Thursday, 16 September 2010

औने-पौने दाम पर लुटा दी संपदा

प्रदेश में रेत व बजरी से हो सकती थी शराब के ठेकों के समान आय
एक हजार करोड़ रुपये के ठेके मात्र कुछ दर्जन करोड़ में निपटाए गए
सामूहिक बोली के चलते सिर्फ बड़े ठेकेदार ही सामने आये
फिर कहोगे शराब सस्ती करने रेता महंगा कर दिया कहा मंत्री ने
भूपेश चट्ठा, पटियाला पंजाब के पास किसी तरह के प्राकृतिक संसाधनों विशेष रूप से खनिज संपदा के नाम पर पानी का नाम ही आता है और नदियों से निकलने वाली रेत-बजरी इसके बॉय प्रोडक्ट हैं। पंजाब में रेता कितना कीमती है इसका अनुमान हाल ही में उच्च न्यायालय की ओर से माफियाओं के कब्जे से इसे छुड़वाने लगाए प्रतिबंध के बाद हरियाणा-दिल्ली तक को इसका अहसास हो गया, जब यह मारबल के दामों से ऊपर और सीमेंट के छठे हिस्से के बराबर आ गया। लेकिन प्रदेश में यह संपदा औने-पौने पर नीलाम कर दी गई। इतना ही नहीं नदियों विशेष रूप से प्रदेश के लगभग आधे जिलों में से निकलने वाली सतलुज नदी के रेत बजरी के ठेकों की सामूहिक नीलामी कर दी गई, जबकि पंचायती कानून के अनुसार ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में बोली करवाने का हक है, और इससे प्राप्त आय का प्रयोग पंचायत अपनी जरूरतों अनुसार कर सकती है। लेकिन इस बार बोली इंडस्ट्री विभाग ने करवाई। विभाग के ही एक अधिकारी गोपनीयता की शर्त पर बताते हैं कि यदि यह बोली जिले के आधार पर सामूहिक ना हो कर हर गांव के अपने क्षेत्र के आधार पर होती तो ये आंकड़ा एक दर्जन करोड़ न होकर एक हजार करोड़ रुपये का होता। बाजार के दामों के अनुमान के आधार पर आरोप यह भी है कि यह कारोबार शराब व आबकारी से कम नहीं है। शराब के ठेकों के समान आय देने वाले इस कारोबार पर माफिया की गिरफ्त कितनी है इस बात का अंदाज उच्च न्यायालय को है संभवत: यही वजह रही होगी कि न्यायालय ने माफियाओं के शिकंजे से इसे बाहर निकालने की टिप्पणी सहित सरकार से पुराने सभी ठेके रद्द कर नए सिरे से बोली करवाने को कहा और तब तक खनन पर भी रोक लगा दी। यदि किन्हीं तकनीकी कारणों से यदि इंडस्ट्री विभाग यह बोली करवाता है तो संबधित पंचायत को रायल्टी देनी होती है। सामूहिक बोली के चलते पंचायतों का हक भी छीना गया। पूरे जिले की बोली की वजह से बड़े ठेकेदार ही आगे आ सके, जबकि हाईकोर्ट ने माफियाओं की वजह से ही रेता बजरी निकालने पर रोक लगा सरकार को पुन: नए सिरे से बोली करवाने के आदेश दिए थे। दिलचस्प है कि पंजाब का सत्ताधारी गठबंधन जिस रिपेरियन लॉ का हवाला देता आया है वह भी यही कहता कि जिस नदी के पानी से मानसून अथवा बाढ़ में जिस गांव का नुकसान हो रहा है, लाभ भी उसी को मिलना चाहिए

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