Wednesday, 29 September 2010
mansoon effect धान में नमी बढ़ी, दाम घटे
भूपेश चट्ठा, पटियाला : गिरे हुए तापमान और मौसम में मौजूद नमी किसानों को खेतों के बाहर मंडियों में भी झटका देने को तैयार हो रही है। केंद्र सरकार की ओर से धान की खरीद के तय किए गए मापदंड के अनुसार किसान की उपज में नमी 17 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जबकि मौसम किसी भी हालत में निर्धारित की गई इस सीमा के आस-पास भी नमी को टिकने नहीं दे रहा। मंडियों में आए अब तक के धान में नमी की मात्रा 20 फीसदी के ऊपर ही बनी हुई है। ऐसे में दाम 80 रुपये गिर कर पिछले साल के न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) 950 रुपये पर आ गए है। बुधवार को इक्का-दुक्का ढेरी 1030 रुपये पर भी बिकी है। राज्य सरकार की खरीद एजेंसियों और फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया(एफसीआई) ने एमएसपी पर अभी खरीद शुरू नहीं की है। एमएसपी पर होने वाली खरीद संभावित रूप से पहली अक्टूबर से होगी। जिला मंडी बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि कुल 97 मंडियों में खरीद प्रबंध किए गए हैं, लेकिन फिलहाल पटियाला, नाभा, समाना, सन्नौर रोड, भादसों व राजपु़रा जैसी बड़ी मंडियों में ही आवक शुरू हु़ई है। वह भी रुक रुक कर हो रही है। इन मंडियों में कुल धान की आवक 1062 टन हो चुकी है। हालांकि पिछले साल आज के दिन तक मात्र 1495 टन धान की ही आवक हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि बीते साल इन दिनों मौसम के शुष्क होने के बावजूद आवक कम थी और इस बार दो रोज पहले हुई बारिश के बावजूद दोगुना धान आ चुका है, लेकिन इसमें से 360 टन मंडियों में ही सुखाया जा रहा है, इसकी खरीद नहीं हुई है। अधिकारी बताते हैं कि केवल निजी खरीद हो रही है। एमएसपी से 80 रुपये कम 950 रुपये प्रति क्विंटल के दाम अगेती किस्मों के दिए जा रहे हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि इसे आप गोविंदा या सट्ठी नहीं कह सकते। ये आम वेरायटियां हैं जिन्हें कुछ दिन पहले लगाया गया होगा। मंडियों में दाम पर अधिकारी कहते हैं कि साधारण धान के दाम एमएसपी के अनुसार एक हजार रुपये प्रति क्विंटल हैं तो सुपर फाइन अथवा ए ग्रेड किस्मों के दाम 1030 रुपये प्रति क्विंटल रखे गए हैं। पर ये मूल्य पहली अक्टूबर के बाद सरकारी खरीद के बाद ही मिलेगा। ऐसे में किसानों को भी सलाह दी जाती है कि वे मौसम के पूरी तरह से साफ होने और धान के सूखने के बाद ही मंडियों में लाएं।
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