लापरवाही
साढ़े चार लाख रुपये सालाना आय वालों को मिलना था योजना का फायदा
केंद्र की ओर से नोटीफीकेशन जारी होने के महीनों बाद भी नहीं हुई कार्यवाई
लोन लेने वालों को हर माह लग रहा है चार हजार रूपये का चूना
भूपेश चट्ठा, पटियाला
किसानों की कर्ज माफी में भेदभाव करने के आरोप लगा केंद्र सरकार को पानी पी पी कर कोसने वाली पंजाब सरकार और यहां की नौकरशाही अब तक शिक्षा ऋण लेने वाले किसी भी पंजाबी को ब्याज माफी का लाभ नहीं दिला सकी है। पिछले केंद्रीय बजट में घोषणा की गई थी कि कम आय वर्ग के लोंगों को अपने बच्चों की उच्च शिक्षा दिलाने लोन लेने पर दिया गया ब्याज केंद्र सरकार वापिस करेगी।
केंद्र के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से चलाई गई इस योजना के तहत ना तो राज्य की ओर से किसी तरह का हिस्सा जमा करवाना है और ना ही अपनी ओर से कोई योगदान डालना है। किए जाने वाले एकमात्र कार्य में सिर्फ योजना को राज्य में लागू करने का पत्र मात्र जारी करना है।
बजट में हुई घोषणा पर जहां मंत्रालय ने इस साल चार अप्रैल को नोटीफिकेशन जारी कर तुरंत कार्यवाई करने के आदेश जारी किए वहीं इंडियन बैंकिंग ऐसोसिएशन के चेयरमैन व प्रबंधकीय निदेशक ने भी देश मे काम कर रहे सभी बैंकों को 25 मई को आदेश जारी कर दिए। इन आदेशों में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को जारी किए गए पत्र का हवाला देने के अलावा पत्र की कापी और योजना का ब्यौरा भी दिया गया है। योजना के तहत साढ़े चार लाख रूपये सालाना तक की आय रखने वाले उन सभी लोगों को ब्याज सबसिडी का लाभ देने क ो कहा गया है जो उचित योगयता रखते हों। इसके लिए आवश्यक उपाय करने और इस योजना को वर्ष 2009-10 शैक्षणिक सत्र से लागू करने की बात भी कही गई है।
दिलचस्प है कि इस पत्र की कापी सभी राज्यों के शिक्षा सचिवों और सभी राज्यों की सरकारों के वित्तीय सचिवों को भी भेजने क साथ साथ मंत्रालय की वैब साइट पर डालने की बात भी कही गई है।
बाहरवीं कक्षा के बाद किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से तकनीकि अथवा व्यावसायिक कोर्स करने 10 लाख रूपये तक के लोन पर लागू इस योजना के लिए जिला स्तर पर प्रशासन को उत्तरदायी बनाया गया है। कम आय का प्रमाण पत्र जारी करने वाली कंपीटेंट अथारिटी तहसीलदार को बनाया गया है।
दिलचस्प है कि एक ओर बैंकों से ब्याज सबसिडी लेने वालों की संख्या हर शहर में दर्जनों से निकल सैंकड़ों में जाने को है वहीं तहसीलदारों के पास ऐसा कोई आदेश ही नहीं आया है जिसके तहत वे बैंक को प्रमाण पत्र जारी कर सकें। ऐसे में हर परिवार पर हर महीने चार हजार रूपये का बोझ पड़ रहा है। और यह भार अब बढ़कर डेढ़ साल का हो चुका है।
हालांकि पटियाला के तहसीलदार सुभाष भारद्वाज ने उक्त जानकारी बांटे जाने पर कार्यवाई करने का आश्वासन दिया है। वे कहते है कि अभी तक एक दो लोगों ने ही संपर्क किया है। पर किसी के पास नोटीफिकेशन की कापी नही है। ऐसे में मुख्यालय से संपर्क कर पत्र मंगवाया जा रहा है, इसके बाद प्रमाण पत्र भी जारी किए जाएंगे।
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