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शहर को चाहिए 95 कुएं और हर घर का योगदान
भूपेश चट्ठा, पटियाला : थोड़ी सी बारिश चाहे जिस मौसम में हो जाए शहर में दो दर्जन से ज्यादा ऐसे स्थान हैं जहां पानी ही पानी होता है और अगले दिन मीडिया में नगर निगम की पोल खुलने से लेकर, नालों की साफ सफाई के दावों की नकारात्मक हेड लाइनें स्थानीय प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही होती हैं, तो मेयर साहब रिक्शा पर चढ़ ऐसे क्षेत्रों का दौरा कर तस्वीरें भी खिंचवा रहे होते हैं सिलसिला नगर निगम बनने के पहले से चला आ रहा है। सिस्टम को दुरुस्त करने के एक दो प्रयास हुए, पर रखरखाव की कमी ने सब बराबर कर दिया। गौरतलब है कि शहर को सुनियोजित ढंग से पानी की मार से बचाने और एक गरीब के हैंडपंप में पानी साल भर बनाए रखने के लिए शहर को चाहिए 95 ग्राउंड वाटर रिचार्ज कुएं और हर घर से योगदान ऐसा होता है तो किसी को टुल्लू पंप से न तो चोरी छिपे पानी लेना पड़ेगा और न ही मंहगे सबमर्सिबल पंपों पर पैसा और बिजली फूंकनी पड़ेगी। ससटेनेबल अर्बन वाटर रिर्सोस मैनेजमेंट पॉलिसी पटियाला के नाम से आईआईटी रुड़की के आर्किटेक्ट एंड प्लानिंग विभाग के तीन वैज्ञानिकों रिसर्च स्कॉलर टीएस बराड़, एसोसिएट प्रोफेसर आरके जैन, यहीं के ही डब्लूआरडीएम विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डी. खारे के शोध में विस्तृत रूप से दर्शाया गया है कि पंजाब के साढ़े तीन लाख की आबादी के चौथे बड़े शहर में रोजाना 206.03 एमएलडी पानी की मांग है और 35 फीसदी विकास दर को देखते हुए यह 400 एमएलडी का आंकड़ा पार कर जाएगी। उल्लेखनीय है कि 1980 में 3.3 मीटर पर रहा भूजल 2004 में 24.9 मीटर तक गिर चुका है। शहर में सौ नलकूप सुबह शाम पानी खींच रहे हैं, यही पानी का एकमात्र साधन भी है। पानी पर खर्च हर साल 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। 90 सेमी की गति से जल स्तर हर साल नीचे को गिरता भी जा रहा है। शहर से 131.31 एमएलडी दूषित पानी बिना ट्रीटमेंट के बहता जा रहा है इसके 2021 तक 317 एमएलडी के पार होने की पूरी उम्मीद है। औसतन आठ सौ मिली मीटर सालाना की बारिश भी इसी खाते चढ़ रही है। शहर में चार मीटर डाया और छह मीटर गहराई के रिचार्ज कुएं खोद उनमें 300 मीटर की शाफ्ट लगा इनकी संख्या कॉमर्शियल क्षेत्रों में दस, सार्वजनिक क्षेत्रों में 30, स्र्कुलेशन में 50 और रीक्रिएशनल में पांच रखी गई है, इसके अलावा हर घर से योगदान के रूप में 300 मीटर की एक शाफ्ट पानी को जमीन में धकेलने लगानी होगी अन्यथा पटियाला को पानी से नहीं, पानी की पड़ेगी मार यह तय है। शोध पत्र शहर के सीवरेज सिस्टम को भी केंद्रीयकृत न रख कर इसे विकेंद्रीयकरण की ओर ले जाने की सलाह देता है। गैर परंपरागत तकनीकों का प्रयोग कर रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ग्राउंड वाटर रिचार्ज सिस्टम, डीसंेंट्रेलाइजड वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और री साइकलिंग ऑफ
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