बड़ी कंपनियों के जमीन खरीदने के बाद अब अर्बन एस्टेट बनाने के लिए किसानों को नोटिस
कंपनियों की खरीदारी के बाद आसपास की शेष जमीन को ग्रीन बेल्ट में डाला
नियमानुसार कंपनियों ने अपनी जमीन में से ग्रीन बेल्ट हिस्सा डालना था
भूपेश चट्ठा, पटियाला किसान हितैषी कही जाने वाली शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किसानों को ही झटका देते हुए कुराली रोड पर मुलांपुर गरीबदास गांव क्षेत्र में कुछ ऐसा किया कि बड़ी कंपनियों की जमीन पूरी तरह से कॉमर्शियल हो गई और किसान अपनी जमीन बेच नहीं सकता। दिलचस्प है कि इस क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट पास होने का सिलसिला पिछली कैप्टन अमरिंदर सरकार के शासनकाल में ही शुरू हो गया था पर अब वर्तमान सरकार ने सवा चार सौ एकड़ में अर्बन एस्टेट बनाने किसानों को नोटिस जारी कर दिए हैं। जिन किसानों की जमीन बच गई है वो अब ग्रीन बेल्ट का हिस्सा बना दिया गया है। पटियाला में एनजीओ चला रहे क्षेत्र के एक किसान जोगिंदर सिंह बताते हैं कि दो साल पहले रीयल एस्टेट क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों ने इस इलाके में जमीन खरीदनी शुरू की थी तब तक किसी को ग्रीन बेल्ट के बारे में कुछ नहीं पता था, जिंदगी और व्यापार आम चल रहा था, फिर पंजाब सरकार की ओर से सिंगापुर की एक कंपनी से टाउन प्लानिंग का सर्वे करवाया गया तो चर्चा होने लगी। दिलचस्प है कि कंट्री प्लानिंग से वर्ष 2008 में मास्टर प्लान बनाए जाने तक कंपनियों ने जी भर कर टोडामाजरा, सलामतपुर, कंसाला और रसूलपुर में जमीनें खरीदी। इसके बाद मुल्लांपुर, रतवाड़ा और फिरोजपुर गांवों में किसानों की काफी जमीन लेने के बाद 19 नवंबर 2008 को इस क्षेत्र को नोटिफाइड घोषित कर दिया गया। अब सरकार भी इसी क्षेत्र में अर्बन एस्टेट बनाने की तैयारी में है और किसान की जमीन अधिग्रहण करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। सरकार मुल्लांपुर गरीबदास में अर्बन एस्टेट बनाने जा रही है। इसके लिए मई महीनों से किसानों को जमीन अधिग्रहण करने के नोटिस थमाने शुरू कर दिए हैं। इतना ही नहीं, पूरे क्षेत्र के ठीक मध्य में अर्बन एस्टेट बनेगी तो इसके आस पास बड़ी कंपनियों की हाउसिंग कॉम्पलेक्स होंगे और इसके किनारों पर कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स वो भी इन्हीं कंपनियों के और अंत में तीसरे घेरे पर किसानों की शेष बची जमीन को ग्रीन बेल्ट में डाल दिया गया है। अब किसान चाह कर भी अपनी यह जमीन न तो बेच सकता और न ही यहां पर कुछ बना सकता है, जबकि नियमानुसार कंपनियों ने अपनी खरीदी जमीन में से ग्रीन बेल्ट छोड़नी थी और ऐसा संभावित रूप से सरकार की ओर से भी किया जाना है। वहीं पंजाब अर्बन डेवलपमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी के अधिकारी कहते हैं कि अब ये क्षेत्र उसके अधिकार में नहीं है। पूडा कहती है कि ये गमाडा का कार्यक्षेत्र है। इसके मुख्य प्रशासक विकास प्रताप सिंह कहते हैं कि मुल्लांपुर में सवा चार सौ एकड़ में अर्बन एस्टेट बन रही है। निजी क्षेत्र में भी औमेक्स की 100 एकड़ की योजना है। एमजीएफ कंपनी की भी एक योजना है। निजी कंपनियों ने कुल कितनी जमीन खरीदी यह तो बताना मुश्किल है। लेकिन मास्टर प्लान सरकार ने सभी पक्षों की सुनवाई कर बनाया है। किसानों की जमीन ग्रीन बेल्ट में जाने के सवाल पर वे कहते हैं कि नदी का उत्तरी हिस्सा और पहाडि़यों की तलहटी की जमीन के अलावा थोड़ी जमीन डाली गई है लेकिन यह जरूरी भी था। दूसरी ओर, सूत्र कहते हैं कि राजस्व रिकार्ड में नदी कहीं और बह रही है, जबकि टाउन प्लानिंग के नक्शे में यह किसानों के खेतों में दिखा दी गई है। याद रहे कि सरकार ने डीटीपी (एस) 1991/ 2008 के तहत नोटीफाइड कर उसे अधिकृत किया है, जबकि अब नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस संदर्भ में सचिव हाउसिंग एसएस संधू भी मुख्य सचिव व उप मुख्यमंत्री के साथ बैठकों के चलते प्रतिक्रिया नहीं दे सके।
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