Thursday, 16 September 2010

harmful trend in punjab

चोट मे खोट दुश्मनी पक्की
पंजाब एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सीकोलॉजी के डाक्टरों के सर्वेक्षण में हुआ खुलासा
21 से 40 की उम्र में शहरियों से ग्रामीणों की संख्या छह गुणा
http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=47&edition=2010-08-24&pageno=3#
भूपेश चट्ठा, पटियाला पंजाब में दुश्मनी निकालने में खुद को चोट पहुंचाने से भी गुरेज नहीं किया जा रहा है। आमने-सामने की लड़ाई में चाहे पिट जाएं, पर कानून का ही आपरेशन कर न केवल अपना बचाव किया जा रहा है, बल्कि 26 फीसदी मामलों में तो सीधे-सीधे खुद को थोड़ा नुकसान पहुंचा सामने वाले को संगीन धाराओं में लपेटा भी जा रहा है। पंजाब एकेडमी ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सीकोलॉजी के डाक्टरों के सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि कैसे पूरी तरह से अपने ही ऊपर वार कर अथवा करवा कर केस बनवाने लायक चोट लगा ली जाती है। जीजीएस मेडिकल कालेज में आए इंज्यूरी के 200 मामलों में 26 फीसदी या तो पूरी तरह से ही खुद बनाए हुए थे अथवा उन्हें काफी हद तक संदिग्ध रूप में रखा जा सकता है। सर्वेक्षण में पाया गया कि इस तरह के ज्यादातर दर्ज होने वाले मामले मारपीट और 21 से 40 साल की उम्र के बीच वालों के ही हैं। पुरुषों में इनकी संख्या महिलाओं की तुलना में पांच गुणा ज्यादा है। इतना ही नहीं, कम पढ़े-लिखे समझे जाने वाले अथवा कम जागरूक कहा जाने वाला ग्रामीण वर्ग इस तरह का लाभ लेने वाले शहरियों से एक के अनुपात में छह की दर से आगे है। पटियाला में हाल ही में ऐसे केस बनाने वाले गिरोह के पकड़े जाने के बाद विजीलेंस को सौंपी गई इस रिपोर्ट पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट डा. डीएस भुल्लर बताते हैं कि डाक्टरों को पूरी जानकारी होती है कि चोट कैसे लगी है पर वे कानूनी रूप से नहीं बोल सकते, यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वह कहते हैं कि इस दिशा में उनके प्रयासों के बाद जांच तो शुरू हो गई, पर परिणाम आने में हो रही देरी न्याय को दूर करती जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में ऐसे लोगों को तीन तरह के गुनाह करने पर अलग-अलग धाराओं के अधीन गिरफ्त में लिया जाना चाहिए। इनमें खुद को नुकसान पहंुचाना, झूठी सूचना देना और गलत आरोप लगाना शामिल है। लेकिन ये सब कुछ कानून में संशोधन के बाद ही संभव है। एकेडमी के प्रधान डा. भुल्लर कहते हैं कि पटियाला में पकड़े गए गिरोह संबंधी मामले में फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम का गठन किया जाए और तह तक जाने के लिए एक अलग उच्च स्तरीय टीम बनाई जाए।


एक से पचास हजार में लगाया जाता है कट
जासं, लुधियाना : अपनी दुश्मनी निकालने के लिए कट लगाने के मामले ने एक बड़े धंधे का रूप ले लिया है और इस काम के लिए लोग एक हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक लेते हैं। दो हजार रुपये लेकर ये लोग किसी पक्ष को मामूली कट लगाकर सिविल अस्पताल के अंदर भेज देते हैं। अगर किसी पक्ष ने अपनी बड़ी दुश्मनी निकालनी हो तो 40 से 50 हजार रुपये में हड्डी भी काट देते हैं। इसके लिए कट लगाने वाले गिरोह के सदस्य काफी माहिर हैं। वे किसी के भी हाथ, उंगली या पांव में टीके लगाकर उसे सुन्न कर देते हैं। उसके बाद एक तेजधार हथियार से उसकी हड्डी काटने के बाद सिविल अस्पातल या निजी अस्पताल में तुरंत दाखिल करवा देते हैं, ताकि दूसरे पक्ष पर गैरजमानती धारा से पर्चा दर्ज करवाया जा सके। इस काम के लिए कई दलाल सिविल अस्पताल के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं। झगड़े के बाद सिविल अस्पताल पहुंचे एक पक्ष को कोई चोट नहीं लगी होती तो कट लगाने वाले दलाल उन्हें कट लगवाकर एमएलआर कटवा देते हैं। लोगों को मालूम है कि अगर वे किसी को मारकर घायल करेंगे तो उनके खिलाफ पुलिस मामला दर्ज कर जेल भेज देगी। इसलिए कुछ लोग झगड़े के बाद दलालों की मदद से खुद को कट लगवा घायल हो जाते हैं और उसके बाद मनचाहा एमएलआर कटवा लेते हैं। इसके लिए सिविल अस्पताल के पास घूम रहे दलाल बड़ी कीमत लेते हैं। आपसी रंजिश व अन्य झगड़ों में पुलिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दूसरे पक्ष पर केस दर्ज करती है। अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा चोट लगी हो तो दूसरे पक्ष पर गैरजमानती धाराएं भी पुलिस लगा देती है। इसमें यदि किसी ने कोई हमला नहीं किया होता तब भी उसे जेल जाना पड़ता है।
स्वास्थ्य मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा है कि यदि कोई इस तरह का मामला सामने आता है तो उसकी जिम्मेदारी एसएमओ की होगी और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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