधा दे रहे होते हैं। मरम्मत में निजीकरण के सवाल पर उनका कहना है कि बरसात से पहले एक बार की सफाई काफी होती है इसमें ज्यादा कुछ नहीं करना होता, लेकिन बात काम करने की है।
No comments:
Post a Comment