Tuesday, 15 March 2011

अपणे पंजाब दे 42 पिंड सोफी होए


-72 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा हमारे यहां ठेका बंद हो
-अगले साल भी नीलामी में नहीं होंगे शामिल ये गांव बशर्ते...
भूपेश चट्ठा, पटियाला
अपणा पंजाब होवे, मूली नाल गंडा होवे बाण वाला मंजा होवे...गुरूदास मान का यह लोकप्रिय हिट संभावित रूप से प्रदेश के 42 गांव सोफी हो गए है और इनमें इसे कुछ इस तरह से गाया जाएगा 'अपणा पंजाब होवे ऐथे ना शराब होवे नानक दी बाणी होवे मर्दाने दा रबाब होवेÓ।
प्रदेश के आबकारी विभाग ने 72 गांवों की पंचायतों की ओर से उनके गांवों में शराब ठेके बंद किए जाने के प्रस्ताव में से 30 को रद्द भी कर दिया है जबकि शेष पंचायतों का  उनके यहां शराब का ठेका ना खोला जाने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है।
इनमें से सर्वाधिक पंचायतें संगरूर जिले की हैं। हालांकि इस जिले से 44 पंचायतों ने आवेदन किए थे लेकिन इनमें से 24 की ही याचिका को मंजूरी दी गई है। चार साल पहले जन प्रतिनिधि अधिकारों का उपयोग  नशे के खिलाफ शुरू हुआ लेकिन आज भी प्रदेश में मालवा को छोड़ अन्य क्षेत्रों माझा-दोआब के लोगों ने कम ही दिलचस्पी दिखाई है। बीते साल की संख्या 55 से इस साल आवेदन करने वाली पंचायतें बढ़ कर मात्र 72 ही हो पाई है।
दिलचस्प है कि आबकारी नीति आने से पहले विभाग ने इन पंचायतों के प्रतिनिधियों को बुलवा कर सुनवाई भी की है कि आखिर उन्हें 'एतराज क्या है?Ó, 'हर्ज ही क्या है?Ó यह भी जांचा गया कि कहीं उनके गांव में अवैध शराब पकड़े अथवा बिकने के मामले तो नहीं आए है।
याद रहे कि पंजाब का डोमोसाइल बनते ही पैग के साथ नाता या तो जुड़ जाता है या फिर जोड़ दिया जाता है और आबकारी आयुक्त के मुख्यालय वाले शहर पटियाला में यह नाता कुछ ज्यादा ही गहरा और करीब का है। एक ओर जहां गांव की पंचायतों में शराब के ठेके बंद करवाने प्रति जागरूकता बढ़ी है वहीं विभाग ने भी 'गहराई से छानबीनÓ की है कि कहीं इस सादगी के पीछे अफीम तस्करों या अवैध शराब बेचने वालों का हाथ तो नहीं है। बीते साल विभिन्न तर्क दे कर आवेदन रद्द हुए तो इस बार पंचायतें हाई कोर्ट तक दस्तक देने को तैयार रही।
 संगरूर के ही एडवोकेट कमल आनंद बताते है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत गांव की पंचायत प्रस्ताव पारित करे तो गांव में से ठेका हटाया जा सकता है या फिर खुलने से ही रोका जा सकता है। पर ज्यादातर को पता ही नहीं है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों को क्या अधिकार है।
उधर आबकारी विभाग के अधिकारी पुष्टि कर कहते है कि इन 42 गांवों में ठेके इस साल नहीं खुलेंगे और संभावित रूप से अगले साल भी इन्हें शराब ठेकों की नीलामी प्रक्रिया में शामिल ना किया जाए बशर्ते इन गावों में शराब का अवैध कारोबार अपने इतिहास के समान ही रहे।

Sunday, 13 March 2011

डबलरोल: नदी-नहर किनारे सड़क, बाढ़-ट्रैफिक दोनों नियंत्रित after flood, river ghagger, road, toll tex, traffic


-मुगलकाल से रियासती काल तक होता रहा है सदुपयोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मेट्रो शहरों के बाद देश में सबसे सघन सड़क यातायात वाले पंजाब की सड़कों पर बढ़ रही वाहनों की संख्या, हर पांच-सात साल में सड़क चौड़ी करने को मजबूर कर रही है। परिणामस्वरूप किसान की जमीन या तो छिनती है या बंट जाती है। पंजाब का खेत लगातार छोटा होता जा रहा है पर ट्रैफिक समस्या से फिर भी बनी हुई, ऐसे में अब नदी-नहरों के सड़के बना दोहरा लाभ लिया जाएगा। एक ओर पक्के किनारे बाढ़ नियंत्रित करेंगे और बिना जमीन अधिग्रहण किए ट्रैफिक नियंत्रित भी हो जाएगा।
दिलचस्प है कि मुगलकाल से रियासती काल और फिर अंग्रेजी शासन में दरिया के किनारों का प्रयोग तो इस तरह से नहीं हुआ अलबत्ता कच्चे-पक्के सूए से नहरों तक सभी की योजना कुछ इसी तरह ही बनती रही है पर आजादी के बाद यह सीमित हो गया। ड्रैनेज विभाग के ही वरिष्ठ अधिकारी बताते है कि पिछली सरकार की ओर राज्य की 107 सड़कों पर टोल टैक्स लगाए जाने के बाद इस ओर सोचना शुरू किया गया। राष्ट्रीय मार्गो पर लगे टोल टैक्स इससे अलग है। जमीन अधिग्रहण आर्थिक व राजनीतिक रूप से  मंहगा साबित होने लगा है।
राज्य में चंडीगढ़ से अंबाला की ओर जाने डेराबस्सी और जीरकपुर के बीच से घग्गर किनारे शंभू के आगे आसानी से मिला जा सकता है। ऐसे ही हाई-वे पर भीड़ कम करने आसान व छोटे रास्तों में भाखड़ा नहर के अलावा, एसवाईएल और सरहिंद फीडर को भी लिया जा सकता है। घन्नौर से अंबाला तक ऐसी ही सड़क चल रही है तो पटियाला से समाना तक का भाखड़ा नहर का चल रहा रास्ता टोल के बाद बंद किया गया। समाना बाई पास पर हुए एक प्रयास ने आए दिन के जाम बंद कर दिए।
रोपड़ के बाईपास को सरहिंद नहर किनारे चमकौर साहिब तक किया गया है, इसे लुधियाना तक बढ़ाया जा सकता है। दोराहा के पास से जिस तरह से नहर का दोहरा प्रयोग हुआ है। राड़ा साहिब से अहमदगढ़ मंडी पुल तक गई नहरी सड़क को बठिंडा तक ले जाया जा सकता है। सतलुज के अलावा रावी दरिया से निकली नहर किनारे सड़क बना, सेना को सौंप,  इसे सीमा क्षेत्र तक खींच सुरक्षा बढ़ाने के अलावा तस्करी रोकने में भी प्रयोग किया जा सकता है।
वहीं पर्यावरणविद् डा. जोगिंदर टाईगर कहते है कि अगर इस ओर कार्य किया जाता है तो वर्तमान सड़कों के किनारे किसान की जमीनों का हो रहा अधिग्रहण रुकेगा और नहरों के किनारे टूटने से भी बचत होगी, खाली पड़ी सरकारी जमीन का सदुपयोग होने के अलावा। नियमित रूप से चलता ट्रैफिक और सड़क की होने वाली जांच किनारे पक्के रखेगी और बाढ़ से भी निजात दिलाएगी। नदी के एक ओर के धूसी बांध पक्के हो सकेंगे और कनेक्टीविटी बढऩे से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा।
वहीं प्रदेश के नहरी विभाग के चीफ इंजीनियर इजी. एएस दुल्लत कहते है कि यह सब कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है, हर स्थान पर नहीं किया जा सकता। विभाग की ओर से दोराहा से बठिंडा तक बठिंडा ब्रांच पर सड़क बनाए जाने के विचार पर काम चल रहा है। इसी क्रम में अबोहर ब्रांच पर भी सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इस योजना पर भी काम चल रहा है।

Wednesday, 9 March 2011

एईटीसी ने कानून पढ़ाया तो भूपेश अग्रवाल ने राजनीति

-व्यापारियों ने कहा भ्रष्ट अफसरों का क्या करें, अधिकारी कहते टेक्स चोरी रोकी जाए

भूपेश चट्ठा  पटियाला

फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रीज ऐसोसिएशन की ओर से आबकारी एंव कराधान विभाग और नगर निगम पटियाला के अधिकारियो के साथ रखे गए रूबरू कार्यक्रम में जहां व्यापारियों ने अपने दुखड़े सुना रियायतों की मांग की वहीं अधिकारियों ने किसी तरह की रियायतें देने में तो खुद को तकनीकि रूप से अस्मर्थ बताया अलबत्ता इतना आश्वासन जरूर दे दिया कि किसी व्यापारी के साथ धक्का होता है तो वह अथवा ऐसोसिएशन सीधा संपर्क कर सकती है।

ऐसोसिएशन के वरिष्ठ नेता सुरिंदर मित्तल की ओर से आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री डिवेलपमेंट बोर्ड के सदस्य एसडी भरत व्यापारियों व उद्योगपतियों की की समस्याएं रखते हुए कहा कि कई बार उन पर टेक्स के साथ पेनल्टी सिर्फ इस लिए थोप दी जाती है क्योंकी अधिकारी ने या तो टारगेट पूरा करना होता है या व्यापारी की फाईल उसके सामने खुल गई होती है। जबकि छोटे परिवार में रह रहा आज का व्यापारी कागजी कार्यवाई करने में अपना अधिक समय नहीं निकाल पाता और आए दिन कानून बदल रहे है।

वहीं बिक्री कर विभाग की ओर से अपनी पूरी टीम के साथ आए सहायक आबकारी एंव कराधान आयुक्त एचपीएस गिहोत्रा ने पूर्ण रूप से कानूनी ज्ञान का पाठ पढ़ाते हुए बताया कि वेट जैसे कानून लागू होने के बाद कई साल सरकार ने व्यापारियों पर पूरा भरोसा कर उनसे पूरा टेक्स भरे जाने की उम्मीद की लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो सख्ती करनी पड़ी। और ये जरूरी भी है कि जिस सरकार से वेतन लिया जा रहा है उस प्रति वफादारी निभाते हुए टेक्स की चोरी को पकड़े। यदि टेक्स चोरी अब भी नहीं रुकती तो और सख्ती होगी और मामले भी दर्ज करवाए जाएंगे। वहीं एईटीसी गिहोत्रा ने आश्वस्त किया कि नाहक ही किसी पर पैनल्टी नहीं लगाई जाएगी और यदि उनका कोई कर्मी अथवा अधिकारी गड़बड़ करता है तो वे उस पर भी कड़ी कार्यवाई करेंगे। सिर्फ उन्हें एक एसएमएस कर दिया जाए, शिकायतकर्ता का नाम भी गुप्त रखा जाएगा।

वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आबकारी एंव कराधान बोर्ड के डायरेक्टर भूपेश अग्रवाल ने पूरी तरह से व्यापारी वर्ग का पक्ष लेते हुए कहा कि व्यापारियों को आए दिन अधिकारियों के हाथों जलील होना पड़ता है। इसे बर्दाशत नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चाहे वे सरकार में है लेकिन अपनी कार में दरी लेकर चलते है, जहां कहीं भी व्यापरी वर्ग के साथ अन्याय देखेंगे वहीं धरना देने को तैयार है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट नाभा के चेयरमैन भूपेश अग्रवाल कहते है कि विभाग उन दो चार फीसदी गलत काम करने वालों की आड़ में पूरे उस समुदाय को बदनाम कर जलील नहीं कर सकता, जिसके दिए कर की वजह से अधिकारी मोटी तनख्वाह पाते है और सारा सिस्टम चल रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि जिस तरह से व्यापारियों की शिकायतें अधिकरियों के पास आई होंगी वेसे ही उनके पास भी अधिकारियों के खिलाफ लंबी फैहरिस्त है। हालांकि अंतत: इस बात पर सहमति भी बन गई कि व्यापारियों को बिना मतलब उलझाया नहीं जाएगा और भ्रष्ट अधिकारियों खिलाफ भी कारवाई होगी।

निजी जमीन की ही करवा दी बोली!


भूपेश चट्ठा, पटियाला

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और नगर सुधार ट्रस्ट ऐसे शब्द हैं जिनमें विश्वास और सुधार को काफी प्रमुखता दी जाती है, लेकिन आज एसएसटी नगर में विकास योजना सुंदर नगर के लिए हुई बोली में विश्वास कम और शक ज्यादा पैदा कर दिया। आरोप है कि ट्रस्ट ने निजी अधिकार वाली जमीन के 400 गज के एक टुकड़े को भी अपनी बोली में शामिल कर नीलाम कर दिया, जिसकी बाकायदा रजिस्ट्री हो चुकी है।

बोली शुरू होने से ठीक पहले उक्त प्लाट का मालिक नीलामी स्थल पर आ पहुंचा और ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज को सारे मामले की जानकारी दी। इस पर बजाज ने उन्हें एक अधिकारी विशेष से बात करने की सलाह दी। एक ओर अधिकारियों ने नीलामी प्रक्रिया जारी रखी तो दूसरी ओर उन्हें ट्रस्ट कार्यालय में आने को कह दिया।

इसके तुरंत बाद मौके पर ही प्लाट के मालिक होने का दावा करने वालों ने मंच से ही रजिस्ट्री हाथ में लहराते हुए घोषणा कर दी कि वे ही जमीन के उक्त टुकड़े के मालिक हैं और अगर कोई प्लाट खरीदता है तो हर्जाने के लिए वो खुद जिम्मेदार होगा। ट्रस्ट के बोली नहीं रोकने की स्थिति में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। प्लाट की पावर ऑफ अटार्नी रखने वाले संजीव वालिया दस्तावेज दिखा दावा करते हैं कि 1968 में पुराने प्लाट न. 94 का मुख्तयारनामा ओमप्रकाश पुत्र सुंदरलाल के नाम था जिससे उन्होंने प्लाट खरीदा और 1971 में रजिस्ट्री भी करवाई। एसएसटी नगर की 33 फुटी रोड पर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के नए नंबरों 27, 27ए, 27बी और 28 में उनकी जमीन का हिस्सा आ रहा है। बीती रात ही नीलामी की हो रही घोषणा के दौरान उन्हें अहसास हुआ तो भागदौड़ शुरू हो गई।

संजीव वालिया बताते है कि उनके पास खसरा न. 5385/2486/2435/1072 में 400वर्ग गज का टुकड़ा खेवट न. 603 खतोली न. 1334 श्रीमती गीता के नाम है आर इसकी पावर ऑफ अटार्नी उनके पास है। वालिया का आरोप है कि सरकार का काम लोगों के जानमाल और जमीन जायदाद की सुरक्षा करना है ना की जमीन छीन कर निलाम कर देना। वे न्यायालय की शरण में जा रहे है।

ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज कहते हैं कि ट्रस्ट ऐसे ही किसी की जमीन नीलाम नहीं कर देता। इंजीनियरिंग विभाग से रिपोर्ट आती है। इसके बाद ही पूरी जांच के बाद जमीन की नीलामी की जाती है। अगर किसी को शिकायत है तो उनके पास आ सकता है।


ठंडा रहा बोली का रिस्पांस


निज संवाददाता, पटियाला

नगर सुधार ट्रस्ट ने रिहायशी व व्यापारिक प्लाटों की बोली में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये कमाए। बोली के दौरान लोगों में अधिक उत्साह देखने को नहीं मिला क्योंकि करीब साढ़े तीन दर्जन में से करीब एक दर्जन जगहें ही बोली में बिक पाए।

नगर सुधार ट्रस्ट ने शहर के महाराजा यादविंद्रा एनक्लेव, शहीद सेवा सिंह ठीकरी वाला नगर, शहीद सेवा सिंह ठीकरीवाला नगर (सुंदर नगर) विकास स्कीम ट्रांसपोर्ट नगर, विकास नगर सेंटर व्यापारिक जगह में करीब साढ़े तीन दर्जन संपत्तियों को बोली से नीलाम करने था। नगर सुधार ट्रस्ट में चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज, कार्यकारी अधिकारी गुरिंदर सिंह सोढी, भाजपा नेता अरुण गुप्ता के अलावा अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में बोली करवाई गई। बोली के दौरान महाराजा यादविंदरा एनक्लेव की व्यापारिक जगह 121 वर्ग गज में बनी जगह को 75 लाख में खरीदा गया जबकि रिर्जव कीमत 45 लाख 59 हजार रुपये रखी गई थी।

Friday, 4 March 2011

पोस्टर से मंच तक 'रखड़ा राज'


रखड़ा ने विकास रैली में दिखाई प्रबंधन क्षमता
-समाना से उम्मीदवार, जीते तो सरकार में बड़ी जिम्मेवारी दूंगा कहा सुखबीर बादल ने
-रैली में हैरी मान को नहीं बुलाया, प्रो. चंदूमाजरा भी नदारद, पर शक्ति प्रदर्शन कामयाब
भूपेश चट्ठा, समाना (पटियाला)

अकसर शिरोमणि अकाली दल की रैलियों में साईड लाइन रहने वाले किंतु मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करीबियों में समझे जाने वाले सुरजीत सिंह रखड़ा ने आज विकास रैली में अपनी प्रबंधन क्षमता को उपमुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल के सामने बेहतरीन ढ़ंग से साबित कर दिखाया। दिलचस्प है कि प्रभावशाली रैली से प्रभावित उपमुख्य मंत्री व पार्टी प्रधान ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ और उन्हें चुनाव लोकतंत्र में समाना विधानसभा क्षेत्र की बागडोर पूरी तरह से सौंप दी है।

समाना व आसपास के क्षेत्र में 38 करोड़ रूपये के प्रोजेक्टों के शिलान्यास के बाद आयोजित रैली में पार्टी प्रधान ने ना केवल मंच से रखड़ा को उम्मीदवार घोषित कर दिया अपितु समाना की जनता से यह भी कह दिया कि आप इन्हें जिता कर आगे भेजो तो अगली सरकार में एक बड़ी जिम्मेवारी इनका इंतजार कर रही है। समाना शहर व क्षेत्र के किसानों के लिए रखी गई अन्य मांगों पर उपमुख्य मंत्री ने कहा कि सुरजीत सिंह रखड़ा उनके पास जो भी प्रोजेक्ट लाएंगे वे तो पास हो ही जाने है। ऐसे ही मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी आने वाले है और वे सुखबीर को तो किसी बात से इंकार कर सकते है पर सुरजीत को नहीं।

दूसरी ओर रैली और विधान सभा क्षेत्र में पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर चल रही खींचतान में सुरजीत रखड़ा ने आज सभी को कुशल प्रबंधन वखुल कर लिए गए निर्णयों के बाद सभी को राजनीतिक पटखनी दे दी है। कांग्रेस छोड़ अकाली दल में आए हरिंदर पाल सिंह हैरी मान के साथ हाल ही में उठे विवाद में पार्टी आलाकमान स्पष्ट रूप से सुरजीत रखड़ा के साथ खड़ा नजर आया। पहले तो जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन सुरजीत रखड़ा को अपने स्तर पर रैली करने की खुली छूट दी, ऐसे में पोस्टर से लेकर मंच तक हर तरफ उन्हीं की राज दिखा। इतना ही नहीं रैली में ना केवल हैरी मान को बुलाया गया अपितु पार्टी महासचिव व पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा भी दिखाई नहीं दिए। रैली में सुरजीत रखड़ा ना केवल शक्ति प्रदर्शन में कामयाब रहे बल्कि कड़े निर्णय भी लिए है। व्हीसपर कैंपेन चलाने वाले अथवा भीतरी घात करने वालों को पहले ही किनारे कर दिया और जो आज सुबह रैली प्रबंध देख उनके घर तक आ गए उन्हें लौटा दिया गया।

हालांकि रैली में मुख्य संसदीय सचिव राज खुराना, पावरकाम के सदस्य गुरबचन सिंह बची, पिछड़ी श्रेणी कमीशन के चेयरमैन प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर, यूथ डवेलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना, भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रधान रविंदर सिंह गिन्नी ढिल्लों, एनआरआई चरणजीत सिंह व रवि आहलुवालिया, राजला गांव के सरपंच कश्मीर सिंह राजला प्रमुख रूप से मौजूद रहे।



लंगर का स्थान पैकड फूड ने, पानी बोतल बंद


उपमुख्य संवाददाता, समाना, पटियाला

अकाली दल की रैली हो तो बरबस ही रैली स्थल के आसपास लगने वाले लंगरों की तस्वीर उभर आती है लेकिन समाना की इस विकास रैली में आम चलन के विपरीत पैकड फूड का प्रबंध किया गया। सुरक्षा जांच के साथ ही हर व्यक्ति के हाथ में खाने का बंद डिब्बा थमा दिया जाता। इतना ही नहीं आम तौर पर वीआईपी समझे जाने वाले बोतल बंद पानी की बोतल भी प्रत्येक व्यक्ति को दी गई। रैली के प्रबंधक तो 35 से 40 हजार का संख्या बल होने का दावा करते है पर सूत्रों का कहना है कि शुरूआत में 200 गुणा 1000 फुट में करीब दस हजार के बैठने की व्यवस्था की गई और 25 हजार खाने के पैकट का आर्डर दिया गया। रैली स्थल पर करीब दस हजार कुर्सियों पर त्रिपाल ढक दी गई, हालांकि रैली के चरम तक पहुंचते -पहुंचते सारी कुर्सियां बाहर लग गई और खाने के लिए खींचतान शुरू हो गई।



केंद्रीय बजट दिशाहीन व गरीब विरोधी: उपमुख्य मंत्री

-मंहगाई की मार झेल रहे आम आदमी को राहत नहीं

-रेल बजट भी देश का नहीं बंगाल का हुआ: सुखबीर

भूपेश चट्ठा, समाना पटियाला

उपमुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल ने आज केंद्रीय बजट को पूरी तरह से दिशाहीन और गरीब विरोधी बताया है। समाना विधान सभा क्षेत्र के शिरोमणि अकाली दल प्रभारी सुरजीत सिंह रखड़ा के नेतृत्व में आयोजित विकास रैली के तुरंत बाद संवाददाताओं के साथ बातचीत में उपमुख्य मंत्री ने केंद्रीय बजट की आलोचना में कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में चल रही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार ने मंहगाई की मार झेल रहे देश के लोगों की कोई चिंता नहीं है।

क्षेत्र में 38 करोड़ रूपये के प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के बाद सुखबीर बादल ने कहा कि केंद्र का यह बजट बहु राष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाला है। कांग्रेस और प्रधानमंत्री का सरकार पर अब कोई कंट्रोल नहीं रहा,यह सरकार घोटालों की सरकार बन गई है, जबकि इसके विपरीत पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार कृषि, बिजली, खेलें, शिक्षा, शहरी व ग्रामीण विकास में योजना से विकास कर रही है।

वहीं रेल बजट पर पूछे गए सवाल पर वे कहते है कि यह भी देश का नहीं बल्कि बंगाल का बजट हो कर रह गया है। रैली में सुखबीर कहते है कि प्रदेश में विद्या के मामले में 1000 करोड़ रुपए से आदर्श स्कूल खोले जा रहे है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में हजारों अध्यापक भर्ती कर एक बड़ी कमी को पूरा कर दिया गया है। उन्होंने नवयुवकों को नशों से बचाने एवं खेलों में दिलचस्पी पैदा करने हेतु 100 करोड़ रुपए की लागत से पंजाब भर में स्टेडियम व जिम बनाए जाने का जिक्र किया। आम आदमी की मुश्किलों के हल करने हेतु जमीनों की फर्दां को कम्प्यूटरीकरण एवं पुलिस रिकार्ड को कम्प्यूटरीकरण सहित अनेकों प्रशासनिक सुधार किए गए है।इस अवसर पर बादल ने इलाके में किए जा रहे विकास कार्यां का सेहरा जिला योजना बोर्ड अध्यक्ष सुरजीत ङ्क्षसह रखड़ा के सिर पर बांधा तथा उनको अपना पारिवारिक सदस्य बताते हुए उनके द्वारा इलाके के विकास हेतु की गई शेष मांगों को मुख्यमंत्री प्रकाश ङ्क्षसह बादल के विदेश से वापिस आने पर तुरंत पूरी करने का विश्वास दिलाया। रखड़ा को एक दरवेश राजनीतिज्ञ बताते उन्होंने कहा कि रखड़ा की हमेशा यही कोशिश रही है कि सरकार से अपने इलाके के लिए कोई नया प्रोजैक्ट लेकर आए।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह  पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो अपने शासन के 5 वर्ष तथा पिछले चार वर्षांे से किसी गांव में नहीं गया हो उसे पंजाब में हो रहे विकास बारे क्या जानकारी हो सकती है। केन्द्र की कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लेते उन्होंने यूपीए सरकार में हो रहे अरबों रुपए के घोटों में उसे जिम्मेदार माना है।

सुरजीत रखड़ा ने भी मनमोहन सिंह को बेबस प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार को चोर, डाकू, लुटेरों की सरकार कहा और जनता को कांग्रेस पार्टी से सुचेत रहने की सलाह दी। उन्होंने बादल द्वारा हलके के विकास कार्यां हेतु दिए योगदान के लिए उनका धन्यवाद किया।

Thursday, 3 March 2011

अब बस भी करो मेघा..


गेहूं की जरूरत : तेला धुला पर पीली कुंगी की मार बढ़ने का अंदेशा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
 जब गेहूं को ठंड की जरूरत थी तो फरवरी के शुरू में ही तापमान बढ़ गया और अब फसल पकने को है तो पारा लुढ़क कर नीचे आ गया है। रुक-रुक कर लेकिन लगातार हो रही बारिश से मौसम में आई नमी गेहूं की उपज को विपरीत रूप से प्रभावित करने को है। महंगे कीटनाशकों से जूझ रहा किसान अब आसमान से गुहार लगा रहा है,मत बरसो मेघा, मानसून का इंतजार कर लो। धर्मेड़ी गांव के किसान गुरप्रीत सिंह कहते है कि कुदरत के आगे किसी की नहीं चलती, यहां कोई बीमा भी नहीं करवाता, सब कुदरत पर छोड़ा जाता है, और अब कुदरत का बिगाड़ है यही ठीक करेगी। पिछली बार धान के सीजन में भी किसान बाढ़ का शिकार हो गया था और अब भी यही हालात बने हुए हैं। आज गर्म मौसम की जरूरत है, बल्लियां निकलने को हैं और दाना तभी बेहतर ढंग से बनेगा अगर मौसम में नमी नहीं होगी और ज्यादा से ज्यादा शुष्क रहेगा। ऐसे ही संसारपुर में प्रोग्रेसिव फार्मिग करवा रहे हरजिंदर सिंह बदेशां कहते हैं कि तेले की मार से उभरे ही नहीं थे कि अब पीली कुंगी आ गई, ऐसे में मार तो पड़नी तय है। अब कितनी पड़ेगी, यह आने वाले दिनों में खिलने वाली धूप पर निर्भर करता है। हालांकि क्षेत्र में जिन किसानों ने अपनी मनमर्जी से किस्मों की बिजाई की है, वे ज्यादा चपेट में आई है। उधर मुख्य कृषि अधिकारी सुभाष चंद्र खुराना कहते है कि ऐसा मौसम गेहूं को तो यह खराब ही करेगा, बारिश के बाद हवा चली तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता है। कृषि अधिकारी बताते हैं कि इन दिनों में बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना ज्यादा रहती है। जिन किसानों ने फसल को पानी लगा रखा है और उपर से बारिश के साथ हवा चली है वहां पौधे के गिरने की संभावना बन पड़ती है। कृषि विभाग की ओर से 50 फीसदी सब्सिडी पर प्रोपेगोणजोल अथवा टिल्ट स्प्रे करने को कहा गया है। इसकी कम से कम एक और जरूरत पड़ने पर दो स्प्रे 15 दिन के अंतराल पर किए जा सकते हैं। साथ ही वे यह भी कहते है कि किसान अब इस प्रति काफी जागरूक है लेकिन विभाग भी बराबर प्रचार कर रहा है।

गरीब पंचायतों की जमीन लीज पर, हुई कंगाल


-33 सालों के लिए चहेते निजी हाथों में, खाली करवाने का कोई प्रावधान नहीं
-हाई-वे के निकट और कामर्शियल महत्व की जमीनों पर सबकी निगाहें
भूपेश चट्ठा, पटियाला
किसान कंगाल हो, कर्ज तले डूबा हो तो आत्महत्या की बात सोचता है, कभी कर भी लेता है पर पंजाब की गरीब पंचायतों के पास यह विकल्प भी नहीं है, गांव की सामुहिक जमीनें औने पौने दामों पर लीज पर दे गांव को हमेशा के लिए कंगाली में धकेला जा रहा है। लीज पर लेने वाले या तो 'अपने बंदे' होने का टेग धारण किए है या फिर 'गांधी जी की तस्वीर हाथ में थामे वे व्यापारी' है जिनकी हर सरकार में चलती है। 
 
याद रहे कि पंचायती कानून के तहत ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत गांव की जमीन को 33 सालो के लिए दिया जा सके अलबत्ता  शहरों में म्यूनिसिपल कमेटियां अपने अधिकार क्षेत्र में 99 सालो के लिए जमीन देती रही है पर देश की आजादी के बाद से अब तक ऐसी किसी भी जमीन को नगरीय क्षेत्र में खाली नहीं करवाया जा सका है।
 विभागीय सूत्र बताते है कि राज्य में अब लीज पर दी जा रही पंचायती जमीन को खाली करवाने का उपाय लीज डीड में दर्ज ही नहीं है। हाई वे के निकट की एक करोड़ रूपये प्रति एकड़ मूल्य से अधिक की पंचायती जमीन को दो से पांच लाख रूपये में 33 सालों के लिए चढ़ाया जा रहा है। जबकि ये आसानी से एक से दो लाख रूपये सालाना की आय दे सकती है। सूत्र कहते है कि 33 साल बाद इन जमीनों पर इंफ्रास्ट्रक्चर बना होने के नाम पर कोर्ट से आसानी से स्टे लिया जा सकता है। ऐसा नगरीय कानून की आड़ में चल भी रहा है।

 हाई-वे के निकट और कामर्शियल महत्व की जमीनों पर अब सबकी निगाहें टिकी है। हालांकि खेती के नाम पहले भी ठेके पर गांव के लोग जमीन लेते रहे है पर इसका आधार दो चार साल का ही रहता आया है और शुल्क लगभग बाजार भाव के पास ही रहता है। अब लगभग हमेशा के लिए ही जमीन एक पार्टी की जमीन होकर रहने की गुंजाइश बढ़ गई है। इतना ही नहीं ये जमीन खुली निलामी में भी नहीं दी जा रही। ऐसे ही अपना नाम ना प्रकाशित किए जाने की शर्त पर शहर के साथ लगते गांव के एक सरपंच कहते है कि उन पर स्र्वोच्च प्रशासन का भारी दवाब होता है और ना कहने की स्थिति में प्रशासक लगा वही काम करवा लिया जाता है।  

दूसरी ओर इस संबंध में वित्त कमीश्नर व सचिव ग्रामीण विकास व पंचायत जगपाल सिंह संधू और ग्रामीण विकास व पंचायत विभाग के डायरेक्टर व प्रशासनिक सचिव गुरदेव सिंह सिद्धू से संपर्क नहीं किया जा सका। बताया गया कि वे न्यायालय की कारवाई के चलते व्यस्त है। और कैबिनेट मंत्री रणजीत सिंह ब्रहमपुरा अपने विधान सभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों में मसरूफीयत के चलते प्रतिक्रिया नहीं दे सके।

पूर्व मंत्री व विधायक विक्रमजीत सिंह मजीठीया कहते है कि उनके पर्यावरण एंव प्रोद्योगिकी मंत्रालय के कार्यकाल में कुछ बायोमॉस प्रोजेक्टों के लिए पंचायतों की जमीनें लीज पर जरूर दी हैं अन्यथा कोई जमीन लीज पर नहीं दी जा रही। अलबत्ता कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में रिलायंस की फार्म टू फोर्क योजना के तहत पंचायतों की जमीनें हवाले करनी थी जिसका उन्हीं के बंदों ने विरोध किया और अब बादल सरकार ने इसे रद्द कर दिया था।  
उपमुख्य मंत्री सुखबीर सिंह बादल से इस संबंध में बात करने पर वे सवाल करते है कि ऐसा कहां हुआ है... किसने किया है...किस काम के लिए जमीन दी गई है...अब तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश है। राज्य में हाई-वे पर स्थित गांवों की शामलाट जमीनों को लीज पर देने के सवाल पर वे कहते है कि अगर ऐसा है ते रिव्यू करेंगे।